Shri Krishna Janmashtami: कोतवाली के कारागार में होगा कृष्ण जन्म, जैतूसाव मठ में 11 क्विंटल मालपुए का भोग.. पढ़े पूरी खबर

Shri Krishna Janmashtami: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर शुक्रवार 4 सितंबर को राजधानी रायपुर समेत प्रदेशभर के मंदिरों में भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की धूम रहेगी। जन्माष्टमी को लेकर शहर के प्रमुख मंदिरों को रंग-बिरंगी रोशनी और फूलों से सजाया गया है। अलग-अलग मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, अभिषेक, भजन-कीर्तन, झांकी और भोग की तैयारियां की गई हैं। मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के साथ मंदिरों में विशेष आरती और धार्मिक कार्यक्रम होंगे।

जन्माष्टमी के अवसर पर रायपुर के अलग-अलग मंदिरों में इस बार कई विशेष आयोजन किए जा रहे हैं। पुरानी बस्ती स्थित श्री जैतूसाव मठ में भगवान को 11 क्विंटल मालपुए और एक क्विंटल पंजीरी का भोग लगाया जाएगा। समता कॉलोनी के राधाकृष्ण मंदिर में 101 लीटर दूध से भगवान श्रीकृष्ण का अभिषेक किया गया। वहीं टाटीबंध स्थित इस्कॉन मंदिर में तीन दिवसीय जन्माष्टमी महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें विभिन्न प्रतियोगिताओं के साथ भजन-कीर्तन, महाभिषेक और छप्पन भोग जैसे आयोजन होंगे।

रायपुर के श्याम मंदिर और गौरी शंकर मंदिर में रात 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाएगा। मंदिरों में सुबह से ही अलग-अलग झांकियां सजाई जा रही हैं। इन झांकियों के दो दिन तक दर्शन कराए जाएंगे। ग्रामीण क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के रायपुर पहुंचने की संभावना है। जन्मोत्सव के अगले दिन शहर के अलग-अलग स्थानों पर भंडारे भी आयोजित किए जाएंगे।

पुरानी बस्ती स्थित श्री जैतूसाव मठ में जन्माष्टमी को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। 4 सितंबर की शाम 4 बजे से भजन संध्या का आयोजन होगा। जन्मोत्सव के अवसर पर ठाकुरजी का स्वर्ण श्रृंगार किया जाएगा। रात 12 बजे मंत्रोच्चार के साथ आरती होगी। भगवान को 11 क्विंटल मालपुआ और एक क्विंटल पंजीरी का भोग लगाया जाएगा। इसके बाद 5 सितंबर की शाम 5 बजे से श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद वितरण किया जाएगा।

दूधाधारी मठ और इससे जुड़े मठ-मंदिरों में जन्माष्टमी का उत्सव 7 सितंबर तक चलेगा। 4 सितंबर की सुबह 8 बजे से भजन-कीर्तन शुरू हो चुके हैं। मध्यरात्रि में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की आरती होगी। इसके बाद 7 सितंबर को एकादशी के दिन रात 12 बजे आयोजन का समापन किया जाएगा।

समता कॉलोनी स्थित राधाकृष्ण मंदिर में जन्माष्टमी के अवसर पर सुबह 7 बजे भगवान श्रीकृष्ण का 101 लीटर दूध से अभिषेक किया गया। मंदिर और भगवान की प्रतिमा का विशेष श्रृंगार कोलकाता के कारीगरों द्वारा किया गया है। सुबह 9 बजे से श्रद्धालुओं के लिए झांकी दर्शन शुरू हो गए हैं। शाम 8 बजे से भजन और भक्तिमय कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। मध्यरात्रि में भगवान के जन्मोत्सव के बाद महाआरती होगी। 5 सितंबर को मंदिर में राणी सती दादी का मंगल पाठ आयोजित किया जाएगा।

इस बार सिटी कोतवाली थाने में भी श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का विशेष आयोजन किया जा रहा है। यहां कारागार में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का मंचन किया जाएगा। वासुदेव, देवकी और सैनिकों की वेशभूषा में कलाकार इस प्रसंग को प्रस्तुत करेंगे। रात 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय कुछ देर के लिए थाने की लाइट बंद की जाएगी।

आयोजन के दौरान श्रीकृष्ण जन्म से जुड़ा वह प्रसंग भी प्रस्तुत किया जाएगा, जिसमें वासुदेव नवजात श्रीकृष्ण को टोकरी में रखकर अपने सिर पर उठाते हुए कारागार से बाहर निकलते हैं। इसी दृश्य को कोतवाली में भी मंचित किया जाएगा। इसके बाद ठाकुरजी को जयकारे के साथ कोतवाली थाने से सदर बाजार स्थित गोपाल मंदिर ले जाया जाएगा।

पेठा लाइन नयापारा स्थित करीब 156 वर्ष पुराने श्री बांके बिहारी मंदिर में भी जन्माष्टमी पर विशेष धार्मिक आयोजन किए जा रहे हैं। यहां सुबह 8 बजे से 10 बजे तक दुग्धाभिषेक का आयोजन हो रहा है। इसके बाद सुबह 11:30 बजे श्रृंगार दर्शन होंगे। दोपहर और शाम को भजन कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। रात 12:01 बजे श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के बाद आरती होगी। मंदिर की स्थापना को करीब 156 वर्ष हो चुके हैं और जन्माष्टमी के अवसर पर यहां विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

टाटीबंध स्थित इस्कॉन मंदिर में 5 सितंबर तक जन्माष्टमी महा-महोत्सव चलेगा। आयोजन के दौरान भक्ति नृत्य सहित कई प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। कार्यक्रमों की शुरुआत मंगल आरती से होगी। इसके बाद कृष्ण बाललीला, भजन-कीर्तन, पुष्पांजलि और कथक की प्रस्तुतियां होंगी। रात 9 बजे महाभिषेक का आयोजन किया जाएगा। मध्यरात्रि में भगवान को छप्पन भोग अर्पित किया जाएगा और रात 12:15 बजे महाआरती होगी।

बूढ़ापारा स्थित गिरिराज मंदिर में भी जन्माष्टमी को लेकर विशेष तैयारी की गई है। यहां बद्रीनाथ, जगन्नाथपुरी, रामेश्वर और द्वारका धाम से लाई गई सामग्री से भगवान गिरिराज की पूजा-अर्चना की जाएगी। मंदिर में जन्माष्टमी के आयोजन की तैयारियां करीब एक महीने पहले से शुरू कर दी गई थीं।

सदर बाजार स्थित गोपाल मंदिर में भी 4 सितंबर की रात 12 बजे श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाया जाएगा। मध्यरात्रि में भगवान के जन्म के बाद पूजा-अर्चना और आरती होगी। इसके अगले दिन 5 सितंबर को नंद महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान भगवान को पालने में झुलाया जाएगा और श्रद्धालु भजन गाकर श्रीकृष्ण जन्म की खुशियां मनाएंगे।

जन्माष्टमी के अवसर पर शहर के विभिन्न मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू हो गई है। मंदिरों में झांकियों और विशेष सजावट के साथ रात में होने वाले जन्मोत्सव की तैयारियां भी पूरी कर ली गई हैं। मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के साथ मंदिरों में जयकारे, पूजा-अर्चना, आरती और प्रसाद वितरण का सिलसिला शुरू होगा। अलग-अलग मंदिरों में निर्धारित कार्यक्रमों के अनुसार जन्माष्टमी का उत्सव मनाया जाएगा। छत्तीसगढ़ की हर अपडेट के लिए हमारे WhatsApp चैनल को फॉलो करें- https://whatsapp.com/channel/0029VbBj50DATRSgaSxCmo2v