New Delhi | World War Update
हॉर्मुज़ स्ट्रेट से लेकर तेल अवीव, साइप्रस और भारतीय जहाज़ों तक—युद्ध का दायरा खतरनाक रूप से बढ़ा
Iran-Israel War LIVE: मध्य पूर्व में जारी Iran-Israel युद्ध शनिवार (21 मार्च 2026) को और तेज होता दिखा। युद्ध अपने चौथे हफ्ते में प्रवेश कर चुका है, और अब इसके भू-राजनीतिक असर दुनिया भर में महसूस किए जा रहे हैं—तेल कीमतों की उथल-पुथल, खाद्य संकट की आशंका और समुद्री व्यापार में भारी जोखिम। युद्ध की बढ़ती आग के बीच भारत वैश्विक कूटनीति का सबसे सक्रिय खिलाड़ी बनकर उभरा है। इसी संदर्भ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन के बीच अहम बातचीत हुई, जिसमें ईरानी राष्ट्रपति ने BRICS से “स्वतंत्र भूमिका निभाकर U.S.-Israel हमलों को रोकने” की भारी-भरकम मांग रखी।
इस बीच, अमेरिकी सेना ने दावा किया है कि ईरान की “Strait of Hormuz को धमकाने की क्षमता” उनके बमबारी अभियान से कमजोर हो गई है। दूसरी ओर, इज़राइल ने चेतावनी दी है कि रविवार (22 मार्च) से हमले “काफी ज्यादा तेज” होंगे। युद्ध की भड़कती आग अब हिंद महासागर, साइप्रस, खाड़ी देशों और दक्षिण एशिया तक असर दिखा रही है।
PM Modi–Iran President Call: BRICS को ‘स्वतंत्र भूमिका’ निभाने की अपील
शनिवार को PM मोदी के साथ फोन कॉल में ईरानी राष्ट्रपति पेज़ेश्कियन ने साफ कहा कि:
“BRICS को U.S. और Israel की आक्रामकता रोकने में स्वतंत्र भूमिका निभानी चाहिए।”
भारत फिलहाल BRICS का अध्यक्ष है, और ईरान चाहता है कि भारत अपनी स्थिति का उपयोग कर युद्ध रोकने में निर्णायक भूमिका निभाए। ईरान ने यह भी कहा कि युद्ध को रोकने की पहली शर्त है—“अमेरिका और इज़राइल द्वारा आक्रामकता का तुरंत अंत”。
कॉल के दौरान PM मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर लगातार क्षेत्रीय नेताओं से संवाद में हैं। भारत ने यह भी स्वीकार किया है कि 22 भारतीय-फ्लैग्ड जहाज़ और 611 भारतीय नाविक वर्तमान में पश्चिमी फ़ारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं, जिससे स्थिति भारत के लिए बेहद संवेदनशील हो गई है।
U.S. Military: ईरान की क्षमताएं ‘degraded’, 8,000 टारगेट्स तबाह
अमेरिका ने दावा किया है कि इस हफ्ते की बमबारी में ईरान का वह भूमिगत मिसाइल-भंडारण केंद्र नष्ट किया गया है जो हॉर्मुज़ स्ट्रेट को खतरे में डालने के लिए उपयोग किया जाता था।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के एडमिरल ब्रैड कूपर ने कहा—
“Operation Epic Fury में अब तक 8,000 से अधिक ईरानी सैन्य टारगेट और 130 से अधिक नौसैनिक जहाज़ नष्ट किए गए हैं।”
इसे क्षेत्र में ईरान की “समुद्री आक्रामक क्षमता को कमजोर करने” की कोशिश बताया जा रहा है।
Israel की चेतावनी: रविवार से हमले ‘काफी ज्यादा तेज’ होंगे
इज़राइल के रक्षा मंत्री इज़राइल कैट्ज़ ने कहा है कि अगले सप्ताह से हमले “significantly increase” होंगे।
यह बयान उस समय आया जब ईरान की ओर से दागे गए मिसाइल के टुकड़े तेल अवीव के पास एक खाली किंडरगार्टन में गिरे।
इसके तुरंत बाद U.S.–Israel ने ईरान के नतांज़ परमाणु केंद्र पर नई स्ट्राइक की। ईरान ने स्वीकार किया है कि हमला हुआ, लेकिन रेडियोधर्मी रिसाव नहीं हुआ।
ईरान ने UK–US बेस Diego Garcia पर किया हमला
युद्ध का दायरा अब मध्य पूर्व से बहुत आगे निकल गया है। ईरान ने हिंद महासागर में स्थित संयुक्त UK-US बेस Diego Garcia पर मिसाइल हमला किया है। यह बेस ईरान से 2,500 मील (4,000 किमी) दूर है।
विशेषज्ञों के अनुसार:
- या तो ईरान के पास अब लंबी दूरी की नई मिसाइल क्षमता है
- या फिर उसने अपने स्पेस प्रोग्राम को “इम्प्रोवाइज़्ड लॉन्च सिस्टम” की तरह इस्तेमाल किया
दोनों ही संभावनाएं क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए बेहद चिंताजनक मानी जा रही हैं।
U.S.–Israel Strikes in Iran: पोर्ट, टर्मिनल और शिपिंग सुविधाएं निशाने पर
ईरान के बुषहर पोर्ट के पैसेंजर टर्मिनल और खार्ग द्वीप पर खड़ी एक खाली यात्री जहाज़ को U.S.–Israel जेट्स ने निशाना बनाया है।
हालांकि कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ, लेकिन यह हमला ईरान के ऊर्जा और व्यापार नेटवर्क को कमजोर करने के उद्देश्य से किया गया माना जा रहा है।
Cyprus: UK ने कहा—हमारे बेस युद्ध में उपयोग नहीं होंगे
Cyprus सरकार के अनुसार, UK PM कियर स्टार्मर ने साफ किया है—
“साइप्रस में ब्रिटिश बेस किसी भी offensive operation के लिए इस्तेमाल नहीं किए जाएंगे।”
हाल ही में ईरान-निर्मित Shahed ड्रोन ने ब्रिटेन के अक़रोटीरी एयरबेस में मामूली नुकसान पहुंचाया था। इसके बाद यह बयान और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।
Bangladesh: ऊर्जा संकट गहरा, $2 Billion Loan की कवायद
मध्य पूर्व युद्ध का असर दक्षिण एशिया में भी महसूस हो रहा है।
ईंधन कीमतों में तेज़ उछाल के चलते बांग्लादेश गहरे ऊर्जा संकट में है और सरकार लगभग $2 बिलियन के ऋण के लिए अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से संपर्क में है।
सरकार ने—
- उर्वरक फैक्ट्रियों को बंद किया,
- ईंधन खपत नियंत्रण के कई कदम उठाए
सलाहकार राशेद अल तितुमिर के अनुसार, सरकार ने स्थायी ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए three-pronged strategy अपनाई है।
Global Impact: Food–Fuel Prices और Shipping Routes पर बड़ा असर
ईरान-इज़राइल युद्ध अब सिर्फ सैन्य संघर्ष नहीं, बल्कि एक वैश्विक आर्थिक संकट में बदलता दिख रहा है—
- तेल कीमतें लगातार उछाल पर
- शिपिंग कॉरिडोर में जोखिम बढ़ा
- खाद्य आपूर्ति को लेकर चिंताएं
- दक्षिण एशियाई देशों पर भारी दबाव
और भारत पर इसका सीधा असर है, क्योंकि
- हजारों भारतीय खाड़ी क्षेत्र में काम करते हैं
- कई जहाज़ उसी मार्ग से गुजरते हैं
- खाद्य-ईंधन की कीमतें बढ़ने का खतरा है
इसी वजह से भारत लगातार सभी पक्षों से शांत-सुलह की मांग कर रहा है।
India’s Role: कूटनीतिक दबाव बढ़ाएगा BRICS?
ईरान की PM मोदी से अपील के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या BRICS—
- युद्धविराम की मध्यस्थता कर सकता है?
- U.S., Israel, Iran के बीच एक सेफ डायलॉग चैनल बना सकता है?
- संकट को वैश्विक मुद्दा बनाकर ईंधन-खाद्य संकट कम कर सकता है?
भारत की स्थिति बेहद संवेदनशील है—
एक ओर ऊर्जा सुरक्षा, दूसरी ओर खाड़ी देशों में लाखों भारतीय।
ऐसे में भारत संतुलित और सक्रिय कूटनीति अपनाने की कोशिश कर रहा है।
Impact: चौथे सप्ताह में और खतरनाक हुआ युद्ध
ईरान-इज़राइल युद्ध का दायरा—
- मध्य पूर्व
- हिंद महासागर
- यूरोप के किनारे
- दक्षिण एशिया
तक फैल चुका है।
कूटनीतिक स्तर पर तनाव बढ़ रहा है, और वैश्विक अर्थव्यवस्था इसकी कीमत चुका रही है।
भारत के लिए आने वाले कुछ सप्ताह बेहद निर्णायक होंगे—
जहाज़ों की सुरक्षा, ऊर्जा कीमतें और अंतरराष्ट्रीय व्यापार इसकी शीर्ष प्राथमिकता में रहेगा।
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