Basna/Mahasamund News: महासमुंद जिले के बसना विकासखंड के छोटे से गांव चोरभट्टी के रहने वाले सीताराम सागर आज साहस, संघर्ष और देशसेवा का पर्याय बन चुके हैं। कभी आर्थिक तंगी के कारण पढ़ाई छोड़कर अपने पिता के साथ मजदूरी करने को मजबूर रहे सीताराम ने अपनी मेहनत, दृढ़ संकल्प और देशभक्ति के दम पर ऐसा मुकाम हासिल किया है, जो आज हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गया है। बस्तर के नक्सल प्रभावित इलाकों में उनकी बहादुरी और नेतृत्व क्षमता ने उन्हें पुलिस विभाग के सबसे जांबाज अधिकारियों में शामिल कर दिया है।
गरीबी से जंग लड़कर बनाया अपना रास्ता
सीताराम सागर का बचपन अभावों में बीता। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उन्हें पढ़ाई बीच में छोड़नी पड़ी। घर चलाने के लिए उन्होंने अपने पिता के साथ मजदूरी की, लेकिन कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपने सपनों को टूटने नहीं दिया।
देश सेवा का जज्बा उनके भीतर हमेशा जिंदा रहा। इसी जुनून ने उन्हें पुलिस भर्ती की तैयारी करने के लिए प्रेरित किया और वर्ष 2007 में उनका चयन नारायणपुर जिले में आरक्षक (कांस्टेबल) के रूप में हुआ।
इकलौते बेटे ने चुना सबसे कठिन रास्ता
सीताराम अपने माता-पिता के इकलौते पुत्र हैं, लेकिन उन्होंने सुरक्षित जीवन की बजाय देश सेवा का कठिन मार्ग चुना। बस्तर के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में तैनाती स्वीकार कर उन्होंने अपनी बहादुरी का परिचय दिया।
उनकी कार्यशैली, रणनीतिक क्षमता और साहस को देखते हुए उन्हें डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (DRG) में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गईं। डीआरजी कमांडर के रूप में उन्होंने कई बड़े नक्सल विरोधी अभियानों में अहम भूमिका निभाई।
बड़े ऑपरेशनों में निभाई अग्रिम भूमिका
सीताराम सागर ने बस्तर क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण अभियानों का नेतृत्व किया। चर्चित थुलथुली मुठभेड़, काकूर ऑपरेशन और शीर्ष नक्सली नेतृत्व के खिलाफ चलाए गए विशेष अभियानों में उन्होंने अग्रिम पंक्ति में रहकर अपनी जिम्मेदारी निभाई।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार उनकी रणनीतिक सोच और नेतृत्व क्षमता ने कई अभियानों को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
19 साल की सेवा, तीन बार मिला आउट ऑफ टर्न प्रमोशन
लगातार लगभग 19 वर्षों तक नक्सल प्रभावित इलाकों में सेवाएं देने वाले सीताराम सागर ने आरक्षक से इंस्पेक्टर तक का सफर तय किया। उनकी वीरता और उत्कृष्ट कार्यों को देखते हुए उन्हें तीन बार आउट ऑफ टर्न प्रमोशन दिया गया।
यह उपलब्धि पुलिस विभाग में बहुत कम अधिकारियों को प्राप्त होती है और उनकी असाधारण सेवाओं का प्रमाण मानी जाती है।
केंद्रीय गृह मंत्री दक्षता पदक से सम्मानित
हाल ही में उनकी उत्कृष्ट सेवाओं और साहसिक कार्यों के लिए उन्हें प्रतिष्ठित केंद्रीय गृह मंत्री दक्षता पदक से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनकी वर्षों की निष्ठा, समर्पण और राष्ट्र सेवा की पहचान माना जा रहा है।
इस उपलब्धि के बाद पूरे महासमुंद जिले और विशेष रूप से चोरभट्टी गांव में गर्व का माहौल है।
गांव के युवाओं के लिए बने प्रेरणा स्रोत
ग्रामीणों के अनुसार, इतनी बड़ी उपलब्धियां हासिल करने के बाद भी सीताराम सागर अपनी जड़ों से जुड़े हुए हैं। छुट्टियों में गांव पहुंचने पर वे युवाओं को सेना, पुलिस और अन्य सुरक्षा बलों में शामिल होकर देश सेवा करने के लिए प्रेरित करते हैं।
उनकी संघर्ष से सफलता तक की कहानी यह संदेश देती है कि संसाधनों की कमी सफलता की राह में बाधा नहीं बनती, यदि व्यक्ति के भीतर मेहनत, अनुशासन और लक्ष्य के प्रति समर्पण हो।




