CGPSC Scam: ED की बड़ी कार्रवाई, सोनवानी के करीबी से 8 लाख नकद बरामद

CGPSC Scam: छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) भर्ती घोटाले की जांच में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ा कदम उठाते हुए प्रदेश में एक साथ कई ठिकानों पर छापेमारी की है। रायपुर और भिलाई समेत कुल नौ स्थानों पर हुई इस कार्रवाई में एजेंसी ने महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल साक्ष्य और लाखों रुपये नकद बरामद किए हैं। इस कार्रवाई के बाद भर्ती घोटाले की जांच और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं। नौ ठिकानों पर एक साथ ED की दबिश बुधवार को ईडी की अलग-अलग टीमों ने छत्तीसगढ़ के विभिन्न स्थानों पर समन्वित कार्रवाई की। जांच के दायरे में CGPSC के पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी से जुड़े लोगों और पूर्व अधिकारियों के आवास शामिल रहे। दिनभर चली तलाशी के दौरान एजेंसी ने कई महत्वपूर्ण रिकॉर्ड अपने कब्जे में लिए। सूत्रों के अनुसार, पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी के करीबी माने जाने वाले उत्कर्ष चंद्राकर के ठिकाने से करीब 8 लाख रुपये नकद बरामद किए गए हैं। इसके अलावा कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और दस्तावेज भी जब्त किए गए हैं, जिनकी जांच की जाएगी। पूर्व अधिकारियों पर भी कार्रवाई ईडी की कार्रवाई केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रही। जांच एजेंसी ने पूर्व चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी, पूर्व सचिव जीवन किशोर ध्रुव, पूर्व आईएएस अमृत खलखो, पूर्व परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक और सहायक नियंत्रक गनवीर से जुड़े ठिकानों पर भी दबिश दी। सुबह शुरू हुई कार्रवाई देर रात तक जारी रही। एजेंसी के अधिकारियों ने दस्तावेजों, कंप्यूटर डेटा और अन्य रिकॉर्ड की गहन जांच की। माना जा रहा है कि पिछले कई महीनों से जुटाए गए इनपुट और सबूतों के आधार पर यह कार्रवाई की गई है। 2019 से 2022 तक की परीक्षाएं जांच के दायरे में ईडी ने संकेत दिए हैं कि टामन सिंह सोनवानी के कार्यकाल के दौरान वर्ष 2019 से 2022 के बीच आयोजित हुई सभी प्रमुख भर्ती परीक्षाएं अब जांच के दायरे में हैं। एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि चयन प्रक्रिया में किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता, पक्षपात या प्रभाव का इस्तेमाल तो नहीं हुआ। CGPSC भर्ती घोटाले को लेकर पहले से ही राज्य में राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा जारी है। अब ईडी की एंट्री के बाद मामले को नया मोड़ मिल गया है। डिजिटल साक्ष्यों की होगी फोरेंसिक जांच छापेमारी के दौरान जब्त किए गए लैपटॉप, मोबाइल फोन, हार्ड डिस्क और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा जाएगा। एजेंसी को उम्मीद है कि डिजिटल डेटा से भर्ती प्रक्रिया से जुड़े कई अहम तथ्य सामने आ सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि फोरेंसिक विश्लेषण के जरिए उम्मीदवारों के चयन, परीक्षा प्रक्रिया और कथित लेनदेन से जुड़े महत्वपूर्ण सुराग मिल सकते हैं। यदि जांच में ठोस साक्ष्य सामने आते हैं तो आने वाले दिनों में कई और लोगों से पूछताछ या गिरफ्तारी की संभावना भी बन सकती है। भर्ती प्रक्रिया पर उठे थे सवाल CGPSC भर्ती परीक्षाओं को लेकर पिछले कुछ वर्षों से लगातार विवाद सामने आते रहे हैं। कई अभ्यर्थियों और राजनीतिक दलों ने चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए थे। आरोप लगाए गए थे कि प्रभावशाली लोगों के रिश्तेदारों और परिचितों को अनुचित लाभ मिला। इन्हीं शिकायतों और जांच के आधार पर मामला आगे बढ़ा और अब प्रवर्तन निदेशालय भी इसकी जांच कर रहा है। ईडी यह पता लगाने में जुटी है कि कथित अनियमितताओं के पीछे मनी लॉन्ड्रिंग या अवैध आर्थिक लेनदेन का कोई नेटवर्क तो सक्रिय नहीं था। आगे और बढ़ सकती है जांच ईडी की ताजा कार्रवाई को CGPSC भर्ती घोटाले की जांच में एक महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है। जब्त दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों की रिपोर्ट आने के बाद जांच का दायरा और बढ़ सकता है। फिलहाल एजेंसी सभी तथ्यों का विश्लेषण कर रही है और आगे की कार्रवाई की तैयारी में जुटी है। छत्तीसगढ़ की हर अपडेट के लिए हमारे WhatsApp चैनल को फॉलो करें- https://whatsapp.com/channel/0029VbBj50DATRSgaSxCmo2v