Raigarh News: विगत दिनों पकड़े गए अंतरराज्यीय लकड़ी तस्करी गिरोह की जांच अब आगे बढ़ रही है। पुलिस की पूछताछ और जांच में गिरोह के काम करने के तरीके तथा लकड़ी की तस्करी से जुड़े नेटवर्क को लेकर कई अहम जानकारियां सामने आने की बात कही जा रही है। पुलिस अब केवल जब्त लकड़ी और आरोपियों तक सीमित जांच के बजाय पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।
पुलिस के अनुसार, जांच में तस्करी के लिए संगठित तरीके से काम किए जाने के संकेत मिले हैं। इसी आधार पर मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 111 भी जोड़ी गई है। पुलिस की जांच में सरसीवा निवासी मनीष अग्रवाल को गिरोह का मुख्य आरोपी बताया गया है। उसके साथ रायगढ़ निवासी रोहित मित्तल और सलाउद्दीन खान भी मामले में आरोपी हैं।
रायगढ़ में पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ के बाद पुलिस इस पूरे नेटवर्क की एंड-टू-एंड जांच कर रही है। पुलिस के मुताबिक, गिरोह में अलग-अलग स्तर पर अलग-अलग लोगों की भूमिका होने की जानकारी सामने आई है। जंगलों में पेड़ों की कटाई से लेकर लकड़ी को बाहर निकालने, गोदाम तक पहुंचाने, उसकी प्रोसेसिंग और दूसरे राज्यों में भेजने तक की व्यवस्था कथित तौर पर अलग-अलग स्तर पर संचालित की जाती थी।
जांच के अनुसार, गिरोह का एक समूह मजदूरों के जरिए जंगलों में पेड़ों की कटाई करवाता था। इसके बाद दूसरे लोगों के जरिए रात के समय लकड़ियों को जंगल से निकालकर निर्धारित गोदामों तक पहुंचाया जाता था। गोदाम में लकड़ियों की प्रोसेसिंग किए जाने के बाद उन्हें आगे भेजने की व्यवस्था की जाती थी।
पुलिस को जांच के दौरान यह भी जानकारी मिली है कि लकड़ी को दूसरे राज्यों तक पहुंचाने के लिए कथित तौर पर फर्जी ट्रांजिट परमिट (TP) का इस्तेमाल किया जाता था। इन दस्तावेजों के माध्यम से लकड़ी के परिवहन को वैध दिखाकर उसे अलग-अलग रास्तों से राज्य के बाहर भेजे जाने की बात सामने आई है।
पुलिस के अनुसार छत्तीसगढ़ से निकलने वाली लकड़ियों को मध्य प्रदेश के रास्ते उत्तर प्रदेश, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश तक पहुंचाए जाने की जानकारी मिली है। जांच में गिरोह की महंगी खैर और तेंदू की लकड़ियों में विशेष रुचि होने की बात भी सामने आई है। हालांकि लकड़ी की वास्तविक मात्रा, स्रोत और पूरे परिवहन नेटवर्क की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
अब पुलिस उन गोदामों और फैक्ट्रियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है, जहां कथित तौर पर तस्करी की लकड़ी को खपाया या प्रोसेस किया जाता था। इसके साथ ही परिवहन व्यवस्था से जुड़े लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि लकड़ी को जंगल से गोदाम और फिर दूसरे राज्यों तक पहुंचाने में कौन-कौन लोग शामिल थे।
जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू कथित फर्जी दस्तावेजों की व्यवस्था से जुड़ा है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि ट्रांजिट परमिट से संबंधित दस्तावेज किस स्तर पर तैयार या उपलब्ध कराए जाते थे और इस प्रक्रिया में किन लोगों की भूमिका थी। इसके अलावा प्रोसेसिंग और परिवहन से जुड़े नेटवर्क की भी जानकारी जुटाई जा रही है।
पुलिस अब इस मामले में पैसों के लेन-देन की कड़ियों की भी जांच कर रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि लकड़ी की तस्करी से प्राप्त कथित रकम कहां से आई, किन माध्यमों से उसका लेन-देन हुआ और उसे कहां निवेश या छिपाया गया। पुलिस के सामने इस नेटवर्क से जुड़े आर्थिक लेन-देन की पूरी जानकारी जुटाना भी अहम चुनौती है।
पुलिस मुख्य आरोपी मनीष अग्रवाल को रिमांड पर लेकर पूछताछ करने की तैयारी में है। रिमांड के दौरान उससे तस्करी के नेटवर्क, लकड़ी के स्रोत, गोदामों, परिवहन व्यवस्था, कथित फर्जी दस्तावेजों और पैसों के लेन-देन से जुड़े बिंदुओं पर पूछताछ की जा सकती है।
फिलहाल पुलिस तीनों आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर मामले की परत-दर-परत जांच कर रही है। जांच आगे बढ़ने के साथ लकड़ी तस्करी से जुड़े अन्य लोगों, गोदामों, फैक्ट्रियों, परिवहन व्यवस्था और आर्थिक नेटवर्क के संबंध में और जानकारी सामने आने की संभावना है।
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