Raigarh News: जिले की प्रमुख कोयला खदानों और पावर प्लांट क्षेत्रों को ‘संरक्षित क्षेत्र’ घोषित किए जाने के जिला प्रशासन के फैसले को लेकर कांग्रेस ने विरोध तेज कर दिया है। जिला कांग्रेस कमेटी (ग्रामीण) के अध्यक्ष नगेंद्र नेगी ने प्रशासन के इस आदेश पर कड़ा एतराज जताते हुए इसे लोकतंत्र और आम जनता के अधिकारों पर हमला बताया है। उन्होंने कहा है कि यदि संबंधित आदेश वापस नहीं लिया गया तो कांग्रेस की ओर से बड़े स्तर पर जनआंदोलन किया जाएगा।
नगेंद्र नेगी ने जिले के तलाईपल्ली एनटीपीसी, अडानी पावर के छोटेभंडार-बड़ेभंडार, जिंदल पावर तमनार और एसईसीएल छाल जैसे क्षेत्रों को ‘संरक्षित क्षेत्र’ घोषित किए जाने को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। कांग्रेस जिला अध्यक्ष का कहना है कि इन क्षेत्रों में आम लोगों के धरना-प्रदर्शन और वीडियोग्राफी पर रोक लगाने का निर्णय ग्रामीणों और किसानों की आवाज को प्रभावित करने वाला है। उन्होंने इसे अलोकतांत्रिक और असंवैधानिक बताते हुए आदेश को वापस लेने की मांग की है।
कांग्रेस जिला अध्यक्ष नगेंद्र नेगी के अनुसार, छत्तीसगढ़ राज्य सुरक्षा अधिनियम, 1990 की आड़ में ग्रामीणों और किसानों की आवाज दबाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में आम लोगों को अपनी समस्याओं और मांगों को सामने रखने का अधिकार है। ऐसे में खदान और औद्योगिक क्षेत्रों में धरना-प्रदर्शन तथा वीडियोग्राफी पर रोक को लेकर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं।
नगेंद्र नेगी ने प्रशासन के आदेश को लेकर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि कांग्रेस ग्रामीणों और किसानों की आवाज को दबाने के किसी भी प्रयास का विरोध करेगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन की ओर से इस आदेश को वापस नहीं लिया जाता है तो पार्टी उग्र जनआंदोलन का रास्ता अपनाएगी। कांग्रेस ने इस मुद्दे को आम जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़ते हुए प्रशासन से आदेश पर पुनर्विचार करने की मांग की है।
‘संरक्षित क्षेत्र’ के आदेश के विरोध के साथ कांग्रेस नेताओं ने खनन प्रभावित क्षेत्रों में विकास और जनहित से जुड़े मुद्दों को भी उठाया है। जिला कांग्रेस कमेटी (ग्रामीण) के अध्यक्ष नगेंद्र नेगी ने जिला खनिज न्यास यानी डीएमएफ फंड के आवंटन और खर्च को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने खनन प्रभावित क्षेत्रों में करोड़ों रुपये के डीएमएफ फंड के आवंटन और उपयोग का पूरा हिसाब सार्वजनिक करने की मांग की है।
नगेंद्र नेगी ने डीएमएफ फंड को लेकर ‘श्वेत पत्र’ जारी करने की मांग की है। कांग्रेस की ओर से कहा गया है कि खनन प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को होने वाली परेशानियों और क्षेत्र की स्थिति को देखते हुए डीएमएफ फंड के आवंटन तथा खर्च की जानकारी सामने आनी चाहिए। कांग्रेस ने इस फंड के उपयोग को लेकर प्रशासन से स्पष्ट जानकारी देने की मांग की है।
कांग्रेस प्रवक्ता तारेन्द्र डनसेना ने भी जिले के औद्योगिक क्षेत्रों में स्थानीय युवाओं को रोजगार के मुद्दे को उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि औद्योगिक इकाइयों में स्थानीय युवाओं को स्थायी रोजगार नहीं मिल रहा है। उनके अनुसार जिले के प्राकृतिक संसाधनों से उद्योगपति मुनाफा कमा रहे हैं, जबकि स्थानीय युवाओं को स्थायी रोजगार के बजाय ठेका मजदूरी तक सीमित रखा जा रहा है।
तारेन्द्र डनसेना ने स्थानीय रोजगार के सवाल को खनन और औद्योगिक गतिविधियों से जोड़ते हुए कहा कि जिले के संसाधनों का उपयोग करने वाली औद्योगिक इकाइयों में स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सुनिश्चित किए जाने चाहिए। कांग्रेस ने स्थानीय युवाओं को स्थायी रोजगार देने की मांग को भी इस विरोध के प्रमुख मुद्दों में शामिल किया है।
कांग्रेस नेताओं ने जिले में प्रदूषण और सड़कों की खराब स्थिति का मुद्दा भी उठाया। तमनार, घरघोड़ा, छाल, पुसौर, खरसिया और धरमजयगढ़ क्षेत्रों में भारी वाहनों की आवाजाही के कारण सड़कों की स्थिति खराब होने का आरोप लगाया गया है। कांग्रेस का कहना है कि भारी वाहनों के कारण इन क्षेत्रों की सड़कों पर लगातार दबाव पड़ रहा है और कई स्थानों पर सड़कें जर्जर हो चुकी हैं।
प्रदूषण को लेकर भी कांग्रेस नेताओं ने चिंता जताई है। उनके अनुसार औद्योगिक और खनन गतिविधियों तथा भारी वाहनों की आवाजाही से प्रभावित क्षेत्रों में प्रदूषण बढ़ रहा है। कांग्रेस ने कहा है कि तमनार, घरघोड़ा, छाल, पुसौर, खरसिया और धरमजयगढ़ क्षेत्र के ग्रामीणों को सड़क और प्रदूषण से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
कांग्रेस नेताओं ने इन क्षेत्रों में ग्रामीण जीवन पर पड़ रहे प्रभाव का मुद्दा उठाते हुए जनहित से जुड़ी मांगों पर ठोस कार्रवाई की मांग की है। पार्टी का कहना है कि खनन और औद्योगिक गतिविधियों वाले क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीणों और किसानों की समस्याओं को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। सड़कों की खराब स्थिति और प्रदूषण को लेकर भी प्रशासन से कार्रवाई की अपेक्षा जताई गई है।
जिला कांग्रेस कमेटी (ग्रामीण) के अध्यक्ष नगेंद्र नेगी ने स्पष्ट किया है कि कांग्रेस इस आदेश का विरोध जारी रखेगी। उन्होंने कहा कि यदि ‘संरक्षित क्षेत्र’ का आदेश वापस नहीं लिया गया तो पार्टी किसानों और ग्रामीणों को साथ लेकर आंदोलन करेगी। कांग्रेस की ओर से इसे ग्रामीणों के अधिकारों और उनकी समस्याओं से जुड़े मुद्दे के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
कांग्रेस नेताओं ने प्रशासन से मांग की है कि तलाईपल्ली एनटीपीसी, अडानी पावर के छोटेभंडार-बड़ेभंडार, जिंदल पावर तमनार और एसईसीएल छाल जैसे क्षेत्रों में लागू किए गए आदेश की समीक्षा की जाए। आम लोगों के धरना-प्रदर्शन और वीडियोग्राफी पर रोक को लेकर कांग्रेस ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों के खिलाफ बताया है और आदेश को वापस लेने की मांग दोहराई है।
डीएमएफ फंड को लेकर भी कांग्रेस ने पारदर्शिता की मांग की है। नगेंद्र नेगी ने करोड़ों रुपये के फंड के आवंटन और खर्च का विवरण सार्वजनिक करने तथा इस संबंध में श्वेत पत्र जारी करने की मांग की है। कांग्रेस के अनुसार खनन प्रभावित क्षेत्रों में विकास और जनहित से जुड़े कार्यों में डीएमएफ फंड की भूमिका महत्वपूर्ण है, इसलिए इसके उपयोग की जानकारी सामने आनी चाहिए।
स्थानीय रोजगार के मुद्दे पर कांग्रेस प्रवक्ता तारेन्द्र डनसेना ने औद्योगिक इकाइयों में स्थानीय युवाओं को स्थायी रोजगार दिए जाने की मांग उठाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय लोगों को संसाधनों के बावजूद रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं मिल रहे हैं और उन्हें ठेका मजदूरी तक सीमित रखा जा रहा है।
सड़क और प्रदूषण के मुद्दे को लेकर भी कांग्रेस ने प्रशासन का ध्यान प्रभावित क्षेत्रों की ओर आकर्षित किया है। तमनार, घरघोड़ा, छाल, पुसौर, खरसिया और धरमजयगढ़ में भारी वाहनों के कारण सड़कें खराब होने तथा प्रदूषण बढ़ने का आरोप लगाया गया है। कांग्रेस नेताओं ने कहा है कि इन समस्याओं का असर ग्रामीणों के जीवन पर पड़ रहा है और इन पर ठोस कार्रवाई की आवश्यकता है।
कांग्रेस ने कहा है कि यदि प्रशासन की ओर से ‘संरक्षित क्षेत्र’ के आदेश को वापस नहीं लिया गया और जनहित से जुड़ी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो पार्टी किसानों और ग्रामीणों के साथ सड़कों पर उतरेगी। जिला कांग्रेस कमेटी (ग्रामीण) के अध्यक्ष नगेंद्र नेगी ने बड़े जनआंदोलन की चेतावनी देते हुए प्रशासन से आदेश वापस लेने की मांग की है।
इस पूरे मामले में कांग्रेस ने ‘संरक्षित क्षेत्र’ के आदेश, लोकतांत्रिक अधिकारों, डीएमएफ फंड के उपयोग, स्थानीय रोजगार, प्रदूषण और जर्जर सड़कों को प्रमुख मुद्दों के रूप में उठाया है। पार्टी नेताओं ने इन विषयों पर प्रशासन से कार्रवाई की मांग की है और चेतावनी दी है कि मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में किसानों और ग्रामीणों को साथ लेकर आंदोलन किया जाएगा।