Bharatmala Scam: छत्तीसगढ़ के चर्चित भारतमाला भूमि अधिग्रहण मुआवजा घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी जय प्रकाश गांधी को गिरफ्तार कर लिया है। जांच एजेंसी का दावा है कि रायपुर-विशाखापट्टनम आर्थिक कॉरिडोर परियोजना के लिए अधिग्रहित जमीन के मुआवजे में करोड़ों रुपये की अनियमितता की गई और नियमों का दुरुपयोग कर वास्तविक पात्रता से कई गुना अधिक राशि हासिल की गई।
ईडी के अनुसार, अभनपुर निवासी जय प्रकाश गांधी को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत 3 जून 2026 को गिरफ्तार किया गया। मामले को प्रदेश के सबसे बड़े भूमि मुआवजा घोटालों में से एक माना जा रहा है।
रायपुर-विशाखापट्टनम कॉरिडोर परियोजना से जुड़ा मामला
जांच एजेंसियों के मुताबिक यह पूरा मामला भारतमाला परियोजना के तहत रायपुर-विशाखापट्टनम आर्थिक कॉरिडोर के लिए भूमि अधिग्रहण के दौरान वितरित किए गए मुआवजे से जुड़ा है। इस मामले की शुरुआती जांच आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी।
जांच में कई संदिग्ध वित्तीय लेन-देन और भूमि रिकॉर्ड में कथित हेरफेर के संकेत मिले थे, जिसके बाद ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच शुरू की।
जमीन को टुकड़ों में बांटकर बढ़ाया गया मुआवजा
ईडी का आरोप है कि जय प्रकाश गांधी ने अपने परिजनों और कुछ लोक सेवकों के साथ मिलकर राष्ट्रीय राजमार्ग के प्रस्तावित एलाइनमेंट में आने वाली जमीन खरीदी थी। बाद में इस जमीन को कथित रूप से 500 वर्गमीटर से कम क्षेत्रफल वाले कई छोटे-छोटे भूखंडों में विभाजित कर दिया गया।
जांच एजेंसी का मानना है कि यह रणनीति विशेष मुआवजा नियमों का फायदा उठाने और अधिक भुगतान प्राप्त करने के उद्देश्य से अपनाई गई थी।
56 लाख की पात्रता, मिला 9.83 करोड़ का भुगतान
ईडी के अनुसार सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि जिस भूमि के लिए नियमानुसार लगभग 56.76 लाख रुपये का मुआवजा बनता था, उसके बदले जय प्रकाश गांधी और उनके परिवार को करीब 9.83 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया।
जांच एजेंसी का दावा है कि इस प्रक्रिया से लगभग 9.27 करोड़ रुपये की अवैध आय अर्जित की गई, जिसे "प्रोसीड्स ऑफ क्राइम" माना जा रहा है।
शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में लगाया पैसा
ईडी की जांच में यह भी सामने आया है कि कथित तौर पर प्राप्त की गई राशि को शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड और अन्य निवेश माध्यमों में लगाया गया। एजेंसी का आरोप है कि ऐसा धन के स्रोत को छिपाने और उसे वैध दिखाने के लिए किया गया।
इसी पहलू को लेकर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच को और विस्तार दिया जा रहा है।
अप्रैल में पड़े थे कई ठिकानों पर छापे
इस मामले में ईडी ने 28 अप्रैल 2026 को रायपुर, अभनपुर और धमतरी के विभिन्न ठिकानों पर एक साथ छापेमार कार्रवाई की थी। तलाशी के दौरान कई दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और कथित वित्तीय लेन-देन से जुड़े अहम साक्ष्य जब्त किए गए थे।
जांच एजेंसी का दावा है कि इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर आगे की कार्रवाई की गई।
तीन दिन की ईडी रिमांड मंजूर
गिरफ्तारी के बाद जय प्रकाश गांधी को रायपुर स्थित विशेष पीएमएलए न्यायालय में पेश किया गया। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को तीन दिन की ईडी रिमांड पर भेज दिया है।
इस दौरान जांच एजेंसी उनसे पूछताछ कर अन्य संदिग्ध लेन-देन और संभावित सहयोगियों की जानकारी जुटाएगी।
अन्य अधिकारियों और बिचौलियों पर भी जांच का शिकंजा
ईडी ने संकेत दिए हैं कि जांच केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है। घोटाले से लाभान्वित अन्य लोगों, बिचौलियों और इसमें कथित रूप से शामिल सरकारी अधिकारियों तथा कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
जांच एजेंसी का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं तथा कई अन्य नाम भी सामने आ सकते हैं।
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