Bilaspur News: मानसून से पहले थमा सड़क निर्माण, डामर के दाम दोगुने होने से 50 करोड़ के प्रोजेक्ट रुके

Bilaspur News: मानसून की दस्तक से पहले शहर की सड़कों को दुरुस्त करने की योजना पर डामर संकट भारी पड़ता नजर आ रहा है। डामर की कीमतों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी और आपूर्ति में कमी के कारण शहर में करोड़ों रुपये की सड़क परियोजनाएं अधर में लटक गई हैं। स्थिति यह है कि कई प्रमुख मार्गों पर निर्माण कार्य पूरी तरह रुक चुका है, जबकि बारिश शुरू होने से पहले इन्हें पूरा करना जरूरी माना जा रहा था।

40 हजार से बढ़कर 93 हजार रुपये प्रति टन पहुंची कीमत

जानकारी के अनुसार, कुछ समय पहले तक डामर की कीमत करीब 40 हजार रुपये प्रति मीट्रिक टन थी, जो अब बढ़कर 93 हजार रुपये प्रति मीट्रिक टन तक पहुंच गई है। लागत में इस भारी बढ़ोतरी के चलते ठेकेदारों ने मौजूदा दरों पर काम करना घाटे का सौदा बताया है और अतिरिक्त भुगतान की मांग की है।

ठेकेदारों का कहना है कि स्वीकृत टेंडर पुराने रेट पर हुए थे, जबकि अब डामर की कीमत लगभग ढाई गुना तक बढ़ चुकी है। ऐसे में निर्माण कार्य जारी रखना आर्थिक रूप से संभव नहीं है।

50 करोड़ से अधिक की परियोजनाएं प्रभावित

पीडब्ल्यूडी, नगर निगम और स्मार्ट सिटी परियोजनाओं के तहत शहर में 50 करोड़ रुपये से अधिक की सड़क निर्माण योजनाएं स्वीकृत हैं। वित्तीय मंजूरी होने के बावजूद अधिकांश परियोजनाओं पर काम ठप पड़ा हुआ है।

प्रमुख प्रभावित सड़कें

  • नेहरू चौक से दर्रीघाट मार्ग – लगभग 32 करोड़ रुपये की लागत वाली सड़क परियोजना का डामरीकरण रुक गया है।
  • 27 खोली अग्रसेन चौक से पुराना बस स्टैंड मार्ग – डिवाइडर निर्माण पूरा हो चुका है, लेकिन सड़क निर्माण शुरू नहीं हो पाया।
  • चांटीडीह-अपोलो-मोपका मार्ग – निर्माण लगभग पूरा होने के बाद भी डामर नहीं मिलने से अंतिम कार्य अटका हुआ है।
  • राजकिशोर नगर से मोपका मार्ग – पिचिंग कार्य पूर्ण, लेकिन डामरीकरण शुरू नहीं हो सका।

मानसून से बढ़ी चिंता

जून का आधा महीना बीत चुका है और मौसम विभाग मानसून की सक्रियता के संकेत दे रहा है। यदि बारिश से पहले गड्ढों की मरम्मत और डामरीकरण नहीं हुआ तो कई सड़कें और अधिक क्षतिग्रस्त हो सकती हैं। इससे यातायात प्रभावित होने के साथ लोगों को आवागमन में गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

युद्ध और कच्चे तेल की कीमतों का असर

निर्माण एजेंसियों का दावा है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और वैश्विक तनाव के कारण डामर की उपलब्धता प्रभावित हुई है। इसका सीधा असर सड़क निर्माण परियोजनाओं पर पड़ रहा है।

शासन ने री-टेंडर की घोषणा की

ठेकेदारों की मांग के बाद राज्य सरकार ने कायाकल्प योजना के तहत री-टेंडर प्रक्रिया की घोषणा की है। हालांकि अभी तक स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी नहीं होने से परियोजनाएं आगे नहीं बढ़ पा रही हैं।

पीडब्ल्यूडी ठेकेदार संघ के जिला अध्यक्ष Saurabh Mishra के अनुसार, डामर की कीमत दोगुने से अधिक हो चुकी है और बाजार में इसकी उपलब्धता भी सीमित है। स्पष्ट गाइडलाइन और डामर की आपूर्ति सुनिश्चित होने के बाद ही निर्माण कार्य दोबारा शुरू हो सकेगा। छत्तीसगढ़ की हर अपडेट के लिए हमारे WhatsApp चैनल को फॉलो करें- https://whatsapp.com/channel/0029VbBj50DATRSgaSxCmo2v