CG News: रायपुर/पेंड्रा। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के पेंड्रा थाना क्षेत्र के ग्राम रानीझाप में विधवा महिला के साथ अमानवीय और अपमानजनक व्यवहार किए जाने का मामला सामने आने के बाद पुलिस ने तीन आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। घटना का वीडियो सामने आने के बाद गांव में तनाव का माहौल बन गया है और महिला सुरक्षा व ग्रामीण समाज में “भीड़ आधारित सज़ा” पर बहस छिड़ गई है।
विवाद की वजह और पूरा घटनाक्रम
मिली जानकारी के अनुसार पीड़िता करीब 35 वर्षीय विधवा महिला है। उसके पति की मौत लगभग एक वर्ष पूर्व हो चुकी है। इसके बाद महिला का गांव के ही एक 35 वर्षीय विवाहित व्यक्ति से संपर्क बढ़ा, जिसके दो बच्चे भी हैं। बताया गया कि दोनों 29 अक्टूबर 2025 को गांव छोड़कर मध्यप्रदेश के शहडोल जिले के ग्राम मालाचुवा में रहने लगे थे। शुक्रवार 23 जनवरी को दोनों जब गांव लौटे तो विवाद की स्थिति बन गई। दोनों पक्ष पुलिस चौकी खोडरी पहुंचे जहां महिला ने स्पष्ट रूप से उक्त व्यक्ति के साथ रहने की इच्छा जताई। चौकी में हुई समझाइश के बाद दोनों गांव लौट आए।
सुबह भीड़ ने घर में घुसकर किया हमला
चौकी से लौटने के बाद रात में महिला और युवक गांव में ही भुल्लन गोंड़ के घर में ठहरे थे। शनिवार सुबह करीब 10 बजे युवक की पत्नी, भाई, बहन और कुछ अन्य लोग एकत्रित होकर घर पहुंचे। आरोप है कि महिला को घर से बाहर घसीटकर सड़क पर लाया गया और मारपीट की गई। इसी दौरान उसके कपड़े खींचे जाने से वह अपमानजनक स्थिति में पहुंच गई। ग्रामीणों की मौजूदगी के बीच महिला की लगातार गुहार के बावजूद भीड़ ने उसे राहत नहीं दी।
वायरल वीडियो ने बढ़ाया मामला
घटना के दौरान बने वीडियो में महिला के साथ अमानवीय व्यवहार दिखाई देने की वजह से यह मामला तेजी से वायरल हो गया। वीडियो आने के बाद न सिर्फ गांव में बल्कि सोशल मीडिया पर भी महिला सुरक्षा, निजता और ग्रामीण समाज में भीड़ आधारित दंड की मानसिकता पर सवाल उठे। ग्रामीणों का कहना है कि विवाद निजी था और पुलिस में महिला की इच्छा पहले ही दर्ज हो चुकी थी, ऐसे में सामाजिक दंड देने की कोई वैधता नहीं थी।
पुलिस ने संवेदनशीलता के साथ दर्ज किया केस
थाना प्रभारी सौरभ सिंह ने बताया कि युवक की पत्नी, भाई और बहन के खिलाफ विभिन्न धाराओं में अपराध दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि यह मामला संवेदनशील है इसलिए इसे सेंसिटिव मोड में रखा गया है। पुलिस ने कहा कि वायरल वीडियो, प्रत्यक्षदर्शी बयान और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल आरोपी जमानत पर हैं, लेकिन जांच लंबित है।
कानून और गांव की ‘सामाजिक सज़ा संस्कृति’ पर बहस
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि विवाह, संबंध या निजी सहमति से जुड़े विवादों में भीड़ द्वारा “सामाजिक सज़ा” देना संविधान और आपराधिक कानूनों के विपरीत है। महिला अधिकारों को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी पुरानी धारणाएं प्रभावी रहती हैं, जिसके कारण अक्सर विवाद अपमान, हिंसा और भीड़ आधारित दंड में बदल जाते हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि विधवा महिलाओं पर समाजिक दबाव अधिक रहता है और उनके व्यक्तिगत निर्णयों को पारिवारिक या सामुदायिक इकाइयां आसानी से स्वीकार नहीं करतीं।
जागरूकता और न्यायिक प्रक्रिया की जरूरत
यह मामला केवल एक निजी विवाद नहीं बल्कि ग्रामीण समाज में कानून व्यवस्था, महिला सम्मान और न्यायिक हस्तक्षेप की आवश्यकता का बड़ा उदाहरण बन गया है। विशेषज्ञों ने कहा कि ऐसे मामलों में प्रशासन, पुलिस और महिला व बाल विकास विभाग द्वारा कानून संबंधी जागरूकता कार्यक्रमों की आवश्यकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में “सामाजिक दंड” की परंपरा को आधुनिक न्यायिक तंत्र से टकराव वाला बताया गया है।
आगे क्या?
मामले की जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट रायपुर संभाग तक जाएगी। इसके आधार पर आरोपियों पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। पुलिस का कहना है कि वायरल वीडियो और गवाहों के बयान महत्वपूर्ण साक्ष्य बन सकते हैं। गांव में वर्तमान में स्थिति सामान्य है, लेकिन चर्चा अभी भी जारी है।
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