CG News: कोरबा में बोलेरो वाहन से कुचलकर गंभीर रूप से घायल किए गए यातायात विभाग में पदस्थ सहायक उप निरीक्षक (ASI) रामनारायण रात्रे के पुत्र चंद्रमणि रात्रे उर्फ दादू की उपचार के दौरान मौत हो गई। रायपुर के एक निजी अस्पताल में छह दिनों तक जिंदगी और मौत से संघर्ष करने के बाद शुक्रवार को उसने अंतिम सांस ली। घटना के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है।
विवाद के बाद वाहन चढ़ाने का आरोप
जानकारी के अनुसार घटना 6 जून की रात करीब एक बजे मानिकपुर चौकी क्षेत्र के बुधवारी बाइपास मार्ग पर हुई थी। चंद्रमणि अपने दोस्तों के साथ कार में बैठा हुआ था। इसी दौरान बोलेरो सवार कुछ लोगों के साथ उसका विवाद हो गया।
आरोप है कि विवाद के बाद बोलेरो चालक ने जानबूझकर वाहन चंद्रमणि पर चढ़ा दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए।
अस्पतालों में चला लंबा इलाज
घटना के बाद घायल चंद्रमणि को पहले मेडिकल कॉलेज अस्पताल कोरबा में भर्ती कराया गया। हालत बिगड़ने पर 7 जून को उसे बिलासपुर रेफर किया गया और बाद में बेहतर उपचार के लिए रायपुर के अस्पताल में भर्ती कराया गया।
लगातार छह दिनों तक इलाज चलने के बावजूद उसकी जान नहीं बचाई जा सकी।
पीछा करने वालों के साथ भी हुई वारदात
घटना के बाद बोलेरो का पीछा करने निकले अरविंद राठौर और साहिल निर्मलकर भी हमले का शिकार हो गए। साहिल किसी तरह मौके से बच निकला, जबकि अरविंद के अपहरण का आरोप लगाया गया है।
शिकायत के अनुसार आरोपियों ने अरविंद को एक अन्य स्थान पर ले जाकर बेरहमी से मारपीट की। हमले में उसके हाथ-पैर की हड्डियां टूट गईं और सिर पर गंभीर चोटें आईं।
लूट, धमकी और फायरिंग के आरोप
पीड़ित पक्ष ने आरोप लगाया है कि आरोपियों ने मारपीट के दौरान नकदी, मोबाइल और जेवर भी लूट लिए। साथ ही हथियार दिखाकर धमकाने और फायरिंग करने के आरोप भी लगाए गए हैं।
इन आरोपों के बाद मामला और गंभीर हो गया है तथा पुलिस कई पहलुओं से जांच कर रही है।
हत्या की धारा जोड़ने की तैयारी
पुलिस ने प्रारंभ में हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया था। अब चंद्रमणि की मौत के बाद प्रकरण में हत्या से संबंधित धाराएं जोड़ने की प्रक्रिया की जा रही है।
हालांकि घटना के छह दिन बाद भी मुख्य आरोपी पुलिस गिरफ्त से बाहर बताए जा रहे हैं, जिससे जांच की गति पर सवाल उठ रहे हैं।
परिजनों ने उठाए कार्रवाई पर सवाल
पीड़ित परिवार और अरविंद राठौर के परिजनों का आरोप है कि उन्होंने शुरुआती दौर में कुछ संदिग्ध व्यक्तियों के नाम पुलिस को बताए थे, लेकिन समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
परिजनों का दावा है कि लूटा गया मोबाइल बाद में बरामद हुआ है तथा अपहरण में इस्तेमाल की गई कार भी पुलिस को लावारिस हालत में मिली है। इसके बावजूद मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने से परिवार में नाराजगी है।
पुलिस कार्रवाई पर टिकी निगाहें
अब पूरे मामले में लोगों की नजर पुलिस की अगली कार्रवाई पर है। एक ओर एएसआई के बेटे की मौत ने मामले को और गंभीर बना दिया है, वहीं अपहरण, मारपीट और लूट के आरोपों ने कानून-व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। छत्तीसगढ़ की हर अपडेट के लिए हमारे WhatsApp चैनल को फॉलो करें- https://whatsapp.com/channel/0029VbBj50DATRSgaSxCmo2v




