CG News: भिलाई स्टील प्लांट (BSP) में लोहा चोरी के मामले में दुर्ग पुलिस ने एक और कार्रवाई करते हुए रसमड़ा स्थित रायपुर पावर एंड स्टील लिमिटेड कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर और डायरेक्टर को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, BSP से चोरी किया गया लोहे का कबाड़ रसमड़ा स्थित फैक्ट्री में खपाया जाता था। इस मामले में कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर विनोद कुमार गर्ग और डायरेक्टर संदीप कुमार सिंह को गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस के अनुसार, विनोद कुमार गर्ग की उम्र 60 वर्ष है और वह रायपुर के भाठागांव स्थित वालफोर्ट सिटी के रहने वाले हैं। वे रायपुर पावर एंड स्टील लिमिटेड में मैनेजिंग डायरेक्टर के पद पर हैं। वहीं, 39 वर्षीय संदीप कुमार सिंह दुर्ग के स्मृति नगर क्षेत्र के निवासी हैं और कंपनी में डायरेक्टर हैं। दोनों आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
पुलिस के मुताबिक, BSP से चोरी किए गए लोहे के कबाड़ को रसमड़ा स्थित रायपुर पावर एंड स्टील लिमिटेड की फैक्ट्री में खपाए जाने के संबंध में तकनीकी साक्ष्यों की जांच की गई। जांच में मिले साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने दोनों कंपनी पदाधिकारियों को गिरफ्तार किया है। अब उनसे पूछताछ के आधार पर मामले में आगे की जांच की जा रही है।
इस कार्रवाई के साथ मामले में गिरफ्तार आरोपियों की संख्या 21 हो गई है। इससे पहले दुर्ग पुलिस ने BSP के GM और AGM समेत 19 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि BSP परिसर से चोरी किया गया लोहे का कबाड़ किस तरह रसमड़ा स्थित फैक्ट्री तक पहुंचाया जाता था।
जांच के दौरान पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि चोरी के लोहे की खरीद-फरोख्त में और कौन-कौन लोग शामिल थे। पुलिस के अनुसार, पहले गिरफ्तार किए गए आरोपियों से पूछताछ के दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं। पूछताछ में सामने आए कुछ अन्य लोगों के नामों के आधार पर भी जांच और आगे की कार्रवाई की जा रही है।
मामले का खुलासा 26 मई 2026 को हुआ था। उस समय पुरानी भिलाई थाना पुलिस ने ग्राम अकलोरडीह खदानपारा स्थित एके ट्रेडर्स और हथखोज के प्लॉट नंबर-18 में छापा मारा था। पुलिस की कार्रवाई के दौरान कई हाईवा, ट्रक और अन्य वाहनों में फ्लू डस्ट के साथ लोहे की प्लेट, बीम और कटिंग सामग्री मिली थी।
पुलिस ने मौके से करीब 250 टन लौह स्क्रैप जब्त किया था। इसके अलावा स्क्रैप की ढुलाई और लोडिंग में इस्तेमाल किए जा रहे कई वाहन, जेसीबी, हाईड्रा और अन्य मशीनों को भी जब्त किया गया था। जब्त किए गए सामान और वाहनों की कुल कीमत करीब 3 करोड़ 22 लाख रुपये आंकी गई थी। इसमें करीब 90 लाख रुपये का लौह स्क्रैप शामिल था।
पुलिस की जांच में यह भी सामने आया था कि फ्लाई ऐश के नीचे लोहे को छिपाकर प्लांट से बाहर निकाला जा रहा था। इसी तरीके से चोरी का लोहा बाहर ले जाने की बात जांच में सामने आई थी। BSP परिसर में सुरक्षा के लिए CISF के जवान तैनात रहते हैं और बड़ी संख्या में CCTV कैमरे भी लगे हुए हैं।
फ्लाई ऐश की आड़ में लोहे को बाहर निकाले जाने के मामले में पुलिस अब संभावित अंदरूनी मिलीभगत के एंगल से भी जांच कर रही है। पुलिस के मुताबिक, प्लांट की सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद इस तरह चोरी की सामग्री बाहर निकलने को लेकर कई सवाल हैं। हालांकि, इस संबंध में किस स्तर पर और किन लोगों की भूमिका थी, यह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
दुर्ग पुलिस द्वारा अब तक की गई कार्रवाई में बड़ी मात्रा में लौह स्क्रैप और परिवहन एवं लोडिंग में इस्तेमाल होने वाले वाहनों तथा मशीनों की जब्ती की जा चुकी है। मामले में लगातार सामने आ रही जानकारियों के आधार पर पुलिस आरोपियों की भूमिका और चोरी के नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।
फिलहाल रसमड़ा स्थित फैक्ट्री के मैनेजिंग डायरेक्टर और डायरेक्टर की गिरफ्तारी के बाद जांच का दायरा और बढ़ गया है। पुलिस BSP से चोरी किए गए लोहे के कबाड़ की फैक्ट्री तक पहुंच, उसकी खरीद-फरोख्त और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही है। मामले में अब तक 21 आरोपियों को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी पुलिस की ओर से दी गई है। छत्तीसगढ़ की हर अपडेट के लिए हमारे WhatsApp चैनल को फॉलो करें- https://whatsapp.com/channel/0029VbBj50DATRSgaSxCmo2v




