सारंगढ़/रायगढ़। 500 एकड़ में प्रस्तावित चूना पत्थर खदान को लेकर सारंगढ़ क्षेत्र में माहौल गरमाया हुआ है। जिला प्रशासन जनसुनवाई कराने की तैयारी कर रहा है, लेकिन प्रभावित ग्रामीण जमीन देने से साफ इंकार कर रहे हैं। उनका कहना है कि खदान खुलने से पर्यावरण पर विपरीत असर पड़ेगा, जलस्रोत और खेती चौपट होगी तथा स्थानीय लोगों का जीवन प्रभावित होगा।

ग्रामीणों के विरोध को स्थानीय विधायक उत्तरी गनपत जांगड़े, जनपद अध्यक्ष ममता राजीव सिंह और कई जनप्रतिनिधियों का समर्थन मिला है। बीते दिनों सैकड़ों ग्रामीणों ने सारंगढ़ तहसील कार्यालय से कलेक्टर परिसर तक रैली निकालकर नारेबाजी की और धरना दिया। उन्होंने जनसुनवाई रद्द करने और भूमि अधिग्रहण रोकने की मांग का ज्ञापन कलेक्टर को सौंपा।

विरोध कर रहे ग्रामीणों का कहना है कि ग्रीन सस्टेनेबल मैनुफैक्चरिंग प्राइवेट लिमिटेड द्वारा प्रस्तावित खदान के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका (WPC 25753/2025) दायर की गई है, जिसकी सुनवाई लंबित है। इसके बावजूद जनसुनवाई कराना न्याय सिद्धांत के विपरीत है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रभावित जमीनों के सर्वे में स्कूल, मुक्तिधाम और निस्तारी सुविधाओं को नजरअंदाज किया गया और हरे-भरे पेड़ों की वास्तविक संख्या का भी जिक्र नहीं किया गया।

अब सवाल यह है कि क्या जनता की आवाज प्रशासन सुनेगा या फिर नौकरशाही और कंपनी का दबाव भारी पड़ेगा। आने वाले दिनों में यह विरोध आंदोलन का बड़ा रूप ले सकता है।
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