नवरात्रि का पहला दिन मां शैलपुत्री को समर्पित होता है। शैलपुत्री का अर्थ है “पर्वत की पुत्री”। वह भगवान हिमालय की पुत्री और देवी सती का पुनर्जन्म मानी जाती हैं। मां शैलपुत्री प्रकृति, समृद्धि और आध्यात्मिक जागृति का प्रतीक हैं।
मां शैलपुत्री का महत्व
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मां शैलपुत्री को मूलाधार चक्र (Muladhara Chakra) की देवी माना जाता है।
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उनकी पूजा से जीवन में शांति, संतुलन और नई शुरुआत के लिए शक्ति प्राप्त होती है।
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वे चंद्रमा से जुड़ी हुई हैं, जो सौभाग्य और शांति के दाता माने जाते हैं।
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उन्हें सती भवानी, पार्वती और हिमावती के नाम से भी जाना जाता है।

नवरात्रि दिन 1 मुहूर्त (घटस्थापना) – 22 सितंबर 2025
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मुख्य मुहूर्त: सुबह 6:11 बजे से 7:52 बजे तक
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अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:51 बजे से 12:39 बजे तक
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प्रतिपदा तिथि: 22 सितंबर, 1:23 AM से 23 सितंबर, 2:55 AM तक
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कन्या लग्न: 6:11 AM से 7:52 AM तक

पूजा विधि
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घटस्थापना/कलश स्थापना करें – घर में पवित्र स्थान पर कलश रखें।
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कलश में गंगाजल, सुपारी, सिक्के और दुर्वा घास डालें, ऊपर नारियल और आम के पत्ते सजाएं।
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मिट्टी में सप्तधान्य (सात अनाज) बोकर कलश स्थापित करें।
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दीप जलाकर पूरे नवरात्रि इसे प्रज्वलित रखें।
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मां शैलपुत्री को सफेद रंग के फूल, गहना, और घी का भोग अर्पित करें।
नवरात्रि दिन 1 का रंग
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सफेद रंग इस दिन का प्रतीक है। यह शुद्धता, शांति और सद्भाव का प्रतिनिधित्व करता है। सफेद पहनने से मां शैलपुत्री की कृपा और शांति का अनुभव होता है।
विशेष संदेश
मां शैलपुत्री की पूजा से भक्तों को समृद्धि, सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक उन्नति का आशीर्वाद मिलता है। यह दिन नवरात्रि के नौ दिनों की पवित्र यात्रा की शुरुआत को दर्शाता है।
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