Thursday, February 5, 2026
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MP Breaking News: मध्य प्रदेश में कफ सिरप से बढ़ी बच्चों की मौतें: संख्या पहुंची 18, विपक्ष ने की ‘बुलडोजर कार्रवाई’ की मांग

MP Breaking News। मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में बच्चों की रहस्यमयी मौतों ने अब एक बड़ा स्वास्थ्य घोटाला का रूप ले लिया है। कोल्डरिफ (Coldrif) नामक कफ सिरप पीने से मरने वाले बच्चों की संख्या बढ़कर 18 हो गई है। ताज़ा मामले में छिंदवाड़ा के दो और बच्चे—तीन वर्षीय वेदांत काकुडिया और दो वर्षीय जयूषा यादववंशी—की नागपुर में इलाज के दौरान मौत हो गई। वहीं, 9 बच्चे अभी भी वेंटिलेटर पर हैं, जिनके गुर्दे फेल हो चुके हैं।

छिंदवाड़ा के एडीएम धीरेंद्र सिंह ने मौतों की पुष्टि की है और बताया कि जिले के पांच बच्चे अब भी गंभीर हालत में हैं। जांच रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि गुजरात में बनी दो और कफ सिरप—ReLife और Respifresh TR—में भी डाइथिलीन ग्लाइकॉल (Diethylene Glycol) की मात्रा खतरनाक स्तर पर पाई गई है। यह वही रासायनिक तत्व है जिसने कोल्डरिफ सिरप पीने वाले बच्चों की जान ली। अधिकारियों ने बताया कि इन दोनों सिरप पर तत्काल प्रतिबंध प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

सरकारी मानकों के अनुसार, किसी भी कफ सिरप में डाइथिलीन ग्लाइकॉल की मात्रा 0.1% से अधिक नहीं होनी चाहिए। लेकिन चार नमूने फेल हो गए, जिससे बच्चों में किडनी फेलियर और ब्रेन डैमेज का खतरा बढ़ गया।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने घोषणा की है कि सरकार छिंदवाड़ा और बैतूल के सभी प्रभावित बच्चों के इलाज का पूरा खर्च वहन करेगी। उन्होंने कहा, “नागपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेज, AIIMS नागपुर, कलर्स हॉस्पिटल, न्यू हेल्थ सिटी और गेटवे हॉस्पिटल में इलाज की व्यवस्था की गई है। प्रत्येक अस्पताल में मैजिस्ट्रेट और डॉक्टरों की टीम परिवारों की मदद के लिए मौजूद है।”


विपक्ष का हमला

विपक्ष के नेता उमंग सिंघार और कांग्रेस विधायक सोहनलाल बाल्मीकि ने सरकार पर गंभीर लापरवाही और भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए सिंघार ने कहा,
“पहले बच्चे की मौत के बाद हमारे पारासिया विधायक ने कलेक्टर से लेकर मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री तक को पत्र लिखा, लेकिन सरकार ने कुछ नहीं किया।”

उन्होंने सवाल उठाया,
“जब गरीबों के घर मामूली उल्लंघन पर बुलडोजर चलाया जाता है, तो इन बच्चों की मौत के जिम्मेदार स्वास्थ्य मंत्री के घर पर बुलडोजर क्यों नहीं चलेगा?

विधायक सोहनलाल बाल्मीकि ने भी तीखा हमला बोलते हुए कहा,
“सरकार दूसरों के घर गिरा देती है, लेकिन जब उसकी लापरवाही से बच्चों की मौत होती है, तो क्या तब भी बुलडोजर चलेगा?”

सिंघार ने आगे कहा कि सरकार ने प्रोटोकॉल के तहत 72 घंटे के भीतर कार्रवाई नहीं की। उन्होंने दावा किया कि “सरकार ने जांच में देरी की और कई बच्चों के शव दोबारा निकालकर जांच की, ताकि घोटाला छिपाया जा सके।”

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सोमवार को छिंदवाड़ा पहुंचकर प्रभावित परिवारों से मुलाकात की और 1 करोड़ रुपये मुआवजा तथा स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे की मांग की।


सरकार की सफाई

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने विपक्ष के आरोपों को “बेसिर-पैर की राजनीति” बताया। उन्होंने कहा,
“कांग्रेस को भोपाल गैस त्रासदी याद करनी चाहिए, जब उनके शासन में हजारों लोगों की मौत के जिम्मेदार यूनियन कार्बाइड के सीईओ वॉरेन एंडरसन को भागने दिया गया था।”

उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने अपने 41 साल के शासन में कभी संवेदनशीलता नहीं दिखाई। अब अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे राज्यभर में दवा कंपनियों की रैंडम जांच करें ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।


निचोड़

छिंदवाड़ा का यह मामला सिर्फ एक स्वास्थ्य त्रासदी नहीं, बल्कि प्रशासनिक विफलता और राजनीतिक जवाबदेही का प्रतीक बन गया है। 18 बच्चों की जान जा चुकी है, कई अस्पतालों में जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे हैं, और अब जनता पूछ रही है—“क्या बच्चों की जान से भी सस्ती है राजनीति?”

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