रायपुर | शिक्षा | परीक्षा पे चर्चा
Pariksha Pe Charcha: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय संवाद कार्यक्रम परीक्षा पे चर्चा में इस बार छत्तीसगढ़ के विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। परीक्षा के तनाव से लेकर छुट्टियों में घूमने की चाह, पढ़ाई और खेल के संतुलन, पर्यावरण संरक्षण और भविष्य की जिम्मेदारियों तक—छात्रों ने बेबाकी से सवाल पूछे। कार्यक्रम का संदेश स्पष्ट रहा कि पढ़ाई को बोझ नहीं, बल्कि सीखने की सहज प्रक्रिया के रूप में अपनाया जाए।
जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री के नया रायपुर दौरे के दौरान नवनिर्मित मुख्यमंत्री निवास में इस कार्यक्रम की शूटिंग की गई थी। संवाद के दौरान माहौल पूरी तरह अनौपचारिक रहा। कहीं ठेठरी और चकली जैसे पारंपरिक व्यंजनों पर हल्की-फुल्की बातचीत हुई, तो कहीं जीवन के अनुभवों के जरिए गंभीर सीख दी गई।
“भविष्य की पीढ़ी में जिम्मेदारी और जिज्ञासा हो”
एक छात्र ने प्रधानमंत्री से पूछा, “आप देश के नेता हैं। आप हम भविष्य की पीढ़ी से कौन सी क्वालिटी चाहते हैं?”
इस पर पीएम मोदी ने कहा कि नई पीढ़ी में समाज और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी, सीखने की जिज्ञासा और अपने कर्तव्यों के प्रति सजगता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब ये गुण स्वभाव का हिस्सा बन जाते हैं, तभी देश आगे बढ़ता है।
घूमने की चाह पर सलाह: “पहले अपने आसपास को जानो”
छात्रों ने पूछा कि परीक्षा के बाद वेकेशन में घूमने के लिए भारत की पांच जगह बताइए। इस पर प्रधानमंत्री ने सीधे पांच पर्यटन स्थलों के नाम बताने के बजाय छात्रों को सोचने पर मजबूर किया।
उन्होंने कहा, “आप जिस तहसील से हो, पहले वहां की सूची बनाओ। फिर जिले और राज्य की। देखो कि अपने आसपास क्या-क्या नहीं देखा है।”
उन्होंने यात्रा को किताबों से परे जीवन का अनुभव बताया—रेल से सफर करना, घर से खाना ले जाना, भीड़ देखना और लोगों से बातचीत करना—ये सब सीखने का हिस्सा हैं। उनका कहना था कि भारत विविधताओं से भरा देश है और उसे समझने के लिए जमीनी अनुभव जरूरी है।
परीक्षा तनाव पर मंत्र: “शांत मन से बैठिए”
एक छात्र ने पूछा कि परीक्षा के दौरान ध्यान केंद्रित नहीं हो पाता और मन अशांत हो जाता है, तो क्या करें?
प्रधानमंत्री ने भरोसा दिलाते हुए कहा कि जो कुछ भी पढ़ा और सुना है, वह बेकार नहीं जाता। वह मन के भीतर कहीं न कहीं संग्रहित रहता है।
उन्होंने कहा, “शांत मन से बैठिए, चिंता छोड़िए और जैसा पेपर आए, उसे ध्यान से देखिए।” उन्होंने पढ़ाई की तुलना खिलाड़ी के अभ्यास से की—निरंतर प्रयास, हार-जीत और अभ्यास से ही मजबूती आती है।
“कमजोर दोस्त को पढ़ाओ, खुद मजबूत बनोगे”
एक अन्य सवाल था कि पढ़ाई में बेहतर कैसे बनें। इस पर प्रधानमंत्री ने व्यावहारिक सुझाव दिया—कक्षा में ऐसे विद्यार्थी को दोस्त बनाइए, जो पढ़ाई में कमजोर हो। उसे पढ़ाने की कोशिश कीजिए।
उन्होंने कहा कि जब आप किसी को सिखाते हैं, तो आपका अपना विषय भी मजबूत होता है। यह सीखने की प्रभावी तकनीक है।
खेल और पढ़ाई का संतुलन जरूरी
ताइक्वांडो खेलने वाली एक छात्रा ने पूछा कि वह आगे स्पोर्ट्स पर्सन बनना चाहती हैं, तो पढ़ाई और खेल को कैसे संतुलित करें?
प्रधानमंत्री ने स्पष्ट कहा कि शिक्षा और खेल दोनों जरूरी हैं। “यह मत सोचिए कि खेल में अच्छे हैं तो पढ़ाई की जरूरत नहीं, और यह भी नहीं कि सिर्फ पढ़ाई ही सब कुछ है।”
उन्होंने संतुलन को जीवन की कुंजी बताते हुए कहा कि खेल से अनुशासन, टीमवर्क और मानसिक मजबूती मिलती है, जो पढ़ाई में भी मदद करती है।
पर्यावरण संरक्षण पर छोटे कदमों की सीख
देश के विकास के साथ पर्यावरण बचाने के सवाल पर प्रधानमंत्री ने छोटे-छोटे प्रयासों का महत्व बताया। उन्होंने एक स्कूल का उदाहरण साझा किया, जहां बच्चे घर से बचा पानी बोतल में लाकर पेड़ों में डालते थे और हर बच्चे को एक पेड़ की जिम्मेदारी दी गई थी।
उन्होंने कहा कि छोटी कोशिशें मिलकर बड़ा बदलाव लाती हैं। पानी बचाना, पेड़ लगाना और रोजमर्रा के जीवन में नियम बनाना—ये सब भविष्य की जिम्मेदारी का हिस्सा हैं।
नयन ने खिलाई ठेठरी, बना खुशनुमा माहौल
राजधानी रायपुर के शंकर नगर निवासी आठवीं के छात्र नयन वर्मा ने कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री को पारंपरिक ठेठरी खिलाई। नयन ने बताया कि शुरुआत में वे थोड़े नर्वस थे, लेकिन प्रधानमंत्री ने ऐसा माहौल बनाया कि सभी सहज हो गए।
पीएम ने ठेठरी के बारे में पूछा कि यह कैसे बनती है और कब खाई जाती है। नयन ने बताया कि बेसन को गोल आकार देकर तलते हैं और यह अधिकतर दिवाली पर बनाई जाती है। प्रधानमंत्री ने कहा कि महाराष्ट्र में इसे चकली कहते हैं।
ऐसे हुआ चयन
नयन के अनुसार, स्कूलों से चार-पांच नाम मांगे गए थे और छत्तीसगढ़ से कुल 22 बच्चों का चयन हुआ। नयन छत्तीसगढ़ी गीत गाते हैं और स्थानीय भाषा में बातचीत कर लेते हैं, जिसके कारण उनका चयन हुआ।
उनके पिता चंद्रभूषण वर्मा संगीत शिक्षक और गीतकार हैं, जबकि दादा गोविंदराम वर्मा राष्ट्रपति सम्मान प्राप्त सेवानिवृत्त शिक्षक हैं। नयन इन दिनों खैरागढ़ विश्वविद्यालय से संबद्ध स्कूल में शास्त्रीय संगीत की शिक्षा ले रहे हैं।
युवाओं को सकारात्मक संदेश
परीक्षा पे चर्चा के इस संवाद ने छात्रों को यह संदेश दिया कि परीक्षा जीवन का अंत नहीं, बल्कि सीखने का एक चरण है। संतुलन, जिम्मेदारी, जिज्ञासा और आत्मविश्वास—इन्हीं गुणों के साथ नई पीढ़ी देश को आगे ले जा सकती है।
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