CBSE Controversy: दिल्ली में CBSE से जुड़े कथित विवाद को लेकर सियासी और सामाजिक हलचल तेज हो गई है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने बोर्ड के चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता के ट्रांसफर को केवल एक औपचारिक कार्रवाई बताते हुए इसे “आईवॉश” करार दिया है। पार्टी का आरोप है कि यह कदम वास्तविक जवाबदेही तय करने के बजाय केवल जनता के दबाव को कम करने के लिए उठाया गया है।
दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में आयोजित अपनी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में पार्टी ने स्पष्ट कहा कि शिक्षा व्यवस्था में गंभीर खामियों को केवल अधिकारियों के तबादले से ठीक नहीं किया जा सकता। इस दौरान पार्टी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को भी दोहराया।
शिक्षा मंत्रालय पर सीधा हमला
कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ताओं ने कहा कि हालिया “ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM)” विवाद और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जिम्मेदारी सीधे मंत्रालय स्तर पर तय होनी चाहिए। प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि केवल अधिकारियों को हटाकर उन्हें अन्य महत्वपूर्ण पदों पर तैनात करना किसी भी तरह की सजा नहीं मानी जा सकती।
उनका कहना था कि प्रशासनिक फेरबदल को बड़ी कार्रवाई के रूप में प्रस्तुत करना असल मुद्दों से ध्यान भटकाने जैसा है। पार्टी ने इसे शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही की कमी का उदाहरण बताया।
सरकार और विपक्ष दोनों से बातचीत की पेशकश
CJP ने अपने रुख में यह भी स्पष्ट किया कि वे सरकार और विपक्ष दोनों से बातचीत के लिए तैयार हैं। पार्टी का कहना है कि उनका उद्देश्य राजनीतिक टकराव नहीं, बल्कि शिक्षा प्रणाली में सुधार और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।
प्रवक्ताओं ने दावा किया कि वर्तमान व्यवस्था में सुधार तभी संभव है जब संस्थागत जवाबदेही तय की जाए और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाई जाए।
6 जून को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की तैयारी
पार्टी के अनुसार, उसके संस्थापक अभिजीत दिपके 6 जून को अमेरिका से भारत लौटेंगे, जिसके बाद जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति के लिए आवेदन किया जाएगा। इस आंदोलन में देशभर के छात्रों और युवाओं से बिना किसी राजनीतिक बैनर के शामिल होने की अपील की गई है।
पार्टी ने कहा कि यह आंदोलन किसी एक संगठन का नहीं, बल्कि उन सभी छात्रों की आवाज है जो परीक्षा प्रणाली और शिक्षा ढांचे में सुधार चाहते हैं।
युवाओं की भागीदारी और समर्थन का दावा
प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह भी कहा गया कि इस आंदोलन को कुछ सामाजिक और जलवायु कार्यकर्ताओं का समर्थन मिल रहा है। लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के समर्थन का दावा करते हुए कहा गया कि वे भी इस प्रदर्शन में शामिल हो सकते हैं।
पार्टी का कहना है कि यह केवल प्रशासनिक मुद्दा नहीं है, बल्कि यह शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता और भविष्य की पीढ़ी से जुड़ा मामला है।
CBSE में हालिया बदलाव
विवाद के बीच केंद्र सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर बदलाव करते हुए लोखंडे प्रशांत सीताराम को नया CBSE चेयरमैन नियुक्त किया है। वहीं वरुण भारद्वाज को बोर्ड का नया सचिव बनाया गया है। इन बदलावों को लेकर ही पार्टी ने सवाल उठाए हैं और इसे “प्रशासनिक औपचारिकता” बताया है।
शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही पर जोर
CJP का कहना है कि केवल पदाधिकारियों का ट्रांसफर समस्या का समाधान नहीं है। पार्टी के अनुसार, जब तक शिक्षा प्रणाली में जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक इस तरह के विवाद बार-बार सामने आते रहेंगे।
प्रवक्ताओं ने विभिन्न राज्यों में शिक्षा स्तर के गिरते ग्राफ का हवाला देते हुए कहा कि यह केवल एक बोर्ड या एक परीक्षा का मुद्दा नहीं है, बल्कि पूरे सिस्टम की संरचनात्मक समस्या है।
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