CG News: छत्तीसगढ़ में धान खरीदी व्यवस्था को पारदर्शी बनाने प्रशासन ने कड़ाई बढ़ा दी है। पहले समितियों में धान के स्टॉक का सत्यापन खरीदी के अंतिम चरण में किया जाता था, लेकिन इस वर्ष व्यवस्था में बदलाव किए गए हैं। अब स्टॉक की जांच और मिलान खरीदी की प्रक्रिया के दौरान ही किया जा रहा है। इससे धान की अवैध खपत और स्टॉक में अनियमितता से जुड़े कई मामले सामने आए हैं।
प्रशासन ने धान खरीदी केंद्रों में गड़बड़ियों को रोकने के लिए कई नए उपाय अपनाए हैं। निगरानी को मजबूत किया गया है और उड़नदस्ता टीम को निर्देश दिया गया है कि जहां भी रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में अंतर दिखाई दे, वहां तुरंत कार्रवाई की जाए।
खरीदी के दौरान ही स्टॉक सत्यापन
पहले धान का मिलान तब किया जाता था जब खरीदी का अंतिम चरण चल रहा होता था, जिसकी वजह से अनियमितताएं आसानी से छिप जाती थीं।
लेकिन इस बार प्रक्रिया बदलने से धान के रिकॉर्ड में छेड़छाड़ और अवैध भंडारण पकड़े जा रहे हैं। जैसे ही किसी केंद्र के ऑनलाइन दर्ज आंकड़ों में गड़बड़ी दिखाई देती है, मॉनिटरिंग टीम उड़नदस्ता को अलर्ट करती है और मौके पर स्टैक का सत्यापन शुरू होता है।
जांच के दौरान केंद्रों में ऑनलाइन रजिस्टर की तुलना में अधिक धान मिलने पर उसे तुरंत जब्त किया जा रहा है। प्रशासन ने कहा है कि धान खरीदी प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाए रखना और किसानों के हितों की रक्षा करना प्राथमिक लक्ष्य है।
सैकड़ों क्विंटल अवैध धान बरामद
अब तक हुई कार्रवाई में घुमका, तुमड़ीबोड़ और पटेवा समितियों में स्टैक की गणना के दौरान बड़े पैमाने पर अवैध धान पकड़ा गया है।
प्रशासनिक टीम ने सैकड़ों क्विंटल धान जब्त किया है जिसकी कीमत लाखों रुपये बताई जा रही है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि इस जब्त धान पर दावा करने कोई किसान सामने नहीं आया है।
अधिकारियों का कहना है कि जब कोई किसान दावा प्रस्तुत नहीं करता, तो स्पष्ट होता है कि यह धान वैध खरीदी का हिस्सा नहीं था, बल्कि अवैध भंडारण था जिसे खपाने की कोशिश की जा रही थी।
इन कार्रवाईयों के बाद समितियों में अवैध कारोबार कर रहे कोचियों और दलालों की गतिविधियों पर रोक लगी है। अधिकारी मानते हैं कि यह सख्ती आगे भी जारी रहेगी।
अब तक 19248 क्विंटल धान जब्त
प्रशासन के अनुसार कड़ी निगरानी और लगातार चल रही जांच के दौरान जिले में अब तक 157 मामलों में कुल 19248 क्विंटल धान पकड़ा गया है।
सबसे बड़ी मात्रा घुमका और तुमड़ीबोड़ उपार्जन केंद्रों में मिली है।
बरामद किए गए धान का मूल्य लगभग छह करोड़ रुपये के आसपास बताया जा रहा है।
ये आंकड़े बताते हैं कि कितने बड़े स्तर पर समितियों के जरिये अवैध रूप से धान खपाया जा रहा था।
संवेदनशील केंद्र चिन्हित
धान खरीदी शुरू होने से पहले कलेक्टर के निर्देश पर समितियों के पिछले रिकॉर्ड खंगाले गए।
जांच में उन केंद्रों को चिह्नित किया गया जहां गड़बड़ियों की आशंका अधिक थी।
96 केंद्रों में से 25 केंद्रों को संवेदनशील सूची में रखा गया है।
इन सभी केंद्रों पर वास्तविक समय में निगरानी की जा रही है और खरीदी की पूरी प्रक्रिया डिजिटल मॉनिटरिंग के तहत रखी गई है।
प्रशासन का कहना है कि इससे प्रबंधकों और कर्मचारियों में भी जवाबदेही बढ़ी है और धान खरीदी प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक नियंत्रण में है।
सैटेलाइट मैप से होगी जांच
इधर, घुमका क्षेत्र में 79 एकड़ गिरदावरी में गड़बड़ी से जुड़े मामले को प्रशासन ने गंभीरता से लिया है।
इस मामले की जांच के लिए पिछले तीन वर्षों के सैटेलाइट नक्शे का उपयोग किया जाएगा ताकि वास्तविक खेती और दर्ज रिकॉर्ड की तुलना की जा सके।
इस प्रकरण में व्यापारी और किसान नवीन लुनिया सहित गिरदावरी तैयार करने वाले पटवारी, प्राधिकृत अधिकारी, धान उपलब्ध कराने वाले कोचिये और संबंधित लोगों की भूमिका की जांच जारी है।
निगरानी और छापेमारी जारी
कलेक्टर के मार्गदर्शन में हाल ही में दो खरीदी केंद्रों में अतिरिक्त धान पकड़ा गया है।
उड़नदस्ता पूरी तरह अलर्ट पर है और जहां भी गड़बड़ी की आशंका दिखाई देती है, वहां तत्काल सत्यापन और स्टैक जांच की जा रही है।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि धान खरीदी प्रक्रिया में पारदर्शिता आवश्यक है और किसी भी स्तर पर अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।



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