CG Job: छत्तीसगढ़ के शासकीय महाविद्यालयों में लंबे समय से लंबित भर्ती प्रक्रिया को लेकर सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। वित्त विभाग ने सहायक प्राध्यापक, ग्रंथपाल और क्रीड़ा अधिकारी के कुल 700 पदों पर भर्ती की स्वीकृति दे दी है। इस फैसले से हजारों अभ्यर्थियों को उम्मीद जगी है, लेकिन इसी के साथ एक बड़ा विवाद भी सामने आया है। होम साइंस (गृह विज्ञान) विषय को इस भर्ती से बाहर रखे जाने पर अभ्यर्थियों में गहरी नाराजगी देखने को मिल रही है।
होम साइंस विषय से जुड़े सैकड़ों योग्य उम्मीदवारों का कहना है कि जहां एक ओर सरकार उच्च शिक्षा को मजबूत करने की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर एक महत्वपूर्ण और रोजगारोन्मुख विषय की लगातार अनदेखी की जा रही है। इसी मुद्दे को लेकर अभ्यर्थियों ने भारत सरकार के आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के मंत्री एवं लोकसभा सांसद तोखन साहू को ज्ञापन सौंपकर हस्तक्षेप की मांग की है।
700 पदों की मंजूरी, लेकिन अधूरी तस्वीर
वित्त विभाग द्वारा जिन 700 पदों पर भर्ती को स्वीकृति दी गई है, उनमें सहायक प्राध्यापक के साथ-साथ ग्रंथपाल और क्रीड़ा अधिकारी शामिल हैं। सरकार का दावा है कि इससे शासकीय महाविद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था सुदृढ़ होगी और वर्षों से खाली पड़े पदों को भरा जा सकेगा।
हालांकि, अभ्यर्थियों का आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया में होम साइंस विषय को जानबूझकर नजरअंदाज किया गया है, जबकि राज्य के अधिकांश शासकीय कॉलेजों में यह विषय संचालित है और इसमें छात्राओं की संख्या भी अन्य कई विषयों से अधिक है।
रिक्त पद बढ़कर हुए करीब 50
उच्च शिक्षा संचालनालय से प्राप्त जनसूचना अधिकारी के आंकड़ों के अनुसार, 30 जून 2025 तक होम साइंस विषय में 24 पद रिक्त थे। इसके बाद पदोन्नति और सेवानिवृत्ति के चलते यह संख्या बढ़कर लगभग 50 तक पहुंच चुकी है। इसके बावजूद नए पदों की स्वीकृति नहीं मिलना अभ्यर्थियों के लिए सबसे बड़ा सवाल बन गया है।
अभ्यर्थियों का कहना है कि जब अन्य विषयों में रिक्त पदों को ध्यान में रखकर भर्ती की जा रही है, तो होम साइंस जैसे विषय को इससे बाहर रखना न सिर्फ अन्यायपूर्ण है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की जरूरतों के भी खिलाफ है।
छह साल से भर्ती का इंतजार
होम साइंस अभ्यर्थियों के अनुसार, इस विषय में आखिरी बार वर्ष 2019 में भर्ती हुई थी, वह भी केवल 9 पदों पर। इनमें से 7 पद बैकलॉग के थे। इसके बाद बीते छह वर्षों में एक भी नई भर्ती नहीं निकली।
इस दौरान नेट, सेट और पीएचडी जैसे उच्चतम शैक्षणिक योग्यताएं हासिल कर चुके सैकड़ों युवा इंतजार करते-करते आयु सीमा के करीब पहुंच चुके हैं। कई अभ्यर्थी आयु सीमा पार होने के डर से मानसिक तनाव में हैं और अपने भविष्य को लेकर असमंजस की स्थिति में हैं।
महिलाओं और ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़ा विषय
अभ्यर्थियों का यह भी कहना है कि होम साइंस सिर्फ एक अकादमिक विषय नहीं है, बल्कि यह कौशल विकास और स्वरोजगार से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है। इस विषय के अंतर्गत सिलाई, कढ़ाई, फैशन डिजाइनिंग, पाक कला, डाइट थेरेपी, बाल विकास, काउंसलिंग और गृह प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र आते हैं।
विशेष रूप से ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में यह विषय छात्राओं को आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभाता है। ऐसे में होम साइंस के शिक्षकों की कमी का सीधा असर छात्राओं की शिक्षा और रोजगार संभावनाओं पर पड़ता है।
ज्ञापन के जरिए सरकार से मांग
अभ्यर्थियों ने सांसद तोखन साहू को सौंपे गए ज्ञापन में मांग की है कि होम साइंस विषय के रिक्त पदों को भी तत्काल स्वीकृति दी जाए और इन्हें 700 पदों की भर्ती प्रक्रिया में शामिल किया जाए। उनका कहना है कि यदि समय रहते निर्णय नहीं लिया गया, तो राज्य को भविष्य में प्रशिक्षित शिक्षकों की भारी कमी का सामना करना पड़ेगा।
सरकार के फैसले पर उठ रहे सवाल
इस पूरे मामले ने सरकार की भर्ती नीति पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि किसी एक विषय को लगातार नजरअंदाज करना संतुलित उच्च शिक्षा प्रणाली के अनुरूप नहीं है। यदि होम साइंस जैसे विषय को प्राथमिकता नहीं दी गई, तो इसका असर दीर्घकाल में सामाजिक और आर्थिक दोनों स्तरों पर देखने को मिल सकता है।
अब देखना यह होगा कि अभ्यर्थियों की नाराजगी और ज्ञापन के बाद सरकार इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाती है। फिलहाल, 700 पदों की भर्ती को लेकर जहां एक वर्ग में खुशी है, वहीं होम साइंस अभ्यर्थियों के लिए यह फैसला निराशा और असंतोष का कारण बना हुआ है।
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