New Fuel Rules: अब हर किसी को नहीं मिलेगा डीजल! बिलासपुर प्रशासन के नए आदेश से मचा हड़कंप

New Fuel Rules: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में प्रशासन ने अवैध बोरिंग और भूजल दोहन पर बड़ी कार्रवाई करते हुए निजी बोर मशीनों को डीजल देने पर सख्त प्रतिबंध लगा दिया है। कलेक्टर संजय अग्रवाल द्वारा जारी इस नए आदेश के बाद पेट्रोल पंप संचालकों, बोरिंग कारोबारियों और ठेकेदारों में हड़कंप मच गया है। अब जिले में बिना प्रशासनिक अनुमति के किसी भी निजी बोरिंग वाहन को डीजल नहीं दिया जाएगा। प्रशासन का कहना है कि यह फैसला लगातार बढ़ रहे अवैध नलकूप खनन और भूजल संकट को देखते हुए लिया गया है।

बिना अनुमति अब नहीं मिलेगा डीजल

जारी आदेश के अनुसार बिलासपुर जिले के सभी पेट्रोल पंप संचालकों को निर्देश दिया गया है कि वे किसी भी निजी बोर मशीन या बोरिंग वाहन को प्रशासन की अनुमति के बिना डीजल उपलब्ध न कराएं। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

कलेक्टर कार्यालय की ओर से जारी निर्देश में कहा गया है कि जिले में पेयजल परिरक्षण अधिनियम के तहत बिना सक्षम अनुमति के नलकूप खनन और बोरिंग कार्य पहले से ही प्रतिबंधित है। इसके बावजूद लगातार अवैध बोरिंग की शिकायतें मिल रही थीं। कई स्थानों पर रात के अंधेरे में निजी मशीनों से अवैध बोरिंग कर भूजल का दोहन किया जा रहा था।

अवैध बोरिंग रोकने प्रशासन का बड़ा कदम

प्रशासन का मानना है कि अवैध बोरिंग गतिविधियों को रोकने के लिए केवल मशीन जब्त करना पर्याप्त नहीं है। बोरिंग मशीनों का संचालन भारी मात्रा में डीजल पर निर्भर होता है, इसलिए ईंधन आपूर्ति पर रोक लगाकर इन गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सकता है।

खाद्य नियंत्रक अमृत कुजूर ने बताया कि आदेश का उल्लंघन करने वाले पेट्रोल पंप संचालकों और संबंधित लोगों के खिलाफ मोटर स्पिरिट एवं उच्च वेग डीजल (प्रदाय तथा वितरण का विनियमन और अनाचार निवारण) आदेश 2005 और आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत कार्रवाई की जाएगी।

यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। इसकी प्रतिलिपि खाद्य विभाग, परिवहन विभाग, तेल कंपनियों और पेट्रोल पंप एसोसिएशन को भी भेज दी गई है।

पेट्रोल पंप संचालकों में बढ़ी चिंता

नए आदेश के बाद जिले के पेट्रोल पंप संचालकों में भी चिंता बढ़ गई है। कई संचालकों का कहना है कि अब हर बोरिंग वाहन की जांच और अनुमति सत्यापित करना अतिरिक्त जिम्मेदारी बन जाएगी। वहीं बोरिंग व्यवसाय से जुड़े लोगों का कहना है कि वैध कार्यों में भी दिक्कतें आ सकती हैं।

हालांकि प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिनके पास वैध अनुमति होगी, उन्हें निर्धारित प्रक्रिया के तहत डीजल उपलब्ध कराया जाएगा। कार्रवाई केवल अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने के उद्देश्य से की जा रही है।

लगातार चल रहा अवैध खनन विरोधी अभियान

गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों से बिलासपुर जिला प्रशासन, राजस्व विभाग और खनिज विभाग संयुक्त रूप से अवैध बोरिंग और खनन के खिलाफ अभियान चला रहे हैं। कई इलाकों में छापेमारी कर बोर मशीनें, हाइवा वाहन और अन्य उपकरण जब्त किए जा चुके हैं।

प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि यदि समय रहते भूजल दोहन पर नियंत्रण नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में जल संकट और गंभीर हो सकता है। खासकर गर्मियों में तेजी से गिरते जलस्तर ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।

भूजल संरक्षण पर प्रशासन का फोकस

विशेषज्ञों का कहना है कि अनियंत्रित बोरिंग के कारण भूजल स्तर तेजी से नीचे जा रहा है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में जल स्रोत प्रभावित हो रहे हैं। प्रशासन अब भूजल संरक्षण को लेकर ज्यादा सख्त नजर आ रहा है।

बिलासपुर प्रशासन का यह फैसला केवल कानून व्यवस्था का मामला नहीं बल्कि पर्यावरण और जल संरक्षण से जुड़ा बड़ा कदम माना जा रहा है। आने वाले दिनों में अन्य जिलों में भी इसी तरह के सख्त निर्देश जारी होने की संभावना जताई जा रही है।

लोगों से सहयोग की अपील

प्रशासन ने आम लोगों और पेट्रोल पंप संचालकों से सहयोग की अपील की है। अधिकारियों ने कहा है कि यदि कहीं अवैध बोरिंग या बिना अनुमति बोर मशीन संचालन की जानकारी मिले तो तुरंत प्रशासन को सूचित करें।

प्रशासन का कहना है कि भूजल संरक्षण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी भी है। छत्तीसगढ़ की हर अपडेट के लिए हमारे WhatsApp चैनल को फॉलो करें- https://whatsapp.com/channel/0029VbBj50DATRSgaSxCmo2v