नई दिल्ली | राष्ट्रीय आंदोलन
Bharat Bandh LIVE: केंद्र सरकार की कथित ‘एंटी-वर्कर’ नीतियों और नए लेबर कोड के विरोध में केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच ने 12 फरवरी 2026 को राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान किया। यूनियनों का दावा है कि करीब 30 करोड़ श्रमिकों को इस ‘जनरल स्ट्राइक’ के लिए संगठित किया गया है। गुरुवार सुबह से कई राज्यों में प्रदर्शन, रैलियां और जुलूस देखने को मिले, हालांकि कुछ शहरों में बाजार और व्यावसायिक गतिविधियां सामान्य रहीं।
ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC) की महासचिव अमरजीत कौर ने कहा कि देशभर में सुबह से हड़ताल शुरू हो चुकी है और असम, तमिलनाडु, पुदुचेरी, केरल, ओडिशा और बिहार सहित कई राज्यों से आंदोलन की रिपोर्ट मिली है। यूनियनों का कहना है कि यह विरोध “एंटी-वर्कर, एंटी-फार्मर और प्रो-कॉरपोरेट नीतियों” के खिलाफ है।
लेबर कोड के खिलाफ मुख्य आपत्ति
संयुक्त मंच का आरोप है कि चार नए श्रम संहिताएं (लेबर कोड) श्रमिकों की नौकरी सुरक्षा को कमजोर करती हैं, कानूनी संरक्षण घटाती हैं और नियोक्ताओं को नियुक्ति व छंटनी में अधिक स्वतंत्रता देती हैं।
झारखंड में बैंक ऑफ इंडिया कर्मचारी संघ के राज्य उप महासचिव उमेश दास ने बताया कि बैंकिंग, बीमा और कोयला क्षेत्रों में हड़ताल का असर देखने को मिला। राज्य कांग्रेस महासचिव राकेश सिन्हा ने आरोप लगाया कि नए लेबर कोड से श्रमिक अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। वहीं CPI(ML)L के राज्य सचिव मनोज भक्त ने इसे “कार्यकारी वर्ग के अधिकारों पर सीधा हमला” बताया।
कर्नाटक में ट्रेड यूनियनों और किसान संगठनों ने भी चारों लेबर कोड को वापस लेने की मांग दोहराई। सीटू (CITU) के राज्य सचिव महेश पत्तर ने कहा कि ये कोड हड़ताल के अधिकार को सीमित करते हैं और सामाजिक सुरक्षा प्रावधानों को कमजोर करते हैं।
केरल में जनजीवन प्रभावित
केरल के कन्नूर और कासरगोड जिलों में 24 घंटे की हड़ताल के कारण सामान्य जनजीवन लगभग ठप रहा। यूनियनों ने रेलवे स्टेशन तक विरोध मार्च निकाला और केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ नारेबाजी की। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार सार्वजनिक परिवहन और कुछ व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर असर पड़ा।
यूनियन नेताओं ने रोजगार गारंटी योजना को कमजोर करने के आरोप भी लगाए और कहा कि श्रमिकों के हितों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
मध्य प्रदेश में प्रतीकात्मक विरोध
मध्य प्रदेश में रक्षा प्रतिष्ठानों से जुड़े 25,000 से अधिक असैनिक कर्मचारियों ने हड़ताल के समर्थन में एक घंटे देरी से ड्यूटी जॉइन की। ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन (AIDEF) के अध्यक्ष एस.एन. पाठक ने बताया कि रक्षा उत्पादन आवश्यक सेवाओं की श्रेणी में आता है, इसलिए पूर्ण हड़ताल संभव नहीं थी।
कर्मचारियों ने सुबह 8 बजे के बजाय 9 बजे कार्य शुरू कर विरोध दर्ज कराया। कई स्थानों पर कर्मचारियों ने नारेबाजी और प्रदर्शन भी किए।
कुछ शहरों में असर सीमित
गुजरात के अहमदाबाद सहित कुछ शहरों में बाजारों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर हड़ताल का असर सीमित रहा। स्थानीय व्यापार संगठनों के प्रतिनिधियों ने कहा कि अधिकांश कर्मचारी और व्यापारी सामान्य रूप से काम पर पहुंचे।
इससे यह संकेत मिलता है कि हड़ताल का प्रभाव राज्यों और क्षेत्रों के अनुसार अलग-अलग रहा।
विपक्ष का समर्थन, सरकार की प्रतिक्रिया प्रतीक्षित
झारखंड और अन्य राज्यों में वामपंथी दलों तथा कांग्रेस ने हड़ताल को समर्थन दिया है। यूनियनों का आरोप है कि केंद्र सरकार की नीतियां कॉरपोरेट हितों को प्राथमिकता देती हैं और श्रमिकों व किसानों के हितों की अनदेखी करती हैं।
हालांकि, केंद्र सरकार की ओर से इस हड़ताल पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। पूर्व में सरकार का कहना रहा है कि नए लेबर कोड श्रम कानूनों को सरल और एकीकृत करने के उद्देश्य से लाए गए हैं।
आगे की रणनीति पर नजर
ट्रेड यूनियन नेताओं ने संकेत दिया है कि यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया, तो भविष्य में आंदोलन को और तेज किया जा सकता है। श्रमिक संगठनों का कहना है कि यह हड़ताल केवल विरोध नहीं, बल्कि श्रमिक अधिकारों की रक्षा का व्यापक अभियान है।
देशव्यापी इस ‘भारत बंद’ का वास्तविक प्रभाव आने वाले घंटों में और स्पष्ट होगा, खासकर परिवहन, बैंकिंग और औद्योगिक उत्पादन क्षेत्रों में।
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