Bilaspur News: बिलासपुर में लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी (लोसपा) के संस्थापक और समाजवादी चिंतक रघु ठाकुर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और मौजूदा जन आंदोलनों को लेकर कई महत्वपूर्ण टिप्पणियां कीं। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जल्दबाजी में हैं और उम्मीद है कि वे देश को गैरजरूरी सवालों में नहीं उलझाएंगे। ठाकुर ने शिक्षा और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को प्राथमिकता देने की बात कही। उन्होंने जन आंदोलनों में गाली-गलौज की भाषा, विदेशी प्रभाव और आंदोलन के तौर-तरीकों पर भी सवाल उठाए।
राहुल गांधी को दी गैरजरूरी सवालों से बचने की नसीहत
रघु ठाकुर ने कहा कि राहुल गांधी जल्दी में हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि राहुल गांधी देश को ऐसे सवालों की ओर नहीं ले जाएंगे, जिनकी जरूरत नहीं है। उनके मुताबिक फिलहाल शिक्षा और बेरोजगारी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा का अच्छा माहौल बना हुआ है और इन मुद्दों पर गंभीरता से बात होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि देश के सामने कई वास्तविक समस्याएं हैं, इसलिए राजनीतिक विमर्श को उन्हीं मुद्दों पर केंद्रित किया जाना चाहिए जिनका सीधा संबंध आम लोगों से है।
जन आंदोलनों में विदेशी प्रभाव पर उठाए सवाल
जन आंदोलनों की मौजूदा स्थिति पर ठाकुर ने कहा कि आज आंदोलनों के एजेंडे पर विदेशी प्रभाव और पूंजीवाद हावी होता जा रहा है। उन्होंने जन आंदोलनों और सार्वजनिक विमर्श में विदेशी सहयोग तथा नैरेटिव के प्रभाव को लेकर चिंता जताई।
उन्होंने दावा किया कि कई आंदोलन स्वतःस्फूर्त होने के बजाय प्रायोजित नजर आते हैं। उनके अनुसार ऐसे आंदोलनों के लक्ष्य सीमित होते हैं और इससे व्यवस्था में व्यापक बदलाव की संभावना कम हो जाती है।
ठाकुर ने कांग्रेस का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह कांग्रेस अंग्रेजों के दौर में भारत में बनी थी, उसी तरह आज ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ अमेरिका में पैदा हुई है। उन्होंने मौजूदा आंदोलनों के स्वरूप पर सवाल उठाते हुए कहा कि जन आंदोलन जनता के अपने साधनों से चलने वाले और व्यापक बदलाव की दिशा में काम करने वाले होने चाहिए।
गांधी, लोहिया और जेपी का दिया उदाहरण
रघु ठाकुर ने आंदोलनों की भाषा को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री या किसी अन्य व्यक्ति को गाली देना अथवा अपशब्दों का इस्तेमाल जन आंदोलन का हिस्सा नहीं होना चाहिए।
उन्होंने अपने पिता का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने महात्मा गांधी के साथ आंदोलन किया और लाठियां खाईं, लेकिन गालियां नहीं दीं। ठाकुर ने कहा कि उन्होंने डॉ. राममनोहर लोहिया के साथ काम किया और लोकनायक जयप्रकाश नारायण के आंदोलन में जेल भी गए, लेकिन किसी को गाली नहीं दी।
उनके मुताबिक गाली में भी हिंसा का भाव होता है और लोकतांत्रिक आंदोलन की भाषा तार्किक, संयमित और मर्यादित होनी चाहिए।
बताए जन आंदोलन के पांच मूल तत्व
ठाकुर ने किसी भी वास्तविक जन आंदोलन के लिए पांच बुनियादी तत्व बताए। उनके अनुसार आंदोलन स्वतःस्फूर्त होना चाहिए और विदेशी फंडिंग या कॉर्पोरेट के बजाय जनता के अपने संसाधनों से चलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य केवल तत्काल लाभ हासिल करना नहीं, बल्कि व्यवस्था में बदलाव लाना होना चाहिए। आंदोलन में गाली-गलौज, पथराव और तोड़फोड़ जैसी हिंसा के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए। इसके साथ ही आंदोलन की अभिव्यक्ति तार्किक, संयमित और लोकतांत्रिक होनी चाहिए।
‘जेन-जी’ और ‘अल्फा’ शब्दों पर आपत्ति
ठाकुर ने मीडिया से अपील की कि ‘जेन-जी’ और ‘अल्फा’ जैसे शब्दों के बजाय स्कूल के छात्र और कॉलेज के छात्र जैसे सामान्य शब्दों का इस्तेमाल किया जाए।
उन्होंने हाल के एक छात्र आंदोलन का उदाहरण देते हुए कहा कि स्कूल के छात्रों ने आंदोलन किया और अपनी बात तर्क के साथ रखी। उनके मुताबिक आंदोलन के दौरान गाली-गलौज नहीं हुई और छात्रों ने लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांग सामने रखी।
बोले- देश के हालात चिंताजनक
रघु ठाकुर ने देश की स्थिति को चिंताजनक बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं और सरकारें अपने संवैधानिक दायित्वों को पूरी तरह नहीं निभा रही हैं।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकारों का दायित्व है कि वे जनता की बात संवेदनशीलता से सुनें और समस्याओं का समाधान करें। सरकार और जनता के बीच संवाद टूटना लोकतंत्र के लिए चिंता की बात है।
‘13 साल में प्रधानमंत्री ने नहीं की पत्रकार वार्ता’
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर ठाकुर ने कहा कि वे ऐसे पहले प्रधानमंत्री हैं, जिन्होंने 13 साल में कोई पत्रकार वार्ता नहीं की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में पत्रकारों को सवाल पूछने और सत्ता से जवाब मांगने का अधिकार होना चाहिए।
ठाकुर ने कहा कि यदि प्रधानमंत्री केवल यह मानें कि उन्होंने बोल दिया और पत्रकारों का काम उसे प्रकाशित करना है, तो सवाल पूछने की स्वतंत्रता खत्म हो जाएगी। उनके मुताबिक लोकतंत्र में हर व्यक्ति को सत्ता से सवाल पूछने का अधिकार होना चाहिए और सत्ता को उसका जवाब देना अपना दायित्व समझना चाहिए।
विपक्ष को भी संस्थाओं का सम्मान करना चाहिए
विपक्ष की भूमिका पर ठाकुर ने कहा कि विपक्ष को भी लोकतांत्रिक परंपराओं का पालन करना चाहिए, क्योंकि उसे भविष्य में सत्ता में आने का अवसर मिल सकता है।
उन्होंने कहा कि सरकार को जनता के साथ संवाद करना चाहिए और विपक्ष को संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान करना चाहिए। संस्थाओं में काम करने वाले व्यक्तियों से मतभेद या संघर्ष हो सकता है, लेकिन इसके बावजूद संस्थाओं की गरिमा बनी रहनी चाहिए।
नीट मामले को लेकर केंद्र पर निशाना
ठाकुर ने कहा कि केंद्र सरकार तब चेती, जब उसे गालियां सुननी पड़ीं। उन्होंने नीट पेपर लीक मामले का उल्लेख करते हुए सवाल किया कि जब बच्चों से जुड़ी गंभीर घटनाएं सामने आई थीं, तब सरकार के स्तर पर संवाद पहले क्यों नहीं किया गया।
उन्होंने कहा कि विपक्ष ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की थी। उनके मुताबिक अगर उस समय ही मांग मान ली जाती तो स्थिति इतनी खराब नहीं होती।
आंदोलन में गाली देने को बताया गलत
ठाकुर ने कहा कि आंदोलन के दौरान बच्चों द्वारा गाली देना गलत था और ऐसा नहीं होना चाहिए था। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इसके बाद माहौल में बदलाव देखने को मिला।
उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की साख को लेकर भी चिंता जताई। ठाकुर के मुताबिक संसद और सरकार से भरोसा उठने के बाद लोगों की उम्मीद अदालत से रहती है। ऐसे में संवैधानिक संस्थाओं के प्रति सम्मान बनाए रखना जरूरी है।
‘भाजपा के लोग भी कहते हैं, सरकार नहीं है’
ठाकुर ने दावा किया कि भाजपा से जुड़े कुछ लोग जब उनसे मिलते हैं तो कहते हैं कि सरकार नहीं है और वे भी दुखी हैं। उन्होंने कहा कि संविधान में कोई दोष नहीं है, बल्कि समस्या नियुक्त व्यक्तियों और उन्हें नियुक्त करने वालों में हो सकती है।
उन्होंने लोकतंत्र को स्वमर्यादा की व्यवस्था बताते हुए कहा कि जनता अच्छे प्रतिनिधियों को चुनेगी तो स्वमर्यादित लोग सामने आएंगे।
महाराष्ट्र में हिंदी भाषियों पर जताई चिंता
महाराष्ट्र के हालात पर भी रघु ठाकुर ने टिप्पणी की। उन्होंने वहां हिंदी भाषियों के साथ कथित मारपीट को दुर्भाग्यपूर्ण बताया।
उन्होंने कहा कि केंद्र में भाजपा सरकार बनने से पहले से ‘हिंदी, हिंदू, हिंदुस्तान’ जैसे नारे दिए जाते रहे हैं, लेकिन आज महाराष्ट्र में हिंदी बोलने वालों के साथ मारपीट की घटनाएं सामने आ रही हैं। ठाकुर ने सवाल उठाया कि अगर हिंदी नहीं रहेगी तो हिंदुस्तान रहेगा या नहीं, इस पर विचार किया जाना चाहिए।
तीन भाषा फॉर्मूले पर भी सवाल
नई शिक्षा नीति के तीन भाषा फॉर्मूले का जिक्र करते हुए ठाकुर ने कहा कि इसे लागू किए जाने पर काफी तारीफ हुई थी। लेकिन राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे के विरोध के बाद सरकार ने इसे वापस ले लिया।
उन्होंने सवाल किया कि क्या हिंदी भारतीय भाषा नहीं है। ठाकुर ने भाषा नीति को लेकर भी सरकार और राजनीतिक दलों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि भारतीय भाषाओं को लेकर स्पष्ट दृष्टिकोण जरूरी है। छत्तीसगढ़ की हर अपडेट के लिए हमारे WhatsApp चैनल को फॉलो करें- https://whatsapp.com/channel/0029VbBj50DATRSgaSxCmo2v




