प्रदेश में वर्तमान समय में करीब 1.90 लाख शासकीय शिक्षक कार्यरत हैं, लेकिन इनमें से केवल लगभग 35 हजार शिक्षक ही अब तक TET परीक्षा उत्तीर्ण कर पाए हैं। सबसे बड़ी चिंता उन करीब 85 हजार शिक्षकों को लेकर है, जिनके सामने अब भी TET पास करने की अनिवार्यता बनी हुई है। नियमों के अनुसार TET पास नहीं करने वाले शिक्षकों की पदोन्नति, सेवा लाभ और भविष्य की प्रशासनिक प्रक्रियाएं प्रभावित हो सकती हैं।
वरिष्ठ शिक्षकों की बढ़ी चिंता
मामले को लेकर सबसे ज्यादा चिंता वरिष्ठ शिक्षकों में देखी जा रही है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार लगभग 70 हजार ऐसे शिक्षक हैं, जिनकी सेवा अवधि अब पांच वर्ष से भी कम बची है। लंबे समय तक स्कूलों में पढ़ाने के बाद अब दोबारा प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करना उनके लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
शिक्षक संगठनों का कहना है कि जिन शिक्षकों ने वर्षों तक सरकारी स्कूलों में सेवा दी है, उनके अनुभव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। संगठनों की मांग है कि वरिष्ठ शिक्षकों के लिए अलग विभागीय पात्रता परीक्षा आयोजित की जाए या फिर उन्हें TET अनिवार्यता से विशेष छूट प्रदान की जाए।
DPI कई विकल्पों पर कर रहा विचार
लोक शिक्षण संचालनालय अब इस पूरे मामले में कई संभावित विकल्पों पर चर्चा कर रहा है। सूत्रों के अनुसार विभाग सेवा अनुभव को पात्रता से जोड़ने, विभागीय प्रशिक्षण को मान्यता देने और वरिष्ठ शिक्षकों के लिए अलग प्रावधान तैयार करने जैसे प्रस्तावों पर विचार कर रहा है।
DPI ने शिक्षक संघों से लिखित सुझाव मांगे हैं ताकि ऐसा प्रस्ताव तैयार किया जा सके, जिसमें शिक्षा की गुणवत्ता भी बनी रहे और वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों के हित भी प्रभावित न हों।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों का मानना है कि वर्तमान नियमों को पूरी तरह व्यावहारिक बनाना जरूरी है, क्योंकि बड़ी संख्या में शिक्षक उम्र और पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण नियमित प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी नहीं कर पा रहे हैं।
पदोन्नति पर मंडरा रहा संकट
यदि नियमों में बदलाव नहीं हुआ तो आने वाले समय में हजारों शिक्षक पदोन्नति से वंचित हो सकते हैं। यही कारण है कि शिक्षक संगठन लगातार सरकार पर दबाव बना रहे हैं।
संगठनों का तर्क है कि एक शिक्षक जो 20-25 वर्षों से स्कूलों में सेवाएं दे रहा है, उसके अनुभव और कार्य क्षमता का मूल्यांकन केवल एक परीक्षा से नहीं किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि सेवा अनुभव, प्रशिक्षण और कार्य प्रदर्शन को भी पात्रता का आधार बनाया जाना चाहिए।
विभागीय प्रशिक्षण को मिल सकती है मान्यता
सूत्रों के मुताबिक DPI इस बात पर भी विचार कर रहा है कि विभागीय ट्रेनिंग और शिक्षण अनुभव को TET पात्रता से जोड़ा जाए। यदि ऐसा होता है तो हजारों शिक्षकों को बड़ी राहत मिल सकती है।
कोरोना काल के बाद शिक्षा व्यवस्था में डिजिटल प्रशिक्षण, ई-लर्निंग और विभागीय मॉड्यूल आधारित प्रशिक्षण का दायरा बढ़ा है। ऐसे में विभाग अब पारंपरिक परीक्षा मॉडल के साथ वैकल्पिक मूल्यांकन प्रणाली पर भी चर्चा कर रहा है।
व्याख्याताओं की सूची तैयार करने के निर्देश
इधर लोक शिक्षण संचालनालय ने प्रोबेशन अवधि पूरी कर चुके व्याख्याताओं की सूची भी तैयार करना शुरू कर दिया है। DPI ने सभी संयुक्त संचालकों और जिला शिक्षा अधिकारियों को पत्र जारी कर ऐसे व्याख्याता ई एवं टी संवर्ग के शिक्षकों के प्रस्ताव भेजने को कहा है, जिनकी परिवीक्षा अवधि पूरी हो चुकी है लेकिन अब तक औपचारिक आदेश जारी नहीं हुए हैं।
आदेश लंबित रहने के कारण कई शिक्षकों को सेवा संबंधी लाभ नहीं मिल पा रहे थे। विभाग अब इस प्रक्रिया को भी तेज करने में जुटा है।
शिक्षकों को राहत की उम्मीद
DPI द्वारा सुझाव मांगने के बाद प्रदेशभर के शिक्षकों में उम्मीद जगी है कि सरकार जल्द कोई व्यवहारिक और राहत देने वाला निर्णय ले सकती है। खासतौर पर वरिष्ठ शिक्षक चाहते हैं कि लंबे अनुभव को महत्व दिया जाए और उन्हें परीक्षा के दबाव से राहत मिले।
अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि विभाग शिक्षक संघों से मिले सुझावों के आधार पर अंतिम प्रस्ताव में क्या बदलाव करता है और सरकार इस पर कब अंतिम फैसला लेती है। छत्तीसगढ़ की हर अपडेट के लिए हमारे WhatsApp चैनल को फॉलो करें- https://whatsapp.com/channel/0029VbBj50DATRSgaSxCmo2v





