लैलूंगा। रायगढ़ जिले के लैलूंगा जनपद पंचायत के केलो सभा भवन में शनिवार को आदि कर्मयोगी अभियान के तहत एकदिवसीय कार्यशाला का आयोजन हुआ। केंद्र सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना ने पूरे क्षेत्र में विकास को लेकर नई उम्मीदें जगा दी हैं। यह अभियान देश के 28 राज्यों और 550 जिलों में चल रहा है। लैलूंगा में आयोजित कार्यशाला में जनपद पंचायत के सचिव, ग्राम पंचायत प्रतिनिधि, प्रधानपाठक, वनरक्षक, छात्रावास अधीक्षक, हैंडपंप तकनीशियन, मितानीन, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, महिला समूह, लाइनमैन, शिक्षक और अन्य स्टाफ ने सक्रिय भागीदारी निभाई।
ग्रामीण विकास के लिए ठोस रणनीति
कार्यशाला में निर्णय लिया गया कि 2 अक्टूबर तक ट्रांजिट वाक चलाए जाएंगे। अधिकारी और कर्मचारी गाँव-गाँव जाकर ग्रामीणों से संवाद करेंगे, उनकी समस्याओं को प्रत्यक्ष रूप से समझेंगे और जमीनी हकीकत पर आधारित विकास योजनाएँ तैयार करेंगे। अभियान का मुख्य उद्देश्य सिर्फ कागजी काम नहीं बल्कि निजी और सामुदायिक विकास की ठोस योजनाओं को जमीन पर उतारना है।
आदिवासी अंचल पर विशेष ध्यान
लैलूंगा जैसे आदिवासी बहुल क्षेत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोज़गार और बुनियादी ढाँचे की कमी लंबे समय से महसूस की जाती रही है। अभियान का फोकस इन समुदायों को मुख्यधारा से जोड़ना है। अधिकारियों ने कहा कि विकास का लाभ अब समाज के अंतिम पायदान तक पहुँचाना ही असली लक्ष्य है।
गाँवों में जागी उम्मीदें
गाँवों से आए प्रतिनिधियों ने कहा कि यदि योजनाएँ इस बार फाइलों से निकलकर जमीन पर उतरती हैं, तो आने वाले वर्षों में लैलूंगा क्षेत्र की तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है। ग्रामीणों ने उम्मीद जताई कि सरकार का यह अभियान दिखावा नहीं बल्कि सच्चे विकास की दिशा में कदम होगा।
कुल मिलाकर, लैलूंगा की धरती से आज विकास का नया बिगुल बज चुका है। यदि केंद्र सरकार की मंशा और स्थानीय प्रशासन की मेहनत साथ आई, तो आदि कर्मयोगी अभियान जनजातीय समाज की ज़िंदगी में वास्तविक बदलाव लाने वाला साबित होगा।



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