DUSU Election 2026: दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) चुनाव 2026 के नतीजे आज यानी 19 सितंबर को घोषित किए जाएंगे। वोटों की गिनती सुबह 8 बजे शुरू होगी। शुक्रवार को हुए मतदान में 40.46 प्रतिशत वोटिंग दर्ज की गई। करीब 1.51 लाख छात्र इस चुनाव में मतदान के लिए पात्र थे।
अध्यक्ष पद पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) की ओर से यश डबास और नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) की ओर से विजय शंकर मीणा प्रमुख उम्मीदवारों में शामिल हैं। उपाध्यक्ष पद के लिए ABVP ने ईशू मौर्या और NSUI ने वीर चतरथ को उम्मीदवार बनाया है। अध्यक्ष पद पर AISA-SFI गठबंधन की अनन्या रतूड़ी समेत अन्य उम्मीदवार भी मैदान में हैं।
मतदान दिल्ली विश्वविद्यालय के 52 कॉलेजों में हुआ। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 1,51,519 पात्र मतदाताओं में से 61,312 छात्रों ने मतदान किया। मतदान सुबह और शाम की दो पालियों में कराया गया था। सभी 52 मतदान केंद्रों से ईवीएम को मतगणना स्थल तक पहुंचाया गया है।
डूसू चुनाव को देश के बड़े छात्र चुनावों में गिना जाता है। दिल्ली विश्वविद्यालय में नॉर्थ कैंपस और साउथ कैंपस सहित कुल 91 कॉलेज हैं, लेकिन डूसू के केंद्रीय चुनाव में सभी कॉलेज सीधे मतदान नहीं करते। वर्तमान चुनाव में 52 कॉलेज और फैकल्टी मतदान प्रक्रिया में शामिल रहे। सेंट स्टीफंस कॉलेज, लेडी श्रीराम कॉलेज और जीसस एंड मैरी कॉलेज जैसे कुछ कॉलेज डूसू के सीधे चुनावी दायरे में नहीं हैं।
चुनाव परिणाम से पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने विजय जुलूस पर रोक लगा दी है। अदालत के निर्देश के अनुसार परिणाम घोषित होने के बाद उम्मीदवार, उनके समर्थक, छात्र या अन्य लोग सड़कों, कॉलेजों या हॉस्टलों में विजय जुलूस नहीं निकाल सकेंगे। आदेश का उल्लंघन होने पर आपराधिक और प्रशासनिक कार्रवाई के साथ अवमानना की कार्यवाही भी हो सकती है।
हाईकोर्ट ने डूसू चुनाव प्रचार के दौरान कथित नियम उल्लंघनों को लेकर 140 उम्मीदवारों को नोटिस भी जारी किए हैं। अदालत ने चुनाव में लागू लिंगदोह समिति की सिफारिशों, मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट और पूर्व न्यायिक निर्देशों के पालन पर जोर दिया है।
अदालत का यह निर्देश ऐसे समय आया है जब चुनाव प्रचार के दौरान वाहनों के काफिले और अन्य गतिविधियों को लेकर भी सवाल उठे थे। दिल्ली हाईकोर्ट ने पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन को चुनाव नियमों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
डूसू चुनाव का इतिहास भी दिल्ली विश्वविद्यालय से निकलकर राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय हुए कई नेताओं से जुड़ा रहा है। अरुण जेटली 1974 में डूसू अध्यक्ष रहे और बाद में केंद्र में वित्त एवं रक्षा मंत्री बने। विजय गोयल 1977 में डूसू अध्यक्ष रहे और आगे चलकर केंद्रीय राज्य मंत्री बने। अजय माकन 1985 में डूसू अध्यक्ष रहे और बाद में केंद्र सरकार में मंत्री रहे। अलका लांबा 1995 में डूसू अध्यक्ष रहीं और आगे दिल्ली विधानसभा की सदस्य तथा महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष बनीं।
दिल्ली विश्वविद्यालय के आधिकारिक चुनाव नियमों के अनुसार डूसू चुनाव में प्रचार के लिए निर्धारित ‘वॉल ऑफ डेमोक्रेसी’ का उपयोग किया जाता है। विश्वविद्यालय की चुनाव प्रक्रिया में सार्वजनिक रैलियों, पोस्टर चिपकाने और वाहन परेड पर प्रतिबंध सहित कई नियम लागू हैं।
अब सभी की नजर मतगणना पर है। सुबह 8 बजे शुरू होने वाली मतगणना के बाद चार केंद्रीय पदों—अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव—के परिणाम सामने आएंगे। चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद हाईकोर्ट के निर्देश के कारण कैंपस और सड़कों पर विजय जुलूस नहीं निकाला जा सकेगा।
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