Raigarh News। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष के अवसर पर छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री और रायगढ़ विधायक ओपी चौधरी ने संघ की वैचारिक यात्रा और योगदान पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि आज से सौ वर्ष पूर्व विजयादशमी के दिन संघ का जो नन्हा बीज बोया गया था, वह आज वटवृक्ष बन चुका है।

संघर्षों के बावजूद राष्ट्र प्रथम की भावना
ओपी चौधरी ने कहा कि स्थापना से लेकर आज़ादी तक और फिर आज़ादी के बाद तक संघ ने अपने सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया। समय के साथ संघर्ष की पद्धति भले ही बदली हो लेकिन “राष्ट्र प्रथम” की भावना संघ की मूल पहचान रही है। आज यह संगठन लाखों स्वयंसेवकों की जीवनशैली और चरित्र निर्माण का आधार है।

शताब्दी वर्ष का गौरवपूर्ण क्षण
उन्होंने कहा कि यह सौभाग्य की बात है कि हम सभी संघ के शताब्दी वर्ष के साक्षी बन रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने इस अवसर को ऐतिहासिक बनाने के लिए विशेष डाक टिकट और स्मारक सिक्के जारी किए हैं। यह कदम आने वाली पीढ़ियों को संघ की विरासत और योगदान की याद दिलाएगा।
सेवा भावना की अमिट छाप
ओपी चौधरी ने कहा कि संघ का कार्य समाज की हर परत में देखने को मिलता है। चाहे शिक्षा हो, कृषि हो, महिला सशक्तिकरण हो, या फिर आदिवासी कल्याण — संघ ने हर क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास किया है। उन्होंने संघ को जीवनदायिनी नदी की तरह बताया, जो अपने बहाव से समाज को निरंतर पोषित करती रही है।

शाखाएं बनीं चरित्र निर्माण की पाठशाला
आज देशभर में 83 हजार शाखाएं सक्रिय रूप से संचालित हो रही हैं। चौधरी ने कहा कि इन शाखाओं की भूमि में बहने वाला पसीना स्वयंसेवकों को खरे सोने की तरह तपाकर मजबूत बनाता है। शाखाएं स्वयंसेवकों के लिए केवल अभ्यास का मंच नहीं बल्कि चरित्र निर्माण की पाठशाला हैं।

आज़ादी की लड़ाई और प्रतिबंधों का दौर
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि संघ का योगदान आज़ादी की लड़ाई में भी रहा। डॉक्टर हेडगेवार जी और उनके साथ अनेक स्वयंसेवकों ने स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भागीदारी की। कई बार संघ को प्रतिबंधों का सामना करना पड़ा, विचारधारा को दबाने की कोशिशें हुईं, लेकिन हर बार संघ और मजबूती के साथ खड़ा हुआ और राष्ट्र निर्माण की दिशा में अपने प्रयास जारी रखे।
सेवा परमो धर्म की भावना
“सेवा परमो धर्म” संघ का मूल मंत्र रहा है। ओपी चौधरी ने कहा कि जब भी देश पर संकट आया, संघ के स्वयंसेवकों ने अपनी जान की परवाह किए बिना समाज की सेवा की। चाहे प्राकृतिक आपदा हो, महामारी हो या कोई सामाजिक चुनौती, संघ के कार्यकर्ता हमेशा सबसे आगे खड़े होकर मानवता की मिसाल बने।

जुड़े आनुषांगिक संगठन
ओपी चौधरी ने संघ से जुड़े अनेक संगठनों का उल्लेख किया — जैसे वनवासी कल्याण आश्रम, एकल विद्यालय, विद्या भारती, सेवा भारती — जो शिक्षा, आदिवासी विकास, सामाजिक उत्थान और सेवा कार्यों में निरंतर जुटे हुए हैं। उन्होंने कहा कि इन संस्थानों का एक ही लक्ष्य है — व्यक्ति निर्माण के जरिए राष्ट्र निर्माण।
राष्ट्र प्रेम की भावना
अपने संबोधन के अंत में चौधरी ने कहा कि संघ ने सौ वर्षों की यात्रा में हर भारतीय के मन में राष्ट्र प्रेम की गहरी भावना जगाने में सफलता पाई है। यही कारण है कि आज संघ केवल एक संगठन नहीं, बल्कि एक विचारधारा, एक जीवन दर्शन और राष्ट्र सेवा की प्रेरणा बन चुका है।
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