CG Scam: रायपुर में धान घोटाले पर सियासी संग्राम तेज हो गया है। कांग्रेस ने BJP की साय सरकार पर आरोप लगाया है कि खराब और बर्बाद हुए धान को ‘चूहों’ के नाम पर बचाने की कोशिश की जा रही है। कांग्रेस नेताओं ने बुधवार को राजधानी में बड़ा प्रदर्शन कर खाद्य मंत्री को प्रतीकात्मक पिंजरा देने की कोशिश की, यह संकेत देने के लिए कि ‘20 करोड़ का धान खाने वाला चूहा आगे 100 करोड़ का नुकसान न करे।’ कांग्रेस ने इसे किसानों के साथ अन्याय और प्रशासनिक लापरवाही बताया है।
धान घोटाला या प्रशासनिक लापरवाही? सवालों से घिरी सरकार
कांग्रेस का आरोप है कि कवर्धा से महासमुंद तक कई संग्रहण केंद्रों में लाखों क्विंटल धान खराब हुआ, लेकिन सरकार इसे ‘धान को चूहों ने खा लिया’ कहकर छुपाने की कोशिश कर रही है। पार्टी नेताओं के अनुसार यदि धान खराब था तो फर्जी एंट्री और उठाव रिकॉर्ड क्यों बनाए गए? अगर चूहे जिम्मेदार हैं तो बड़े अफसर और विभागीय अधिकारी जिम्मेदारी से कैसे मुक्त हो सकते हैं?
कांग्रेस के पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने कहा,
“हम मंत्री को चूहा पकड़ने वाला पिंजरा देने जा रहे थे क्योंकि जो चूहा आज 20 करोड़ का धान खा रहा है, वह कहीं आने वाले समय में 100 करोड़ का धान न खा ले।”
कांग्रेस बोली—सरकार अपनी नाकामी चूहों पर डाल रही
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि यह मामला सिर्फ धान खराब होने का नहीं, बल्कि बड़ा घोटाला है। उनका आरोप है कि समय पर धान का उठाव नहीं हुआ, जिससे बोरों के खराब होने व धान की गुणवत्ता गिरने का मामला सामने आया। इसके बावजूद सरकार ने जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई के बजाय “चूहों” को दोषी बताया।
कांग्रेस का कहना है कि किसानों की मेहनत से खरीदा गया धान सड़कों या गोदामों में खराब हुआ, यह भी किसानों का अपमान है। पार्टी नेताओं ने इसे “Bad Governance + Corruption Mix” बताया है।
प्रतीकात्मक विरोध: पिंजरा पुलिस को सौंपा
जब कांग्रेस नेता खाद्य मंत्री को पिंजरा सौंपने निकले तो आजाद चौक के पास पुलिस ने उन्हें रोक दिया। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार “सच्चाई से भाग रही है” और पुलिस को ढाल बना रही है। इसके बाद प्रतीकात्मक रूप से पिंजरा पुलिस को सौंप दिया गया।
कांग्रेस ने कहा कि यदि इस मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो पूरे प्रदेश में आंदोलन होगा।
सरकार क्या कहती है?
सरकारी सूत्रों के अनुसार विभागीय टीम इस मामले की जांच कर रही है और धान खराब होने के मामलों को टेक्निकल और वाइल्ड डैमेज कैटेगरी में रखकर आकलन हो रहा है। हालांकि, चूहों द्वारा धान को नुकसान पहुंचाने की बात को लेकर सरकार ने अभी तक सार्वजनिक रूप से विस्तृत स्पष्टीकरण नहीं दिया है।
BJP नेताओं का तर्क है कि कांग्रेस मुद्दों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रही है और सरकार किसानों को समय पर भुगतान व उठाव सुनिश्चित कराने की प्रक्रिया में लगी है। फिलहाल सरकार आधिकारिक जांच रिपोर्ट का इंतजार करने की बात कह रही है।
किसानों के लिए बड़ा सवाल
मामले ने किसानों के बीच चिंता बढ़ाई है क्योंकि धान उठाव, भंडारण और भुगतान सीधा उनके आर्थिक चक्र को प्रभावित करता है। यदि धान खराब होता है या रिकॉर्ड में फेरबदल होता है, तो इसका भार अक्सर किसान समुदाय को उठाना पड़ता है।
कई किसानों का कहना है कि यह विवाद केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि सिस्टम की क्षमता और पारदर्शिता पर भी सवाल खड़ा करता है।
छत्तीसगढ़ में धान राजनीति, प्रशासन और किसानों के जीवन का केंद्रीय मुद्दा रहा है। ऐसे में धान के खराब होने या गायब होने का मामला केवल सरकारी रिकॉर्ड का नुकसान नहीं बल्कि किसानों के विश्वास से जुड़ा सवाल भी है। आने वाले दिनों में यह चुनावी मुद्दा भी बन सकता है क्योंकि दोनों पार्टियाँ इसे “भ्रष्टाचार बनाम प्रोपेगेंडा” की नजर से पेश कर रही हैं।
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