CG Naxal News: छत्तीसगढ़ में नक्सल उन्मूलन अभियान को बड़ी सफलता मिली है। दंडकारण्य क्षेत्र के कुख्यात नक्सली और वर्षों तक सुरक्षा बलों के लिए चुनौती बने पापाराव ने अपने 17 साथियों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया है। इस घटनाक्रम ने राज्य के ‘नक्सल नक्शे’ को बदलकर रख दिया है। इसके साथ ही केंद्र सरकार ने भी बड़ा फैसला लेते हुए नारायणपुर जिले को ‘अति संवेदनशील’ श्रेणी से बाहर कर दिया है, जो अपने आप में ऐतिहासिक बदलाव माना जा रहा है।
यह घटनाक्रम न सिर्फ सुरक्षा बलों के लिए बड़ी उपलब्धि है, बल्कि बस्तर क्षेत्र में शांति और विकास की दिशा में एक निर्णायक मोड़ भी साबित हो सकता है।
मोस्ट वांटेड पापाराव का सरेंडर, सुरक्षा बलों की बड़ी कामयाबी
दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC) का सदस्य पापाराव लंबे समय से नक्सली गतिविधियों में सक्रिय था। उसे वर्ष 2010 में हुए ताड़मेटला हमला का मास्टरमाइंड भी माना जाता है, जिसमें 76 सीआरपीएफ जवान शहीद हुए थे।
गृहमंत्री विजय शर्मा और बस्तर आईजी पी सुंदरराज ने इस सरेंडर को नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक सफलता बताया है। अधिकारियों के अनुसार, पापाराव बस्तर क्षेत्र में सक्रिय आखिरी बड़े नक्सली नेताओं में से एक था।
उसके साथ आत्मसमर्पण करने वालों में डिविजनल कमेटी सदस्य प्रकाश मडवी और अनिल समेत कुल 18 नक्सली शामिल हैं, जिनमें 7 महिलाएं भी हैं। सभी ने हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में लौटने की इच्छा जताई है।
नारायणपुर ‘अति संवेदनशील’ सूची से बाहर, सिर्फ बीजापुर बचा
केंद्र सरकार द्वारा नक्सल प्रभावित जिलों की नई सूची जारी की गई है, जिसमें बड़ा बदलाव देखने को मिला है। लंबे समय तक नक्सल हिंसा का केंद्र रहे नारायणपुर को अब ‘अति संवेदनशील’ श्रेणी से बाहर कर दिया गया है।
अब राज्य में सिर्फ बीजापुर जिला ही ‘अति संवेदनशील’ श्रेणी में बचा है। यह बदलाव दर्शाता है कि छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का दायरा तेजी से सिमट रहा है।
नारायणपुर और अबूझमाड़ जैसे इलाके, जो कभी नक्सलियों के गढ़ माने जाते थे, अब धीरे-धीरे मुख्यधारा में लौट रहे हैं।
31 मार्च डेडलाइन: नक्सलवाद खत्म करने का लक्ष्य
केंद्र और राज्य सरकार ने 31 मार्च 2026 तक सशस्त्र नक्सलवाद को समाप्त करने का लक्ष्य रखा है। इस डेडलाइन के करीब आते ही लगातार बड़े सरेंडर और कार्रवाई सामने आ रही है।
गृहमंत्री विजय शर्मा के अनुसार:
- पिछले 2 वर्षों में 8000 नक्सलियों के नेटवर्क को तोड़ा गया
- 3000 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया

- 2000 को गिरफ्तार किया गया
- 500 से ज्यादा नक्सली मारे गए
उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि यह कोई “हैप्पी न्यू ईयर” का लक्ष्य नहीं, बल्कि लगातार चलने वाली प्रक्रिया है।
बस्तर में पहली बार नेतृत्वहीन हुआ माओवादी संगठन
आईजी पी सुंदरराज के अनुसार, पापाराव के सरेंडर के बाद दंडकारण्य क्षेत्र में माओवादी संगठन पहली बार नेतृत्वहीन हो गया है। यह सुरक्षा बलों के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम उपलब्धि है।
उन्होंने कहा, “यह बस्तर को नक्सल मुक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। अब बाकी बचे नक्सलियों के भी जल्द आत्मसमर्पण करने की उम्मीद है।”
55 लाख के इनामी नक्सली सुकरु ने भी डाला हथियार
इसी बीच एक और बड़ी खबर सामने आई है। पड़ोसी राज्य में 5 नक्सलियों ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया, जिनमें कुख्यात नक्सली सुकरु भी शामिल है, जिस पर 55 लाख रुपए का इनाम घोषित था।
इन नक्सलियों ने अपने पास मौजूद AK-47, SLR और अन्य हथियार सुरक्षा बलों को सौंप दिए। कुल मिलाकर करीब 66 लाख रुपए के इनामी नक्सलियों ने सरेंडर किया, जिससे नक्सल नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है।
विकास और सुरक्षा का नया दौर शुरू
विशेषज्ञों का मानना है कि नक्सलवाद के कमजोर होने से बस्तर और आसपास के क्षेत्रों में विकास की रफ्तार तेज होगी। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्र में नए अवसर पैदा होंगे।
सरकार पहले ही इन क्षेत्रों में:
- इंफ्रास्ट्रक्चर विकास

- डिजिटल कनेक्टिविटी
- शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार
जैसी योजनाओं पर काम कर रही है।
पुनर्वास नीति: मुख्यधारा में लौटने का मौका
सरकार द्वारा आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के लिए पुनर्वास नीति भी लागू की गई है। इसके तहत:
- आर्थिक सहायता
- कौशल विकास प्रशिक्षण

- रोजगार के अवसर
उपलब्ध कराए जाते हैं, ताकि वे समाज की मुख्यधारा में सम्मानजनक जीवन जी सकें।
निष्कर्ष: छत्तीसगढ़ के लिए ऐतिहासिक मोड़
पापाराव का सरेंडर और नारायणपुर का ‘अति संवेदनशील’ सूची से बाहर होना छत्तीसगढ़ के लिए ऐतिहासिक बदलाव है। यह संकेत है कि दशकों से चला आ रहा नक्सलवाद अब अपने अंतिम दौर में है।
हालांकि, विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि पूरी तरह नक्सलमुक्त होने के लिए लगातार सतर्कता और विकास की गति बनाए रखना जरूरी होगा।
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