नई दिल्ली | Global Economy / Energy
India News: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और ईरान से जुड़े युद्ध के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति पर दबाव बढ़ गया है। इसी बीच एक अहम संकेत सामने आया है कि रूस का कच्चा तेल (Urals crude) फिर से भारत की ओर मुड़ने लगा है।
शिप-ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, पहले पूर्वी एशिया जाने वाले दो बड़े ऑयल टैंकर अचानक अपना रास्ता बदलकर भारत की ओर आ गए हैं। इन टैंकरों में कुल मिलाकर लगभग 14 लाख बैरल रूसी कच्चा तेल लदा हुआ है।
ऊर्जा बाजार के विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान से जुड़ा युद्ध और होरमुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में बढ़ते खतरे के कारण तेल आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। ऐसे में भारतीय रिफाइनरियां फिर से रूसी तेल खरीदने की ओर झुक सकती हैं।
दो बड़े टैंकर भारत की ओर मुड़े
शिप ट्रैकिंग कंपनियों Kpler और Vortexa के डेटा के अनुसार, दो प्रमुख टैंकर — Odune और Matari — अपना मार्ग बदलकर भारत की ओर बढ़ रहे हैं।
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Odune नाम का Suezmax टैंकर करीब 7.3 लाख बैरल Urals crude लेकर भारत पहुंच चुका है।
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यह टैंकर ओडिशा के पारादीप पोर्ट पर बुधवार को पहुंचा। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि तेल उतारा गया है या नहीं।
दूसरा टैंकर Matari है, जो 7 लाख बैरल से अधिक कच्चा तेल लेकर भारत की ओर आ रहा है।
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इसके गुजरात के वाडीनार पोर्ट पहुंचने की संभावना है।
दोनों टैंकर पहले पूर्वी एशिया को अपनी मंजिल बता रहे थे, लेकिन समुद्र में ही उन्होंने दिशा बदल दी।
भारत में फिर बढ़ सकती है रूसी तेल की खरीद

रिपोर्ट्स के अनुसार, हाल के महीनों में भारतीय रिफाइनरियों ने रूसी तेल की खरीद कुछ कम कर दी थी।
इसके पीछे एक वजह यह भी थी कि अमेरिका भारत पर दबाव बना रहा था कि वह रूस से तेल खरीद कम करे, क्योंकि यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों ने रूस पर प्रतिबंध लगाए थे।
लेकिन अब मध्य पूर्व में ईरान से जुड़ा संघर्ष बढ़ने और तेल आपूर्ति के खतरे के कारण भारत जैसे बड़े खरीदार फिर से रूसी तेल की ओर रुख कर सकते हैं।
होरमुज जलडमरूमध्य पर संकट
ऊर्जा बाजार के लिए सबसे बड़ी चिंता Strait of Hormuz को लेकर है।
यह जलमार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है, जहां से दुनिया के तेल का बड़ा हिस्सा गुजरता है।
ईरान से जुड़ा युद्ध और क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों के कारण
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जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है
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तेल आपूर्ति बाधित होने का खतरा बढ़ गया है
इसी वजह से कई देश वैकल्पिक स्रोतों से तेल खरीदने की रणनीति बना रहे हैं।
तीसरा टैंकर भी भारत की ओर मुड़ा
Bloomberg की रिपोर्ट के अनुसार एक और टैंकर Indri भी अपना रास्ता बदल चुका है।
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यह टैंकर भी करीब 7.3 लाख बैरल Urals crude लेकर चल रहा है।
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पहले इसका गंतव्य सिंगापुर बताया गया था।
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लेकिन अरब सागर में अचानक दिशा बदलकर यह भारत की ओर बढ़ गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मध्य पूर्व में तनाव जारी रहता है तो और भी रूसी तेल के जहाज भारत की ओर आ सकते हैं।
सस्ते तेल की वजह से पहले भी लोकप्रिय था Urals crude
यूक्रेन युद्ध के बाद जब पश्चिमी देशों ने रूस पर प्रतिबंध लगाए, तब रूस ने अपना तेल छूट (Discount) देकर बेचना शुरू किया।
इसका फायदा भारत और चीन जैसे देशों को मिला।
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भारत ने बड़ी मात्रा में रूसी तेल खरीदा
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इससे देश को कम कीमत पर ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिली
लेकिन 2026 की शुरुआत में खरीद कुछ धीमी हो गई थी।
प्रतिबंधित जहाजों पर भी सवाल
इस पूरे घटनाक्रम में एक दिलचस्प बात यह भी है कि Odune, Matari और Indri तीनों जहाजों पर यूरोपीय संघ और ब्रिटेन ने पिछले साल प्रतिबंध लगाए थे।
इन जहाजों के प्रबंधन और मालिकाना कंपनियां मुख्य रूप से
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अजरबैजान
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हांगकांग
से जुड़ी बताई जा रही हैं।
हालांकि इन कंपनियों से संपर्क करने की कोशिशों पर फिलहाल कोई जवाब नहीं मिला है।
वैश्विक तेल बाजार में तेज बदलाव
ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार यह घटनाक्रम दिखाता है कि वैश्विक तेल व्यापार कितनी तेजी से बदल सकता है।
मध्य पूर्व में युद्ध, समुद्री मार्गों पर खतरा और भू-राजनीतिक तनाव के कारण
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तेल की सप्लाई रूट बदल रहे हैं
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खरीदार नई रणनीति बना रहे हैं
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और बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है
अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो भारत-रूस तेल व्यापार फिर से तेज हो सकता है।
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