Thursday, February 5, 2026
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CG News: धान खरीदी प्रक्रिया हुई और आसान: तूहर टोकन ऐप अब 24×7, किसानों को दिन-रात मिलेगा टोकन

CG News: छत्तीसगढ़ में धान खरीदी व्यवस्था को किसान-हितैषी और सुगम बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा और राहत भरा फैसला लिया है। अब तूहर टोकन ऐप 24×7 उपलब्ध रहेगा। यानी धान बेचने के लिए टोकन काटने की समय-सीमा समाप्त कर दी गई है। किसान अब दिन हो या रात, अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी समय टोकन बुक कर सकेंगे। सरकार के इस कदम से धान खरीदी केंद्रों पर भीड़, तकनीकी दबाव और किसानों की परेशानी कम होने की उम्मीद है।


इंट्रो: टोकन के लिए अब न समय की पाबंदी, न दबाव

अब तक किसानों को तय समय सीमा में ही टोकन काटना पड़ता था, जिससे खासतौर पर ग्रामीण इलाकों में नेटवर्क, भीड़ और तकनीकी दिक्कतें सामने आती थीं। इसे देखते हुए राज्य सरकार ने तूहर टोकन ऐप को चौबीसों घंटे चालू करने का फैसला लिया है। इससे धान विक्रय की पूरी प्रक्रिया अधिक लचीली और किसान-अनुकूल बन गई है।


मुख्य तथ्य + नई व्यवस्था क्या है?

राज्य सरकार के फैसले के अनुसार:

  • तूहर टोकन ऐप अब 24×7 ओपन रहेगा

  • टोकन काटने के लिए किसी तय समय की बाध्यता नहीं

  • किसान दिन-रात किसी भी समय टोकन बुक कर सकेंगे

  • टोकन 13 जनवरी तक आगामी 20 दिनों के लिए लिए जा सकेंगे

इस व्यवस्था से किसानों को अपनी फसल बेचने की बेहतर योजना बनाने का मौका मिलेगा। अब टोकन के लिए आखिरी समय में लॉग-इन करने की मजबूरी नहीं रहेगी, जिससे सर्वर स्लो और ऐप क्रैश जैसी समस्याएं भी कम होंगी।


समस्या से राहत: भीड़ और तकनीकी दबाव होगा कम

धान खरीदी सीजन के दौरान अक्सर देखने में आता है कि:

  • तय समय पर बड़ी संख्या में किसान ऐप पर लॉग-इन करते हैं

  • नेटवर्क स्लो हो जाता है

  • कई बार टोकन नहीं मिल पाता

  • सहकारी समितियों में अनावश्यक भीड़ लग जाती है

अब 24×7 सुविधा मिलने से किसान अलग-अलग समय पर टोकन लेंगे, जिससे सिस्टम पर दबाव कम होगा और खरीदी केंद्रों पर भीड़ नियंत्रित रहेगी। इससे न केवल किसानों को राहत मिलेगी, बल्कि कर्मचारियों के लिए भी व्यवस्था संभालना आसान होगा।


लघु किसानों को बड़ी राहत: 31 जनवरी तक टोकन सुविधा

राज्य सरकार ने 2 एकड़ और 2 एकड़ से कम रकबा वाले किसानों के लिए विशेष राहत की घोषणा की है। ऐसे किसान अब:

  • 31 जनवरी तक तूहर टोकन ऐप से टोकन ले सकेंगे

  • उन्हें अतिरिक्त समय मिलेगा

  • छोटे किसानों को आखिरी दिनों की भागदौड़ से राहत मिलेगी

यह निर्णय मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निर्देश पर लिया गया है। सरकार का मानना है कि छोटे किसानों को अक्सर संसाधनों और समय की अधिक दिक्कत होती है, इसलिए उन्हें अतिरिक्त सुविधा देना जरूरी है।


टोकन की सीमा तय रहेगी, नियम यथावत

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि:

  • टोकन प्रत्येक सहकारी समिति को आबंटित सीमा के भीतर ही जारी होंगे

  • टोकन की संख्या अनियंत्रित नहीं होगी

  • खरीदी की पारदर्शिता बनी रहेगी

किसानों से अपील की गई है कि वे अंतिम समय का इंतजार न करें और समय रहते तूहर टोकन ऐप के माध्यम से टोकन प्राप्त करें, ताकि किसी भी प्रकार की असुविधा से बचा जा सके।


पृष्ठभूमि: क्यों जरूरी था यह फैसला?

पिछले कुछ वर्षों में धान खरीदी के दौरान यह सामने आया कि:

  • ऑनलाइन टोकन सिस्टम उपयोगी तो है, लेकिन समय-सीमा किसानों के लिए समस्या बन रही थी

  • ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली और नेटवर्क की समस्या के कारण कई किसान तय समय पर टोकन नहीं ले पाते थे

  • इससे नाराजगी और अव्यवस्था की स्थिति बनती थी

इन सभी बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए सरकार ने यह फैसला लिया है, ताकि धान खरीदी प्रक्रिया सरल, पारदर्शी और तनाव-मुक्त हो सके।


मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का बयान

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस निर्णय को किसान-हित में अहम कदम बताया। उन्होंने कहा:

“किसानों की सुविधा और पारदर्शी व्यवस्था हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
तूहर टोकन ऐप को 24×7 खोलने और समय की बाध्यता समाप्त करने का निर्णय इसी सोच का परिणाम है।”

उन्होंने आगे कहा:

“2 एकड़ और 2 एकड़ से कम रकबा वाले किसानों के लिए टोकन अवधि बढ़ाना वास्तविक राहत देगा।
राज्य सरकार किसान हित में हर संभव कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध है।”


किसानों को क्या होगा सीधा फायदा?

इस नई व्यवस्था से किसानों को कई स्तर पर लाभ मिलेगा:

  • टोकन के लिए तनाव खत्म

  • अपनी सुविधा अनुसार समय चुनने की आज़ादी

  • खरीदी केंद्रों पर कम भीड़

  • छोटे किसानों को अतिरिक्त समय

  • धान विक्रय की बेहतर योजना

कुल मिलाकर, धान खरीदी का अनुभव अब पहले से ज्यादा सहज और भरोसेमंद बनने की उम्मीद है।


आगे क्या? (Impact Section)

आने वाले दिनों में इस फैसले के असर साफ दिखाई देंगे:

  • धान खरीदी प्रक्रिया और सुचारु होगी

  • शिकायतों की संख्या घट सकती है

  • डिजिटल सिस्टम पर किसानों का भरोसा बढ़ेगा

  • सरकार को खरीदी प्रबंधन में मदद मिलेगी

यदि यह व्यवस्था सफल रहती है, तो भविष्य में अन्य कृषि प्रक्रियाओं में भी इसी तरह की 24×7 डिजिटल सुविधाएं बढ़ाई जा सकती हैं।

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