रायपुर। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के संविदा कर्मचारियों की हड़ताल को एक महीना पूरा हो गया है। 18 अगस्त से जारी यह आंदोलन अब राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को गंभीर संकट में डाल चुका है। सरकार द्वारा 16 सितंबर तक लौटने का अल्टीमेटम देने के बाद भी कर्मचारी झुके नहीं। इसके बाद कार्रवाई तेज करते हुए सूरजपुर जिले में 594, बलौदाबाजार में 160 और कोरबा में 21 कर्मियों को बर्खास्त कर दिया गया। कुल मिलाकर अब तक 800 से ज्यादा कर्मचारी अपनी नौकरी गंवा चुके हैं।
देर रात स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया ने सभी जिलों के CMHO को निर्देश दिए कि जो कर्मचारी ड्यूटी पर नहीं लौटे हैं, उन्हें व्यक्तिगत आदेश जारी कर तत्काल सेवा समाप्त करें। साथ ही खाली पदों पर नई भर्ती प्रक्रिया शुरू करने को कहा गया है।
10 सूत्रीय मांगों पर अड़े कर्मचारी
NHM कर्मचारी संगठन की प्रमुख मांगों में शामिल हैं:
- संविलियन और स्थायीकरण
- पब्लिक हेल्थ कैडर की स्थापना
- लंबित 27% वेतन वृद्धि (सरकार केवल 5% पर सहमत)
- ग्रेड पे निर्धारण और ट्रांसफर पॉलिसी
- 10 लाख तक कैशलेस मेडिकल इंश्योरेंस
- CR सिस्टम में पारदर्शिता, मेडिकल लीव और आरक्षण से जुड़ी मांगें
कर्मचारियों का कहना है कि बिना लिखित आदेश के वे आंदोलन समाप्त नहीं करेंगे।
जेल भरो आंदोलन और रचनात्मक विरोध
सरकार की सख्ती के बावजूद विरोध तेज हो गया है। गुरुवार को राजधानी रायपुर में जेल भरो आंदोलन की घोषणा की गई है। तूता धरना स्थल पर रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर संभाग के करीब 10 हजार और प्रदेशभर से 16 हजार कर्मचारी जुटने की संभावना है।
कर्मचारियों ने खून से पत्र लिखने, पैरोडी गानों और डांस जैसे अनोखे तरीकों से विरोध जताया। धमतरी में छत्तीसगढ़ी गीत पर नृत्य और मुखौटे पहनकर व्यंग्यात्मक प्रदर्शन भी हुए।
स्वास्थ्य सेवाओं पर संकट
लगातार जारी हड़ताल से टीकाकरण अभियान, मातृत्व व शिशु स्वास्थ्य सेवाएं बाधित हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के उप स्वास्थ्य केंद्र से लेकर जिला अस्पतालों तक मरीजों को उपचार के लिए भटकना पड़ रहा है।
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