Wednesday, March 25, 2026
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CG News: रायपुर में फर्जी ई-चालान APK से मोबाइल हैक, व्यापारी के खाते से 10 लाख की ऑनलाइन ठगी

CG News: राजधानी रायपुर में साइबर ठगों ने एक बार फिर तकनीक का दुरुपयोग कर बड़ी वारदात को अंजाम दिया है। फर्जी RTO E-CHALLAN.apk फाइल के जरिए एक व्यापारी का मोबाइल फोन हैक कर लिया गया और उसके बाद HDFC बैंक खाते से 10 लाख रुपये की ऑनलाइन ठगी कर ली गई। यह पूरा मामला गंज थाना क्षेत्र का है, जहां पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 318(4) के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। घटना ने शहर के व्यापारियों और आम नागरिकों के बीच डिजिटल सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता बढ़ा दी है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीड़ित व्यापारी की एक छोटी-सी डिजिटल लापरवाही ने साइबर अपराधियों को उसके बैंक खाते तक पहुंचने का रास्ता दे दिया। पुलिस और साइबर विशेषज्ञों का मानना है कि यह ठगी संगठित साइबर गिरोह द्वारा की गई है, जो सरकारी विभागों और ट्रांसपोर्ट कंपनियों के नाम का इस्तेमाल कर लोगों को झांसे में ले रहा है।

व्हाट्सएप पर आया फर्जी ई-चालान, यहीं से शुरू हुई ठगी

पुलिस के मुताबिक प्रार्थी पंकज पटेल (35 वर्ष), निवासी फाफाडीह रायपुर, स्टेशन रोड स्थित अरिहंत कॉम्प्लेक्स में पटेल स्विच गियर नामक दुकान का संचालन करते हैं। 18 दिसंबर 2025 को उनके व्हाट्सएप नंबर पर “RTO E-CHALLAN.apk” नाम की एक फाइल आई थी। यह फाइल “रमेश गति ट्रांसपोर्ट” के नाम से भेजी गई थी, जिससे व्यापारी को उस पर कोई संदेह नहीं हुआ।

19 दिसंबर को पंकज पटेल ने उस फाइल को खोल लिया। शुरुआती तौर पर मोबाइल में कोई खास गतिविधि नजर नहीं आई, लेकिन इसी दौरान फर्जी APK के जरिए मोबाइल में स्पायवेयर इंस्टॉल हो गया, जिसने फोन की पूरी एक्सेस साइबर ठगों को दे दी।

तीन दिन बाद खाते से उड़ गए 10 लाख

22 दिसंबर को दोपहर करीब 12 बजे व्यापारी के मोबाइल पर बैंक से मैसेज आया कि उनके HDFC बैंक खाते से IMPS के जरिए दो बार में 5-5 लाख रुपये, कुल 10 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए गए हैं। खाते से रकम निकलने की जानकारी मिलते ही पीड़ित के होश उड़ गए। उन्होंने तुरंत बैंक शाखा पहुंचकर अपना खाता ब्लॉक कराया, लेकिन तब तक पूरी रकम निकल चुकी थी।

बैंक अधिकारियों ने प्रारंभिक जांच में बताया कि ट्रांजेक्शन पूरी तरह वैध डिजिटल प्रक्रिया के जरिए किया गया है, जिससे यह साफ हो गया कि मोबाइल पूरी तरह हैक हो चुका था और ठगों को ओटीपी, पिन सहित संवेदनशील जानकारियां मिल चुकी थीं।

जिसके नाम से फाइल पता चला, वही भी ठगी का शिकार

घटना की गंभीरता तब और बढ़ गई, जब पंकज पटेल ने रमेश गति ट्रांसपोर्ट से संपर्क किया। बातचीत में सामने आया कि ट्रांसपोर्ट संचालक का मोबाइल भी पहले से हैक हो चुका है और उसके खाते से भी करीब 4 लाख रुपये की ठगी की गई है। ट्रांसपोर्ट संचालक ने बताया कि उसके व्हाट्सएप से यह फर्जी फाइल किसने और कैसे फॉरवर्ड की, इसकी जानकारी उसे भी नहीं है।

इस खुलासे के बाद पुलिस को शक है कि साइबर ठग पहले एक मोबाइल को हैक करते हैं और फिर उसी कॉन्टैक्ट लिस्ट के जरिए अन्य लोगों को फर्जी फाइल भेजकर जाल फैलाते हैं।

पुलिस और साइबर टीम जांच में जुटी

पीड़ित व्यापारी ने गंज थाना के साथ-साथ सायबर क्राइम पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस अब मोबाइल फोन, बैंक ट्रांजेक्शन डिटेल, आईपी एड्रेस, IMPS रूट और डिजिटल लॉग्स के आधार पर अज्ञात आरोपियों की तलाश कर रही है। साइबर एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस तरह के APK स्कैम में ठग अक्सर विदेशी सर्वर और वर्चुअल नंबरों का इस्तेमाल करते हैं, जिससे जांच चुनौतीपूर्ण हो जाती है।

गंज थाना पुलिस का कहना है कि मामले को गंभीरता से लिया गया है और जल्द ही पूरे साइबर नेटवर्क का खुलासा किया जाएगा।

APK स्कैम: नया साइबर हथियार

साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, APK फाइल के जरिए ठगी का यह तरीका बेहद खतरनाक है। जैसे ही यूजर फाइल इंस्टॉल करता है, मोबाइल की पूरी कंट्रोल ठगों के हाथ में चली जाती है। वे कॉल, मैसेज, ओटीपी, बैंक ऐप और यहां तक कि कैमरा व माइक्रोफोन तक एक्सेस कर लेते हैं। यही वजह है कि सरकारी विभाग कभी भी APK फाइल भेजकर कोई नोटिस या चालान जारी नहीं करते।

कैसे बचें ऐसे साइबर फ्रॉड से

  • WhatsApp या SMS पर आई किसी भी APK फाइल को बिल्कुल न खोलें, चाहे वह परिचित नंबर से ही क्यों न आई हो।

  • RTO, बैंक, बिजली बिल या ई-चालान के नाम से आई किसी भी लिंक या फाइल की आधिकारिक वेबसाइट से पुष्टि करें।

  • मोबाइल में Unknown Sources से ऐप इंस्टॉल करने की अनुमति बंद रखें।

  • फोन में सिक्योरिटी अपडेट और एंटीवायरस नियमित रूप से अपडेट रखें।

  • बैंक खाते से जुड़ी किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत बैंक और 1930 साइबर हेल्पलाइन पर सूचना दें।

  • ओटीपी, पिन, पासवर्ड या बैंक डिटेल किसी के साथ साझा न करें।

निष्कर्ष

रायपुर की यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि साइबर अपराधी अब आम लोगों की डिजिटल आदतों को निशाना बना रहे हैं। एक क्लिक की गलती लाखों की चपत में बदल सकती है। ऐसे में जरूरी है कि लोग सतर्क रहें और किसी भी अनजान डिजिटल फाइल या लिंक से दूरी बनाए रखें, ताकि मेहनत की कमाई सुरक्षित रह सके।

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Sarthak Bohidar
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