Monday, March 23, 2026
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CG Corruption Case: 35 हजार की घूस लेते रंगे हाथ धरे गए इंजीनियर! जांजगीर में बिजली विभाग के 3 अफसरों पर ACB की बड़ी कार्रवाई

जांजगीर-चांपा | भ्रष्टाचार/प्रशासन

CG Corruption Case: छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एसीबी (एंटी करप्शन ब्यूरो) ने बिजली विभाग के तीन अधिकारियों को रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई उस समय हुई जब अधिकारी एक ब्रिक्स प्लांट के लिए ट्रांसफार्मर और मीटर लगाने के एवज में 35 हजार रुपये की घूस ले रहे थे। इस कार्रवाई से पूरे विभाग में हड़कंप मच गया है और सिस्टम पर फिर से सवाल खड़े हो गए हैं।

इस घटना ने यह साफ कर दिया है कि सरकारी सेवाओं में अब भी घूसखोरी की जड़ें गहरी हैं, लेकिन साथ ही यह भी संदेश गया है कि शिकायत होने पर कार्रवाई अब तेजी से हो रही है।


शिकायत से लेकर गिरफ्तारी तक: ऐसे बिछाया गया जाल

मामले की शुरुआत तब हुई जब शिकायतकर्ता प्रदीप यादव ने एसीबी बिलासपुर में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके फ्लाई ऐश ब्रिक्स प्लांट के लिए बिजली कनेक्शन से जुड़े काम—जैसे ट्रांसफार्मर और मीटर लगाने—के बदले अधिकारियों द्वारा रिश्वत की मांग की जा रही है।

एसीबी टीम ने पहले शिकायत का सत्यापन किया और आरोपों को सही पाया। इसके बाद पूरी योजना बनाकर ट्रैप कार्रवाई को अंजाम दिया गया। तय योजना के अनुसार शिकायतकर्ता ने 10 हजार रुपये उप अभियंता को और 25 हजार रुपये सहायक अभियंता के निर्देश पर उनके सहयोगी को दिए।

जैसे ही पैसे का लेन-देन हुआ, मौके पर पहले से मौजूद एसीबी टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए तीनों आरोपियों को रंगे हाथ पकड़ लिया।


कौन-कौन अधिकारी गिरफ्त में आए?

इस कार्रवाई में बिजली विभाग के तीन अधिकारी पकड़े गए हैं:

  • सहायक अभियंता विजय नोर्गे

  • उप अभियंता राजेंद्र शुक्ला

  • सहायक ग्रेड-1 देवेंद्र राठौर

तीनों के पास से 35 हजार रुपये की रिश्वत राशि बरामद की गई है। एसीबी ने मौके पर ही आवश्यक कानूनी कार्रवाई करते हुए उन्हें हिरासत में ले लिया।


किस काम के लिए मांगी जा रही थी घूस?

डीएसपी एसीबी अजितेश सिंह के अनुसार, यह रिश्वत फ्लाई ऐश ब्रिक्स प्लांट के लिए जरूरी बिजली सुविधाएं उपलब्ध कराने के नाम पर मांगी जा रही थी।

आरोप है कि:

  • ट्रांसफार्मर लगाने

  • बिजली मीटर इंस्टॉलेशन

  • कनेक्शन प्रक्रिया को तेज करने

के बदले अधिकारियों ने कमीशन तय किया था। यह भी संकेत मिले हैं कि इस तरह की वसूली का यह कोई पहला मामला नहीं है, बल्कि लंबे समय से यह खेल चल रहा था।


कानूनी कार्रवाई: किन धाराओं में केस दर्ज?

एसीबी ने तीनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 और 12 के तहत मामला दर्ज किया है। इन धाराओं के तहत:

  • सरकारी कर्मचारी द्वारा रिश्वत लेना

  • रिश्वत लेने में सहयोग करना

दोनों गंभीर अपराध माने जाते हैं।

आरोपियों से पूछताछ जारी है और आगे की कार्रवाई भी की जा रही है। संभावना है कि जांच में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।


क्या बड़े नेटवर्क का हिस्सा है मामला?

प्रारंभिक जांच में यह संकेत मिले हैं कि यह कोई एकल घटना नहीं, बल्कि एक संगठित पैटर्न का हिस्सा हो सकता है। अक्सर उद्योग या छोटे व्यवसाय शुरू करने वाले लोगों से इस तरह की मांग की जाती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि:

  • छोटे उद्योगों को शुरू करने में सबसे बड़ी बाधा भ्रष्टाचार है

  • ऐसी घटनाएं निवेश के माहौल को प्रभावित करती हैं

  • पारदर्शिता के लिए सख्त निगरानी जरूरी है

यदि इस मामले में गहराई से जांच होती है, तो संभव है कि और अधिकारी या कर्मचारी भी जांच के दायरे में आ सकते हैं।


ACB की कार्रवाई से क्या संदेश गया?

इस ट्रैप कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि:

  • शिकायत करने पर कार्रवाई संभव है

  • भ्रष्टाचार के खिलाफ एजेंसियां सक्रिय हैं

  • सरकारी कर्मचारियों पर निगरानी बढ़ रही है

हालांकि, यह भी सवाल बना हुआ है कि आखिर ऐसी घटनाएं बार-बार क्यों सामने आ रही हैं और सिस्टम में सुधार की गति कितनी तेज है।


आम लोगों और उद्योगों पर असर

इस तरह के मामलों का सबसे ज्यादा असर आम नागरिकों और छोटे उद्योगों पर पड़ता है। उन्हें:

  • काम के लिए बार-बार चक्कर लगाने पड़ते हैं

  • अतिरिक्त पैसे देने का दबाव रहता है

  • योजनाओं का लाभ लेने में देरी होती है

सरकार द्वारा ‘Ease of Doing Business’ को बढ़ावा देने की कोशिशों के बीच इस तरह की घटनाएं एक बड़ी चुनौती के रूप में सामने आती हैं।


आगे क्या होगा?

फिलहाल एसीबी की टीम तीनों आरोपियों से पूछताछ कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि:

  • क्या यह एक संगठित रैकेट है

  • किन-किन लोगों की इसमें भूमिका है

  • पहले भी कितने मामलों में इस तरह की वसूली हुई

आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे हो सकते हैं।


निष्कर्ष: सिस्टम में सुधार की जरूरत बरकरार

जांजगीर-चांपा में हुई यह कार्रवाई भले ही एक बड़ी सफलता मानी जा रही हो, लेकिन यह भी सच है कि भ्रष्टाचार की जड़ें अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं।

सरकार और एजेंसियों के लिए चुनौती यही है कि ऐसी घटनाओं को केवल कार्रवाई तक सीमित न रखकर सिस्टम में स्थायी सुधार लाया जाए, ताकि भविष्य में किसी को भी अपने अधिकार के लिए रिश्वत न देनी पड़े।

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Sarthak Bohidar
Sarthak Bohidarhttp://www.cginsights.in
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