CG News: जल संरक्षण में छत्तीसगढ़ देश में नंबर-1, पांच जिले टॉप-10 में; कोरिया का 5% मॉडल बना मिसाल

CG News: छत्तीसगढ़ ने जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। जल शक्ति मंत्रालय के ‘जल संचय जन भागीदारी’ अभियान के तीसरे चरण JSJB 3.0 में राज्य ने देश में पहला स्थान प्राप्त किया है। खास बात यह है कि छत्तीसगढ़ के पांच जिले भी जल संरक्षण के क्षेत्र में देश के टॉप-10 जिलों में शामिल हुए हैं। नई दिल्ली में आयोजित जल शक्ति मंत्रालय के विभागीय शिखर सम्मेलन में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राज्य में जल संरक्षण के लिए किए जा रहे नवाचारों और जनभागीदारी आधारित प्रयासों की जानकारी साझा की।

JSJB 3.0 में छत्तीसगढ़ अव्वल

‘जल संचय जन भागीदारी’ अभियान के तीसरे चरण में छत्तीसगढ़ ने देश में प्रथम स्थान हासिल किया है। राज्य में इस चरण के तहत 79 हजार 775 जल संरचनाएं दर्ज की गई हैं, जिनमें से 77 हजार 719 संरचनाओं का कार्य पूरा हो चुका है।

इस उपलब्धि से पहले भी राज्य ने अभियान के दोनों चरणों में बेहतर प्रदर्शन किया था। JSJB 1.0 में छत्तीसगढ़ में 4 लाख 5 हजार 561 जल संरचनाएं बनाई गई थीं और राज्य देश में दूसरे स्थान पर रहा था।

JSJB 2.0 में प्रदेश में 24 लाख 7 हजार 456 जल संरचनाएं दर्ज की गईं। इनमें से 23 लाख 7 हजार 768 संरचनाओं का कार्य पूरा हो चुका है। इस चरण में भी छत्तीसगढ़ ने देश में दूसरा स्थान हासिल किया था।

मुख्यमंत्री साय ने जनभागीदारी पर दिया जोर

नई दिल्ली के सुषमा स्वराज भवन में आयोजित सम्मेलन में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ ने जल संरक्षण को केवल सरकारी योजनाओं और जल संरचनाओं के निर्माण तक सीमित नहीं रखा है।

किसानों, ग्राम पंचायतों, जल सखियों, जल मित्रों और स्थानीय समुदायों को अभियान से जोड़कर इसे व्यापक जनअभियान का रूप दिया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वे किसान परिवार से आते हैं और खेती में पानी के महत्व को करीब से समझते हैं।

उनके अनुसार, किसान के लिए पानी केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं है, बल्कि फसल, परिवार, आजीविका और भविष्य से जुड़ा विषय है। इसी सोच के साथ प्रदेश में जल संरक्षण की योजनाओं के केंद्र में किसान और गांव को रखा गया है।

कोरिया का 5 प्रतिशत मॉडल खास

मुख्यमंत्री साय ने सम्मेलन में कोरिया जिले से शुरू हुए ‘5 प्रतिशत मॉडल’ का विशेष उल्लेख किया। यह मॉडल जल संरक्षण में किसानों की स्वैच्छिक भागीदारी का उदाहरण है।

इस पहल के तहत किसान अपनी कृषि भूमि का लगभग 5 प्रतिशत हिस्सा भू-जल पुनर्भरण और वर्षा जल संचयन के लिए स्वेच्छा से उपलब्ध करा रहे हैं। इस हिस्से में ऐसी जल संरचनाएं विकसित की जा रही हैं, जिनसे बारिश का पानी खेत से बहकर बाहर जाने के बजाय वहीं रोका जा सके और धीरे-धीरे जमीन के भीतर पहुंच सके।

इस मॉडल में किसान केवल योजना के लाभार्थी नहीं हैं, बल्कि जल संरक्षण की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार हैं। किसान जमीन उपलब्ध करा रहे हैं, जबकि पंचायतों और स्थानीय समुदायों के साथ विभिन्न विभाग और योजनाएं मिलकर संरचनाओं के निर्माण में सहयोग कर रहे हैं।

जियो-टैगिंग और मॉनिटरिंग पर जोर

जल संरक्षण की संरचनाओं की जियो-टैगिंग, नियमित मॉनिटरिंग और प्रगति की समीक्षा को भी अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है।

गांवों में जल सखी, जल मित्र, किसान और पंचायत प्रतिनिधि जल संरक्षण के प्रयासों को आगे बढ़ा रहे हैं। खेत में बारिश का पानी रोकने से भू-जल पुनर्भरण को बढ़ावा मिलने के साथ सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता बेहतर होने की संभावना है।

लंबे समय में ऐसे प्रयास खेती की वर्षा पर निर्भरता कम करने और स्थानीय स्तर पर जल सुरक्षा मजबूत करने में मदद कर सकते हैं।

छत्तीसगढ़ के पांच जिले टॉप-10 में

राज्य की उपलब्धि के साथ छत्तीसगढ़ के पांच जिलों ने भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी जगह बनाई है। सूरजपुर, महासमुंद, बालोद, बलौदाबाजार-भाटापारा और कबीरधाम जल संरक्षण के क्षेत्र में देश के शीर्ष 10 जिलों में शामिल हुए हैं।

इन जिलों में गांव और पंचायत स्तर पर वर्षा जल संचयन और भू-जल पुनर्भरण से जुड़े कार्यों को स्थानीय समुदायों से जोड़ा गया है। स्थानीय परिस्थितियों और जरूरतों के अनुसार जल संरचनाओं के निर्माण के साथ लोगों की भागीदारी पर जोर दिया गया है।

मुख्यमंत्री साय ने इस उपलब्धि को शासन की योजनाओं और समाज की सक्रिय भागीदारी का परिणाम बताया।

पानी की कमी वाले ब्लॉक हुए कम

राज्य में जल संरक्षण के प्रयासों के बीच पानी की कमी वाले ब्लॉकों की संख्या भी 26 से घटकर 19 रह गई है। इसके अलावा पांच क्रिटिकल ब्लॉकों के सामान्य श्रेणी में आने का अनुमान जताया गया है।

भू-जल की स्थिति सुधारने के लिए राज्य में जल संचयन संरचनाओं के निर्माण के साथ पुराने जल स्रोतों के संरक्षण, भू-जल पुनर्भरण, जल संरचनाओं की मैपिंग और स्थानीय स्तर पर निगरानी पर जोर दिया जा रहा है।

‘जहां जल गिरे, वहीं सहेजें’ पर फोकस

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘कैच द रेन—जहां जल गिरे, वहीं सहेजें’ संदेश को छत्तीसगढ़ में स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार लागू किया जा रहा है।

प्रदेश की भौगोलिक विविधता को देखते हुए अलग-अलग क्षेत्रों में आवश्यकता और जल उपलब्धता के अनुसार जल संचयन और भू-जल पुनर्भरण की संरचनाएं विकसित की जा रही हैं।

राज्य का प्रयास है कि बारिश के पानी को अधिक से अधिक गांव और खेत की सीमा के भीतर रोका जाए। इससे भू-जल पुनर्भरण के साथ सिंचाई और पेयजल जैसी स्थानीय जरूरतों के लिए पानी की उपलब्धता बेहतर हो सकती है।

मुख्यमंत्री ने दिए कई सुझाव

मुख्यमंत्री साय ने सम्मेलन में जल संरक्षण अभियान को और प्रभावी बनाने के लिए सुझाव भी दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक राज्य को अपनी भौगोलिक परिस्थितियों, वर्षा के स्वरूप, भू-जल स्थिति और स्थानीय जरूरतों के अनुसार अलग ‘कैच द रेन प्लान’ तैयार करना चाहिए।

उन्होंने बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों को प्रोत्साहित करने के लिए ‘स्टेट वाटर अवार्ड्स’ शुरू करने का सुझाव दिया। इसके अलावा BISAG-N के माध्यम से जल संरचनाओं की मैपिंग को मजबूत करने और अभियान की प्रगति की मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हर तीन महीने में समीक्षा करने की बात कही।

मुख्यमंत्री के अनुसार तकनीक, नियमित मॉनिटरिंग और जनभागीदारी के समन्वय से जल संरक्षण के प्रयासों को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।

खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को लाभ

देश में 31 मई 2027 तक दो करोड़ नई जल संरचनाओं के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। ऐसे में छत्तीसगढ़ का जनभागीदारी आधारित मॉडल राष्ट्रीय जल संरक्षण अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

बारिश का पानी खेतों और गांवों में रोककर उसे जमीन में पहुंचाने से भू-जल स्तर में सुधार और सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ने की संभावना है। इससे खेती की मानसून पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।

जल उपलब्धता बेहतर होने से कृषि और ग्रामीण आजीविका को भी मजबूती मिल सकती है। वहीं पेयजल स्रोतों की स्थिति में सुधार होने से ग्रामीण परिवारों को भी लाभ मिलने की संभावना है।

जल संरक्षण को जनभागीदारी से नई दिशा

छत्तीसगढ़ की यह उपलब्धि जल संरक्षण को केवल सरकारी योजनाओं तक सीमित रखने के बजाय किसानों, पंचायतों और स्थानीय समुदायों को इससे जोड़ने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को सामने रखती है।

JSJB 3.0 में देश में पहला स्थान और पांच जिलों का टॉप-10 में शामिल होना राज्य के जल संरक्षण अभियान की महत्वपूर्ण उपलब्धि है। अब चुनौती इन संरचनाओं के प्रभावी रखरखाव और लंबे समय तक उनके परिणामों को बनाए रखने की होगी। छत्तीसगढ़ की हर अपडेट के लिए हमारे WhatsApp चैनल को फॉलो करें- https://whatsapp.com/channel/0029VbBj50DATRSgaSxCmo2v