Friday, March 27, 2026
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CG News: खूंखार माओवादी हिड़मा के खात्मे के बाद अब पापाराव और देवा बने सबसे बड़ी चुनौती, बस्तर में नक्सलवाद के अंतिम चरण की लड़ाई तेज

CG News: बस्तर के घने जंगलों में माओवादी हिंसा का एक बड़ा अध्याय समाप्त हो चुका है। भारत के सबसे खतरनाक और दुर्दांत माओवादी कमांडर माड़वी हिड़मा के मारे जाने के बाद सुरक्षा बलों के सामने अब कुछ चुनिंदा शीर्ष माओवादी ही बचे हैं। हिड़मा के खात्मे ने न केवल दंडकारण्य में लाल आतंक की कमर तोड़ी है, बल्कि यह भी संकेत दिया है कि बस्तर में माओवादी आंदोलन अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है।

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पहले ही साफ कर चुके हैं कि मार्च 2026 तक माओवादी हिंसा को जड़ से खत्म करना सरकार का लक्ष्य है। बस्तर में चल रहा यह अभियान अब उन बचे हुए प्रमुख कमांडरों पर केंद्रित हो रहा है, जो अभी भी कोर जंगलों में सक्रिय हैं।


हिड़मा की मौत — माओवादी नेटवर्क पर सबसे बड़ा झटका

हिड़मा वह नाम था जिसने तीन दशकों तक बस्तर और सीमावर्ती राज्यों में माओवादी हिंसा को दिशा दी। दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर और ओडिशा तक फैले हमलों में उसकी भूमिका साबित हो चुकी है।

इस वर्ष सुरक्षा एजेंसियों ने माओवादी संगठन को कई बड़े झटके दिए हैं:

  • बसवा राजू,

  • गुडसा उसेंडी,

  • कोसा,

  • सुधाकर,

  • और अब माड़वी हिड़मा

जैसे शीर्ष हिंसक मारे जा चुके हैं।

इसके अलावा भूपति, सुजाता, रूपेश समेत 300 से अधिक माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है। यह आँकड़ा दर्शाता है कि संगठन की ताकत तेजी से कमजोर हो रही है।


उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा का संदेश — “हथियार छोड़ें, वरना बसवा राजू और हिड़मा जैसा हश्र होगा”

छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री व गृहमंत्री विजय शर्मा ने साफ कहा है:

“जब तक एक भी माओवादी बंदूक लिए खड़ा है, यह लड़ाई खत्म नहीं होगी। जो मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं, उनका स्वागत है। लेकिन बाकी का अंजाम हिड़मा जैसा ही होगा।”

सरकार की कड़ी रणनीति, सुरक्षाबलों की लगातार दबाव-युक्त कार्रवाई और तेज़ी से फैलते सुरक्षा कैंपों ने जंगलों में माओवादी प्रभाव को काफी हद तक सीमित कर दिया है।


बस्तर में तेजी से सिमट रहा रेड कॉरिडोर

पिछले दो वर्षों में समर्पण और मुठभेड़ों के कारण बस्तर का रेड कॉरिडोर तेजी से छोटा हुआ है:

  • 2,000 से अधिक माओवादी आत्मसमर्पण

  • 450 से अधिक मारे गए

  • 40 से अधिक नए सुरक्षा कैंप स्थापित

उत्तर बस्तर से माड़ क्षेत्र तक, जहाँ एक समय माओवादी बेखौफ घूमते थे, आज सुरक्षा बलों की तैनाती है।

आंध्रप्रदेश और छत्तीसगढ़ की सीमाओं के बीच हिड़मा और उसकी पत्नी राजे के मारे जाने तथा 50 से ज्यादा गिरफ्तारी के बाद सुकमा-बीजापुर का इलाका भी काफी हद तक शांत हुआ है।


अभी सबसे बड़ी चुनौती — पापाराव और देवा

सुरक्षा एजेंसियों ने अब उन शीर्ष 10 माओवादियों की सूची तैयार की है, जिन्हें “अंतिम बाधा” माना जा रहा है। इनमें दो सबसे अहम नाम हैं:

1. पापाराव

  • पश्चिम बस्तर डिवीजन का सचिव

  • दक्षिण सब-जोनल ब्यूरो का प्रमुख

  • पिछले एक दशक से हिंसक गतिविधियों की रीढ़

2. बारसे देवा

  • हिड़मा की मौत के बाद PLGA हिंसक दल नंबर-1 का नया प्रभारी

  • दक्षिण सब-जोनल ब्यूरो का प्रभावशाली सदस्य

  • रणनीति, घातक एंबुश और संगठन विस्तार का मास्टरमाइंड

इन दोनों के अलावा भी कुछ अनुभवी माओवादी दंडकारण्य के कोर इलाकों में सक्रिय हैं।


सुरक्षा एजेंसियों की सूची — अब निशाने पर ये 10 शीर्ष माओवादी

 

1. मल्लाजी रेड्डी उर्फ सतन्ना

केंद्रीय समिति सदस्य, प्रभारी ओडिशा स्टेट कमेटी

2. रामदेर उर्फ सोमा

केंद्रीय समिति सदस्य, सचिव MMC जोन

3. बारसे देवा

नया प्रभारी PLGA हिंसक दल नंबर-1

4. पापाराव

सचिव पश्चिम बस्तर डिवीजन

5. मुचाकी एर्रा

सचिव दक्षिण बस्तर डिवीजन

6. सुजाता

प्रभारी माड़ डिवीजन व KAMS से जुड़ी गतिविधियाँ

7. जी. पावनंदम रेड्डी उर्फ श्याम दादा

सचिव दरभा डिवीजन

8. रवि उर्फ भास्कर

प्रभारी गढ़चिरौली डिवीजन

9. नुने नरसिम्हा रेड्डी उर्फ सन्नू दादा

राजनीतिक टीम का प्रभारी

10. मंगतु उर्फ लाल सिंह

संचार शाखा प्रभारी

ये सभी माओवादी संगठन के “थिंक टैंक” और “फील्ड कमांडर” माने जाते हैं, जिनके खत्म होने से माओवाद का ढांचा पूरी तरह बिखर सकता है।


दंडकारण्य के कोर इलाके — आखिरी गढ़

 

सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि अब लड़ाई बेहद सीमित इलाकों में सिमट गई है:

  • अबुझमाड़

  • बीजापुर का गंगालूर क्षेत्र

  • सुकमा का कोंटा-जगरगुंडा बेल्ट

  • दंतेवाड़ा का बारसूर-नकुलनार जोन

इन्हीं इलाकों में बचे शीर्ष माओवादी अपनी गतिविधियाँ चला रहे हैं, लेकिन हिड़मा के मारे जाने के बाद उनकी संचालन क्षमता भी कमजोर हुई है।


जमीनी प्रभाव लगातार कमजोर — सुरक्षा कैंप बने गेमचेंजर

सुरक्षा बलों द्वारा स्थापित नए कैंपों ने कई प्रभाव दिखाए:

  • ग्रामीण क्षेत्रों में पहली बार सरकारी योजनाएँ पहुँचीं

  • माओवादी नेटवर्क की आपूर्ति लाइन टूटी

  • कई गावों में पहली बार सड़कें और बिजली पहुँची

  • माओवादियों की फील्ड इंटेलिजेंस कमज़ोर हुई

स्थानीय जनजातीय समुदाय अब प्रशासन के साथ खुलकर खड़े हो रहे हैं।


IG सुंदरराज का बयान

बस्तर आईजी सुंदरराज पी ने बताया:

“मुठभेड़ स्थल से मिले दस्तावेज़ और डिजिटल उपकरणों से पता चलता है कि माओवादी अभी भी अर्बन नेटवर्क के जरिए लॉजिस्टिक सपोर्ट लेने की कोशिश कर रहे थे। जल्द ही इस नेटवर्क का भी खुलासा होगा।”


निष्कर्ष — बस्तर में अंतिम लड़ाई तय

माड़वी हिड़मा का खात्मा नक्सली इतिहास का निर्णायक मोड़ है। अब लड़ाई सिर्फ कुछ अनुभवी माओवादियों के खिलाफ सिमट गई है। पापाराव, देवा और उनके कुछ साथी ही इस लड़ाई की आखिरी चुनौती हैं।

आने वाले महीनों में सुरक्षा बल जिस तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, उससे संकेत साफ है —
बस्तर माओवादी हिंसा के अंत के सबसे नजदीक है।

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