CG Breaking: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित CGPSC भर्ती घोटाले की जांच में एक बार फिर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। केंद्रीय जांच एजेंसी CBI ने बुधवार तड़के भिलाई के सेक्टर-10 स्थित रिटायर्ड आईएएस अधिकारी और CGPSC के पूर्व सचिव Jeevan Kishore Dhruv (जेके ध्रुव) के आवास पर जांच कार्रवाई शुरू की। जांच टीम सुबह करीब दो बजे दो वाहनों में पहुंची और सुरक्षा व्यवस्था के बीच दस्तावेजों एवं अन्य रिकॉर्ड की जांच में जुट गई।
हालांकि समाचार लिखे जाने तक CBI, EOW या ED की ओर से इस कार्रवाई को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया था, लेकिन इस छापेमारी को भर्ती घोटाले की जांच में एक महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है।
क्या है पूरा CGPSC भर्ती घोटाला?
CGPSC भर्ती घोटाला वर्ष 2020 से 2022 के बीच आयोजित राज्य सेवा परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक और चयन प्रक्रिया में पक्षपात के आरोपों से जुड़ा हुआ है। मामला उस समय सुर्खियों में आया जब CGPSC 2021 परीक्षा की अंतिम चयन सूची जारी होने के बाद टॉप रैंक हासिल करने वाले कई अभ्यर्थियों के संबंध प्रभावशाली अधिकारियों और राजनीतिक परिवारों से जुड़े पाए गए।
आरोप है कि तत्कालीन CGPSC अध्यक्ष Taman Singh Sonwani ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए रिश्तेदारों और करीबी लोगों को लाभ पहुंचाने की साजिश रची। जांच एजेंसियों के अनुसार, प्रश्नपत्रों की गोपनीयता भंग कर कुछ चुनिंदा अभ्यर्थियों तक जानकारी पहुंचाई गई, जिससे भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हुए।
जांच में सामने आए गंभीर आरोप
CBI जांच में यह दावा किया गया कि तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक Aarti Vasanik और तत्कालीन डिप्टी परीक्षा नियंत्रक Lalit Ganvir की कथित मिलीभगत से प्रश्नपत्रों को लीक किया गया।
जांच में यह भी सामने आया कि कोलकाता की एक प्रिंटिंग कंपनी से रायपुर लाए गए प्रश्नपत्रों की कथित रूप से गोपनीय प्रतियां तैयार की गईं और उन्हें कुछ प्रभावशाली व्यक्तियों तक पहुंचाया गया। आरोपों के अनुसार इसके बदले आर्थिक लेन-देन भी हुआ, जिसकी जांच विभिन्न एजेंसियां कर रही हैं।
मामले के उजागर होने के बाद चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठे और बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने विरोध प्रदर्शन भी किया था।
घोटाले की प्रमुख टाइमलाइन
जनवरी 2021: प्रश्नपत्रों के कथित लीक होने से जुड़ी घटनाओं की शुरुआत।
13 फरवरी 2022: CGPSC 2021 प्रारंभिक परीक्षा आयोजित हुई।
26 से 29 मई 2022: मुख्य परीक्षा का आयोजन किया गया।
11 मई 2023: अंतिम चयन सूची जारी होने के बाद विवाद शुरू हुआ।
2024-2025: मामले की जांच CBI को सौंपी गई और कई महत्वपूर्ण गिरफ्तारियां हुईं।
जून 2026: जांच के सिलसिले में पूर्व अधिकारियों से जुड़े स्थानों पर कार्रवाई जारी है।
अब तक कौन-कौन हुए गिरफ्तार?
CBI इस मामले में आयोग के पूर्व पदाधिकारियों, चयनित अभ्यर्थियों और कथित लाभार्थियों समेत कई लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है।
गिरफ्तार किए गए प्रमुख आरोपियों में पूर्व अध्यक्ष Taman Singh Sonwani, उद्योगपति Shravan Kumar Goyal, पूर्व डिप्टी परीक्षा नियंत्रक Lalit Ganvir, पूर्व सचिव Jeevan Kishore Dhruv, पूर्व परीक्षा नियंत्रक Aarti Vasanik सहित कई चयनित अभ्यर्थियों के नाम शामिल हैं।
जांच एजेंसियों का दावा है कि भर्ती प्रक्रिया में प्रभावशाली लोगों के रिश्तेदारों को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए सुनियोजित तरीके से नियमों का उल्लंघन किया गया।
क्यों महत्वपूर्ण मानी जा रही है यह कार्रवाई?
भिलाई स्थित जेके ध्रुव के आवास पर हुई ताजा कार्रवाई को जांच के अगले चरण का हिस्सा माना जा रहा है। जांच एजेंसियां भर्ती प्रक्रिया, चयन सूची, प्रश्नपत्र प्रबंधन और कथित वित्तीय लेन-देन से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल कर रही हैं।
छत्तीसगढ़ की हर अपडेट के लिए हमारे WhatsApp चैनल को फॉलो करें- https://whatsapp.com/channel/0029VbBj50DATRSgaSxCmo2v