Raigarh News: रायगढ़ की हीरामती यादव ने ड्रिप सिंचाई से बदली खेती की तस्वीर, कम पानी में बढ़ी पैदावार और आमदनी

Raigarh News: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में संचालित कृषि एवं उद्यानिकी विकास योजनाओं का लाभ लेकर रायगढ़ जिले की ग्रामीण महिलाएं आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। ग्राम जुनवानी की हीरामती यादव ने ड्रिप सिंचाई प्रणाली अपनाकर अपनी खेती को अधिक आसान और व्यवस्थित बनाया है। पहले सिंचाई के पर्याप्त साधन नहीं होने के कारण उन्हें पानी की कमी, अधिक श्रम और अतिरिक्त लागत जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता था। अब ड्रिप सिस्टम के जरिए पानी सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंच रहा है, जिससे सिंचाई का श्रम और लागत कम होने के साथ साग-सब्जियों की गुणवत्ता और उत्पादन में भी सुधार हुआ है।

देविका महिला स्व-सहायता समूह से जुड़ी हीरामती यादव के लिए आधुनिक सिंचाई तकनीक खेती में बदलाव का माध्यम बनी है। अब वह अकेले ही अपने खेत की देखभाल कर पा रही हैं और बेहतर सिंचाई व्यवस्था के कारण खेती पहले की तुलना में अधिक व्यवस्थित हो गई है।

पानी की कमी से थी बड़ी परेशानी

हीरामती यादव पहले से साग-सब्जियों की खेती करती थीं। खेती के लिए पर्याप्त सिंचाई सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें पानी की कमी से जूझना पड़ता था।

सिंचाई के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती थी और पानी की व्यवस्था में अतिरिक्त श्रम के साथ लागत भी बढ़ जाती थी। सीमित संसाधनों के कारण खेती को व्यवस्थित तरीके से संचालित करना उनके लिए चुनौतीपूर्ण था।

पानी की उपलब्धता खेती के उत्पादन और फसल की गुणवत्ता को भी प्रभावित करती थी। ऐसे में सिंचाई की समस्या का समाधान उनके लिए खेती को बेहतर बनाने की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण जरूरत थी।

ड्रिप सिंचाई ने बदली व्यवस्था

कृषि एवं उद्यानिकी विकास योजनाओं के तहत हीरामती यादव को ड्रिप सिंचाई प्रणाली मिली। इसके बाद उनके खेत में सिंचाई की पूरी व्यवस्था में बदलाव आया।

ड्रिप सिस्टम के माध्यम से पानी सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचाया जाता है। इससे खेत में पानी का अधिक प्रभावी उपयोग संभव हुआ और अनावश्यक पानी की बर्बादी कम हुई।

हीरामती के लिए इसका सबसे बड़ा लाभ यह रहा कि अब उन्हें सिंचाई के लिए पहले की तरह अतिरिक्त मेहनत नहीं करनी पड़ती। खेती का काम अधिक व्यवस्थित होने के कारण वह अकेले भी खेत की देखभाल कर पा रही हैं।

कम पानी में बेहतर खेती

ड्रिप सिंचाई का इस्तेमाल होने के बाद पानी के बेहतर प्रबंधन ने हीरामती की खेती को अधिक सुविधाजनक बनाया है। पौधों की जरूरत के अनुसार पानी सीधे जड़ों तक पहुंचने से सिंचाई व्यवस्था अधिक प्रभावी हुई।

इससे पानी की उपलब्धता का बेहतर उपयोग करने में मदद मिल रही है। सीमित पानी के बावजूद साग-सब्जियों की खेती को व्यवस्थित तरीके से जारी रखना आसान हुआ है।

आधुनिक सिंचाई प्रणाली ने उनके खेत में खेती के काम को कम श्रम वाला बनाने में भी मदद की है। पहले जहां सिंचाई के लिए अधिक समय और मेहनत लगती थी, वहीं अब वही काम अपेक्षाकृत आसानी से हो जाता है।

उत्पादन और गुणवत्ता में सुधार

व्यवस्थित सिंचाई का असर फसल की गुणवत्ता और उत्पादन पर भी दिखाई दे रहा है। हीरामती के खेत में साग-सब्जियों की खेती पहले की तुलना में बेहतर तरीके से हो रही है।

पौधों तक पानी की नियमित और उचित आपूर्ति होने से फसल प्रबंधन में सुविधा हुई है। इसका सकारात्मक प्रभाव उत्पादन और खेत से होने वाली आमदनी पर पड़ा है।

खेती में लागत और श्रम कम होने तथा उत्पादन में सुधार आने से उनकी कृषि गतिविधि अधिक लाभकारी बनने की दिशा में आगे बढ़ी है।

अकेले संभाल लेती हैं पूरा खेत

ड्रिप सिंचाई से खेती में श्रम की जरूरत कम होने का सीधा लाभ हीरामती यादव को मिला है। अब वह अकेले अपने खेत की देखभाल कर लेती हैं।

उनके लिए यह बदलाव केवल सिंचाई की सुविधा तक सीमित नहीं है। खेत का काम व्यवस्थित होने से समय और श्रम दोनों की बचत हो रही है।

एक ग्रामीण महिला के लिए यह बदलाव आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा सकता है, क्योंकि वह उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करते हुए अपनी कृषि गतिविधियों को स्वयं संचालित कर पा रही हैं।

हीरामती ने सरकार का जताया आभार

ड्रिप सिंचाई से मिले लाभ को लेकर हीरामती यादव ने छत्तीसगढ़ी में अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि पहले पानी की भारी कमी रहती थी, लेकिन ड्रिप मशीन लगने के बाद खेती में काफी सुविधा हो गई है।

उन्होंने कहा कि अब खेती-बाड़ी अच्छे तरीके से हो जाती है, अधिक मेहनत नहीं करनी पड़ती और अकेले ही पूरा खेत संभल जाता है। उन्होंने आधुनिक सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के लिए सरकार और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त किया।

उनका अनुभव यह बताता है कि उपयुक्त तकनीक और सरकारी योजनाओं का लाभ ग्रामीण स्तर तक पहुंचने पर खेती करने वाले परिवारों की कार्यप्रणाली में व्यावहारिक बदलाव आ सकता है।

महिला समूह से आत्मनिर्भरता तक

हीरामती यादव देविका महिला स्व-सहायता समूह से भी जुड़ी हुई हैं। स्व-सहायता समूहों के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को सामूहिक गतिविधियों और आर्थिक अवसरों से जोड़ने का प्रयास किया जाता है।

कृषि गतिविधि के साथ आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल उनके लिए आय बढ़ाने और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक अतिरिक्त अवसर बना है।

हीरामती का उदाहरण यह भी दर्शाता है कि महिला स्व-सहायता समूह, कृषि तकनीक और सरकारी योजनाओं का संयोजन ग्रामीण महिलाओं के लिए आर्थिक गतिविधियों को मजबूत करने में उपयोगी हो सकता है।

आधुनिक तकनीक से घटा श्रम

खेती में सिंचाई एक ऐसा काम है जिसमें समय, पानी और श्रम तीनों की आवश्यकता होती है। ड्रिप सिंचाई प्रणाली ने हीरामती के खेत में इन संसाधनों के उपयोग को अधिक व्यवस्थित किया है।

पानी सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचने के कारण सिंचाई का काम आसान हुआ है। इससे उन्हें खेत में बार-बार अतिरिक्त श्रम लगाने की जरूरत कम हुई है।

कम श्रम और बेहतर जल प्रबंधन का फायदा खेती की कुल लागत पर भी पड़ा है। यही वजह है कि आधुनिक सिंचाई तकनीक ग्रामीण किसानों और महिला कृषकों के लिए उपयोगी विकल्प के रूप में सामने आ रही है। छत्तीसगढ़ की हर अपडेट के लिए हमारे WhatsApp चैनल को फॉलो करें- https://whatsapp.com/channel/0029VbBj50DATRSgaSxCmo2v