CG News: राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ के पारंपरिक कोसा और हथकरघा उत्पादों को राष्ट्रीय और वैश्विक बाजार से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेश स्तरीय बुनकर सम्मेलन एवं स्वदेशी प्रदर्शनी में राज्य हथकरघा संघ के नए प्रीमियम ब्रांड ‘कोशल फैब’ का शुभारंभ किया। इस दौरान ब्रांड का लोगो, कैटलॉग और हथकरघा इन्वेंट्री मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर भी लॉन्च किया गया। सरकार का लक्ष्य पारंपरिक उत्पादों को आधुनिक मार्केटिंग और डिजाइन के साथ नए बाजारों तक पहुंचाना है।
कोशल फैब से बदलेगा बाजार
‘कोशल फैब’ को छत्तीसगढ़ के पारंपरिक हथकरघा उत्पादों के लिए एक प्रीमियम ब्रांड के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके जरिए प्रदेश के कोसा सिल्क सहित अन्य हथकरघा उत्पादों को व्यवस्थित तरीके से बाजार उपलब्ध कराने की कोशिश होगी।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि इस ब्रांड के माध्यम से छत्तीसगढ़ के पारंपरिक कोसा और अन्य हथकरघा उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर के साथ-साथ वैश्विक बाजार में भी नई पहचान मिल सकती है।
ब्रांड लॉन्च के साथ कैटलॉग जारी किया गया है, जिससे उत्पादों को आधुनिक तरीके से प्रस्तुत करने और संभावित खरीदारों तक पहुंच बढ़ाने में मदद मिलेगी।
पांच एयरपोर्ट पर होगा डिस्प्ले
छत्तीसगढ़ के स्थानीय उत्पादों को बड़े बाजार तक पहुंचाने के लिए देश के पांच प्रमुख हवाई अड्डों पर हैंडलूम और हस्तशिल्प उत्पादों के विशेष शोरूम स्थापित किए जा रहे हैं।
इन स्थानों पर छत्तीसगढ़ के हथकरघा उत्पादों को प्रदर्शित करने से राज्य के बुनकरों और कारीगरों को ऐसे ग्राहकों तक पहुंचने का अवसर मिलेगा, जो सामान्य स्थानीय बाजार से बाहर इन उत्पादों की तलाश करते हैं।
यह पहल खास तौर पर कोसा और पारंपरिक हस्तशिल्प उत्पादों की ब्रांडिंग को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
रायपुर में यूनिटी मॉल बनेगा बाजार
राजधानी रायपुर में निर्माणाधीन यूनिटी मॉल को भी स्थानीय उत्पादों के लिए आधुनिक विपणन मंच के रूप में विकसित किया जा रहा है।
इससे छत्तीसगढ़ के बुनकरों, कारीगरों और स्थानीय उत्पाद निर्माताओं को एक संगठित प्लेटफॉर्म मिलने की उम्मीद है। यहां आने वाले खरीदार सीधे प्रदेश की पारंपरिक कला और उत्पादों से जुड़ सकेंगे।
सरकार की कोशिश स्थानीय उत्पादों को केवल पारंपरिक बाजार तक सीमित रखने के बजाय उन्हें आधुनिक उपभोक्ता और व्यापक बाजार की जरूरतों के अनुरूप प्रस्तुत करने की है।
कोसा सिल्क की अलग पहचान
छत्तीसगढ़ का कोसा सिल्क अपनी गुणवत्ता, चमक और मजबूती के लिए जाना जाता है। प्रदेश में लंबे समय से कोसा वस्त्रों का इस्तेमाल पारंपरिक साड़ियों और एथनिक परिधानों में किया जाता रहा है।
अब कोसा उत्पादों में आधुनिक डिजाइन, नए रंग संयोजन और समकालीन पैटर्न को शामिल करने पर जोर दिया जा रहा है। इससे पारंपरिक कपड़े को बदलती फैशन जरूरतों के अनुरूप प्रस्तुत करने की कोशिश की जा रही है।
‘कोशल फैब’ के तहत कोसा से तैयार उत्पादों को केवल पारंपरिक परिधानों तक सीमित न रखकर आधुनिक उपयोग और फैशन से जोड़ने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।
कुर्ती से होम फर्निशिंग तक
आधुनिक बाजार की मांग को ध्यान में रखते हुए कोसा और हथकरघा उत्पादों में वैल्यू एडिशन पर जोर दिया जा रहा है। इसके तहत कुर्तियों, जैकेट्स, होम फर्निशिंग और अन्य आधुनिक परिधानों को बाजार के अनुरूप विकसित करने की योजना है।
इस तरह के उत्पाद पारंपरिक हथकरघा को नए ग्राहक वर्ग तक पहुंचाने में मदद कर सकते हैं। खासकर युवा उपभोक्ताओं के बीच आधुनिक डिजाइन वाले हैंडलूम उत्पादों की पहुंच बढ़ाने के लिए ब्रांडिंग और डिजाइन दोनों महत्वपूर्ण होंगे।
डिजिटल मैनेजमेंट से होगी निगरानी
‘कोशल फैब’ की लॉन्चिंग के साथ हथकरघा इन्वेंट्री मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर भी शुरू किया गया है। इससे उत्पादों की उपलब्धता और इन्वेंट्री से संबंधित प्रबंधन को अधिक व्यवस्थित करने में मदद मिल सकती है।
पारंपरिक हथकरघा क्षेत्र में उत्पादन, स्टॉक और बिक्री को बेहतर तरीके से मैनेज करना बाजार विस्तार के लिए महत्वपूर्ण है। डिजिटल सिस्टम के इस्तेमाल से उत्पादों की जानकारी और उपलब्धता को व्यवस्थित रखने की दिशा में कदम उठाया गया है।
बुनकरों को मिलेगा बड़ा बाजार
इस पहल का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य स्थानीय बुनकरों और कारीगरों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराना है। बेहतर ब्रांडिंग, आधुनिक डिजाइन और नए बिक्री केंद्रों के जरिए उनके उत्पादों को स्थानीय बाजार से बाहर ले जाने का प्रयास किया जा रहा है।
यदि ‘कोशल फैब’ के जरिए उत्पादों की मांग राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती है, तो इसका सीधा फायदा प्रदेश के हथकरघा क्षेत्र से जुड़े बुनकरों और कारीगरों को मिल सकता है।
हालांकि उपलब्ध जानकारी में बुनकरों की आय में कितनी वृद्धि होगी या कितने नए रोजगार सृजित होंगे, इसका कोई निश्चित आंकड़ा नहीं दिया गया है।
स्थानीय कला को मिलेगी नई पहचान
छत्तीसगढ़ की हथकरघा परंपरा को आधुनिक ब्रांडिंग से जोड़ने की यह पहल राज्य की स्थानीय कला और संस्कृति को नए बाजारों तक ले जाने का प्रयास है। ‘कोशल फैब’ के जरिए पारंपरिक कोसा को आधुनिक फैशन और बाजार की जरूरतों के साथ जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।
पांच एयरपोर्ट पर डिस्प्ले, रायपुर में यूनिटी मॉल और डिजिटल इन्वेंट्री सिस्टम जैसे कदम इस रणनीति को केवल उत्पाद निर्माण तक सीमित न रखकर मार्केटिंग और बिक्री के स्तर पर भी मजबूत करने की कोशिश दिखाते हैं। छत्तीसगढ़ की हर अपडेट के लिए हमारे WhatsApp चैनल को फॉलो करें- https://whatsapp.com/channel/0029VbBj50DATRSgaSxCmo2v




