CG News: जस्टिस कृष्ण राम मोहपात्रा का CG हाईकोर्ट ट्रांसफर, कॉलेजियम ने की सिफारिश

CG News: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट को एक नए न्यायाधीश के मिलने का रास्ता साफ होता दिखाई दे रहा है। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने ओडिशा हाईकोर्ट के जस्टिस कृष्ण राम मोहपात्रा को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ट्रांसफर करने की सिफारिश की है। वहीं ओडिशा हाईकोर्ट के ही जस्टिस मानस रंजन पाठक को गुजरात हाईकोर्ट भेजने की अनुशंसा की गई है। दोनों स्थानांतरणों की सिफारिश सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की 6 अगस्त 2026 को हुई बैठक में की गई। हालांकि, कॉलेजियम की सिफारिश के बाद आगे की संवैधानिक और प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होना बाकी है।

ओडिशा से छत्तीसगढ़ आएंगे जस्टिस मोहपात्रा

कॉलेजियम की सिफारिश के अनुसार जस्टिस कृष्ण राम मोहपात्रा का स्थानांतरण ओडिशा हाईकोर्ट से छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट किया जाना है। यह बदलाव छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि उनके आने से न्यायालय की न्यायिक क्षमता में एक और अनुभवी न्यायाधीश जुड़ेंगे।

जस्टिस मोहपात्रा लंबे समय से न्यायिक क्षेत्र से जुड़े हुए हैं। उन्हें 17 अप्रैल 2015 को ओडिशा हाईकोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। इससे पहले उन्होंने लंबे समय तक अधिवक्ता के रूप में कार्य किया और विभिन्न प्रकार के कानूनी मामलों में पैरवी की।

जस्टिस मानस रंजन पाठक का गुजरात ट्रांसफर

इसी कॉलेजियम बैठक में ओडिशा हाईकोर्ट के जस्टिस मानस रंजन पाठक के स्थानांतरण की भी सिफारिश की गई है। उन्हें गुजरात हाईकोर्ट भेजे जाने की अनुशंसा की गई है।

इस तरह कॉलेजियम की सिफारिश के तहत ओडिशा हाईकोर्ट के दो न्यायाधीश अलग-अलग हाईकोर्ट में न्यायिक जिम्मेदारी संभालेंगे। जस्टिस कृष्ण राम मोहपात्रा छत्तीसगढ़ और जस्टिस मानस रंजन पाठक गुजरात हाईकोर्ट जाएंगे।

1988 में शुरू किया था वकालत का सफर

जस्टिस कृष्ण राम मोहपात्रा का जन्म 18 अप्रैल 1965 को हुआ था। उन्होंने बीए और एलएलबी की शिक्षा हासिल की। इसके बाद 7 फरवरी 1988 को ओडिशा राज्य बार काउंसिल में अधिवक्ता के रूप में पंजीकरण कराया।

वकालत के दौरान उन्होंने सिविल, आपराधिक, सेवा और संवैधानिक मामलों सहित कानून के विभिन्न क्षेत्रों में काम किया। उनके लंबे कानूनी अनुभव में सरकारी विभागों और सार्वजनिक संस्थानों से जुड़े मामले भी शामिल रहे।

विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने ओडिशा सरकार और केंद्र सरकार से जुड़े कई मामलों में अधिवक्ता के रूप में पैरवी की। इसके अलावा कई सरकारी और सार्वजनिक संस्थानों के मामलों में भी उनका कानूनी अनुभव रहा है।

2015 में बने थे हाईकोर्ट जज

जस्टिस कृष्ण राम मोहपात्रा को 17 अप्रैल 2015 को ओडिशा हाईकोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। इसके बाद से उन्होंने ओडिशा हाईकोर्ट में न्यायिक जिम्मेदारियां संभाली हैं।

करीब तीन दशक से अधिक लंबे कानूनी और न्यायिक करियर के बाद अब उनका नाम छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के लिए प्रस्तावित किया गया है। कॉलेजियम की सिफारिश के बाद स्थानांतरण से जुड़ी आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

कई कानूनी क्षेत्रों में रहा अनुभव

जस्टिस मोहपात्रा को विभिन्न कानूनों और अलग-अलग प्रकृति के मामलों का अनुभव रहा है। उनके पेशेवर अनुभव में सिविल और आपराधिक मामलों के अलावा सेवा संबंधी विवाद तथा संवैधानिक मामलों की पैरवी भी शामिल रही है।

उन्होंने अभिभावक एवं आश्रित कानून, हिंदू अल्पसंख्यक एवं संरक्षकता, हिंदू दत्तक ग्रहण एवं भरण-पोषण तथा किशोर न्याय से जुड़े मामलों में भी काम किया है।

उनका अनुभव सरकारी संस्थाओं और सार्वजनिक क्षेत्र से जुड़े मामलों तक भी रहा है। यही वजह है कि छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में उनके आने को न्यायिक अनुभव की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

कई संस्थानों की कर चुके हैं पैरवी

वकालत के दौरान जस्टिस कृष्ण राम मोहपात्रा ने कई संस्थानों की ओर से कानूनी मामलों में पैरवी की। इनमें सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, क्योंझर, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग (NIOS), नीलाचल इस्पात निगम लिमिटेड और बैंक ऑफ बड़ौदा जैसे संस्थानों के मामले शामिल रहे।

उन्होंने ओडिशा सरकार और ओडिशा लोक सेवा आयोग के लिए भी अतिरिक्त स्थायी वकील के रूप में कार्य किया। इस अनुभव ने उन्हें प्रशासनिक, सेवा और संवैधानिक मामलों की व्यापक समझ प्रदान की।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के लिए क्यों अहम

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में न्यायिक कार्यभार और लंबित मामलों के बीच अनुभवी न्यायाधीश की नियुक्ति महत्वपूर्ण होती है। जस्टिस मोहपात्रा के स्थानांतरण की सिफारिश ऐसे समय में सामने आई है, जब हाईकोर्ट में न्यायिक पदों की उपलब्धता और कार्यभार लगातार महत्वपूर्ण विषय रहे हैं।

हालांकि, केवल कॉलेजियम की सिफारिश के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि वे तत्काल छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में कार्यभार संभाल लेंगे। स्थानांतरण की आगे की आधिकारिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही उनकी नई पदस्थापना प्रभावी होगी।

कॉलेजियम की सिफारिश के बाद क्या होगा

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश न्यायिक नियुक्ति और स्थानांतरण प्रक्रिया का महत्वपूर्ण चरण है। जस्टिस कृष्ण राम मोहपात्रा के मामले में भी आगे की संवैधानिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही उनका छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में स्थानांतरण प्रभावी होगा।

कॉलेजियम की 6 अगस्त 2026 की बैठक में की गई इस सिफारिश के बाद अब संबंधित स्तर पर आगे की कार्रवाई होगी। इसके बाद औपचारिक आदेश जारी होने पर उनके कार्यभार संभालने की स्थिति स्पष्ट होगी।

छत्तीसगढ़ न्यायिक व्यवस्था पर असर

यदि स्थानांतरण की प्रक्रिया पूरी होकर जस्टिस कृष्ण राम मोहपात्रा छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में कार्यभार संभालते हैं, तो इससे न्यायालय को एक अनुभवी न्यायाधीश का लाभ मिलेगा। उनके लंबे वकालत और न्यायिक अनुभव का उपयोग विभिन्न प्रकार के मामलों की सुनवाई में हो सकता है। छत्तीसगढ़ की हर अपडेट के लिए हमारे WhatsApp चैनल को फॉलो करें- https://whatsapp.com/channel/0029VbBj50DATRSgaSxCmo2v