Monday, March 23, 2026
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CG Breaking News: जबरन धर्मांतरण पर सख्त वार, आजीवन सजा का कानून पास; विधानसभा में गूंजे जय श्रीराम के नारे

रायपुर | Politics / Law Update

CG Breaking News: छत्तीसगढ़ की राजनीति में गुरुवार को बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सामने आया, जब विधानसभा ने ‘छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक-2026’ को ध्वनिमत से पारित कर दिया। इस नए कानून के तहत अब जबरन, प्रलोभन या धोखाधड़ी से कराए जाने वाले धर्मांतरण के मामलों में दोषियों को आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है।

राजधानी Raipur में हुए इस घटनाक्रम के दौरान सदन का माहौल भी गरम रहा, जहां विपक्ष के बहिष्कार के बीच सत्तापक्ष के विधायकों ने ‘जय श्रीराम’ के नारे लगाए।


क्या है ‘छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक-2026’?

यह विधेयक राज्य में अवैध मतांतरण पर रोक लगाने के उद्देश्य से लाया गया है, जो पुराने Chhattisgarh Freedom of Religion Act 1968 की जगह लेगा।

इस कानून में स्पष्ट किया गया है कि बलपूर्वक, लालच देकर, धोखाधड़ी से या किसी भी प्रकार के दबाव में कराए गए धर्मांतरण को अपराध माना जाएगा।


आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान

नए कानून में सजा को लेकर बेहद कड़े प्रावधान किए गए हैं:

  • सामान्य मामलों में: 7 से 10 साल की जेल + न्यूनतम ₹5 लाख जुर्माना

  • विशेष श्रेणी (महिला, नाबालिग, SC/ST, OBC): 10 से 20 साल की जेल + ₹10 लाख जुर्माना

  • सामूहिक धर्मांतरण: 10 साल से लेकर आजीवन कारावास + ₹25 लाख जुर्माना

इससे साफ है कि सरकार ने अवैध धर्मांतरण के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाई है।


डिजिटल माध्यम से प्रलोभन भी अपराध

विधेयक की खास बात यह है कि अब केवल ऑफलाइन ही नहीं, बल्कि ऑनलाइन या डिजिटल माध्यमों से दिए जाने वाले प्रलोभन को भी अपराध की श्रेणी में रखा गया है।

इसके साथ ही इन सभी अपराधों को संज्ञेय और गैर-जमानती बना दिया गया है, जिससे पुलिस सीधे कार्रवाई कर सकेगी।


धर्म परिवर्तन के लिए तय की गई प्रक्रिया

यदि कोई व्यक्ति स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करना चाहता है, तो उसे निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा:

  • सक्षम प्राधिकारी के पास आवेदन देना होगा

  • जानकारी वेबसाइट, ग्राम पंचायत और थाने में सार्वजनिक होगी

  • 30 दिन के भीतर आपत्ति और जांच की प्रक्रिया

  • गवाहों से पूछताछ और शपथ पत्र लिया जाएगा

  • 90 दिन के भीतर प्रक्रिया पूरी न होने पर आवेदन स्वतः निरस्त


धर्म परिवर्तन के उद्देश्य से विवाह होगा अमान्य

विधेयक में यह भी प्रावधान किया गया है कि यदि किसी विवाह का उद्देश्य केवल धर्म परिवर्तन है, तो उसे अवैध घोषित किया जा सकता है।

अंतरधार्मिक विवाह कराने वाले धर्मगुरुओं को विवाह से 8 दिन पहले सक्षम प्राधिकारी को जानकारी देनी होगी।


विशेष अदालतों का गठन

इन मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए हर जिले में विशेष सत्र न्यायालय बनाए जाएंगे, ताकि पीड़ितों को जल्दी न्याय मिल सके और मामलों का तेजी से निपटारा हो।


विधानसभा में हंगामा, विपक्ष का वॉकआउट

इस विधेयक को Vijay Sharma ने सदन में पेश किया। इस दौरान नेता प्रतिपक्ष Charan Das Mahant ने इसका विरोध करते हुए कहा कि ऐसे कानून पहले से सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हैं, इसलिए इसे जल्दबाजी में पारित नहीं किया जाना चाहिए।

उन्होंने इसे प्रवर समिति को भेजने की मांग की, लेकिन सरकार ने इसे खारिज कर दिया। इसके बाद विपक्ष ने सदन से बहिष्कार कर दिया।


सरकार का पक्ष: संविधान के तहत अधिकार

सरकार की ओर से कहा गया कि संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत राज्य को सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए ऐसे कानून बनाने का अधिकार है।

सरकार का दावा है कि यह विधेयक व्यापक विचार-विमर्श के बाद तैयार किया गया है और इसका उद्देश्य धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा करना है।


राजनीतिक और सामाजिक असर

इस कानून के पास होने के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। जहां एक ओर सत्तापक्ष इसे ऐतिहासिक और आवश्यक कदम बता रहा है, वहीं विपक्ष इसे जल्दबाजी में लिया गया फैसला बता रहा है।


आम जनता के लिए क्या मायने?

यह कानून सीधे तौर पर समाज में धार्मिक स्वतंत्रता और सुरक्षा से जुड़ा है। सरकार का दावा है कि इससे अवैध धर्मांतरण पर रोक लगेगी, वहीं आलोचक इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता के नजरिए से भी देख रहे हैं।

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Sarthak Bohidar
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