Kerala local body polls: केरल की राजनीति में बड़ा बदलाव दर्ज हुआ है। स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजों में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले एनडीए ने तिरुवनंतपुरम नगर निगम पर कब्जा कर लिया है। 101 वार्ड वाले इस निगम में एनडीए ने 50 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया, जबकि चार दशकों से काबिज लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) सिमटकर 29 वार्डों पर रह गया। यह नतीजा राज्य की शहरी राजनीति में सत्ता संतुलन बदलने वाला माना जा रहा है।
चार दशक का LDF वर्चस्व टूटा
तिरुवनंतपुरम नगर निगम लंबे समय से वाम मोर्चे का गढ़ माना जाता रहा है। इस बार परिणाम पूरी तरह उलट गए। शुरुआती रुझानों में मुकाबला कांटे का दिखा, लेकिन मतगणना आगे बढ़ने के साथ एनडीए ने स्पष्ट बढ़त बना ली और अंत तक उसे कायम रखा। यह जीत केरल की सबसे अहम शहरी स्थानीय निकाय में सत्ता परिवर्तन का संकेत है।
सीटों का गणित और फ्रंट्स की स्थिति 
नतीजों के मुताबिक एनडीए को 50 वार्ड मिले। LDF 29 सीटों पर सिमट गया, जबकि यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) ने 19 सीटें जीतकर मजबूत वापसी दर्ज की। UDF की यह बढ़त मुख्यतः LDF के मौजूदा वार्डों से आई, जहां उसने 12 सीटें छीनीं। पिछली दो चुनावों में UDF का ग्राफ नीचे था, लेकिन इस बार शहरी इलाकों में उसका प्रदर्शन बेहतर रहा।
BJP के लिए बड़ा टर्नअराउंड
बीजेपी के लिए यह नतीजा ऐतिहासिक माना जा रहा है। एक दशक पहले तक पार्टी सिर्फ छह वार्डों तक सीमित थी। 2015 में शुरुआती उछाल के बाद 2020 में पार्टी लगभग स्थिर रही और उपचुनावों में भी उसे झटके लगे। इस बार सभी आकलनों को गलत साबित करते हुए बीजेपी ने अपनी पकड़ मजबूत की, पुराने वार्डों में बढ़त बढ़ाई और नए इलाकों में भी जीत दर्ज की।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस जीत को केरल की राजनीति के लिए “वाटरशेड मोमेंट” बताया। उन्होंने कहा कि यह जनादेश राज्य की शहरी राजनीति में नए अध्याय की शुरुआत है।
UDF की वापसी, LDF को शहरी झटका
UDF ने पिछली गिरावट से उबरते हुए 19 सीटें हासिल कीं। 2015 में जहां UDF की सीटें 40 से घटकर 21 हुई थीं और 2020 में 10 रह गई थीं, वहीं इस बार शहरी मतदाताओं ने उसे फिर से मौका दिया। दूसरी ओर, LDF को ऐसे वार्डों में भी हार का सामना करना पड़ा, जहां उसने पहले कभी चुनाव नहीं गंवाया था। मुथट्टा वार्ड में कांग्रेस प्रत्याशी की जीत को खास माना जा रहा है।
प्रमुख चेहरों की जीत-हार
चुनाव में कई बड़े नाम चर्चा में रहे। बीजेपी की आर. श्रीलेखा, पूर्व डीजीपी, ने शास्तामंगलम वार्ड से 600 से ज्यादा वोटों से जीत दर्ज की। कांग्रेस के पूर्व विधायक के.एस. सबरीनाथन ने कौडियार वार्ड से 74 वोटों के मामूली अंतर से जीत हासिल की। LDF के कई वरिष्ठ नेता, जिनके नाम मेयर पद के लिए चर्चा में थे, अपने-अपने वार्डों से विजयी रहे।
सीपीआई नेता और पूर्व उपमहापौर राखी रविकुमार ने लगातार चौथी जीत दर्ज की, जबकि कांग्रेस (एस) नेता पालयम राजन का दशकों पुराना राजनीतिक सफर नंथनकोड वार्ड में हार के साथ थम गया। बीजेपी नेता वी.वी. राजेश ने कोडुंगनूर से आरामदायक जीत दर्ज की।
आरोपों के बावजूद BJP की पकड़
चुनाव से पहले बीजेपी पर भ्रष्टाचार और कुछ विवादों के आरोप लगे थे, जिनमें पार्टी से जुड़े लोगों की मौत के मामले भी शामिल थे। इसके बावजूद इन मुद्दों का पार्टी के वोट शेयर पर खास असर नहीं दिखा। जिन वार्डों में पार्टी पहले जीत चुकी थी, वहां उसने अपनी बढ़त और मजबूत की।
आगे की राजनीति पर असर
तिरुवनंतपुरम नगर निगम में सत्ता परिवर्तन को आगामी विधानसभा चुनावों से जोड़कर देखा जा रहा है। भले ही LDF ने जिले की अन्य नगरपालिकाओं और जिला पंचायत में जीत दर्ज की हो, लेकिन निगम में हार और शहरी वोटों का खिसकना नेतृत्व के लिए चिंता का विषय माना जा रहा है।
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि केरल के लोग अब “विकसित केरल” की सोच को स्वीकार कर रहे हैं। उनके मुताबिक यह परिणाम LDF सरकार और नगर निगम प्रशासन की विफलताओं का प्रतिबिंब है।
राजनीतिक महत्व
यह नतीजा न सिर्फ तिरुवनंतपुरम बल्कि पूरे केरल की शहरी राजनीति के लिए संकेतक माना जा रहा है। चार दशक बाद वामपंथी किले का ढहना और एनडीए की बढ़त राज्य की राजनीतिक दिशा में बड़े बदलाव की ओर इशारा करती है, जिसका असर आने वाले चुनावों में साफ दिख सकता है।
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