पुलिस ने शनिवार को अजय यादव, पंकज चंद्राकर और मनीष चौधरी को गिरफ्तार किया। इनमें अजय यादव महासमुंद के जिला खाद्य अधिकारी हैं, जबकि पंकज चंद्राकर गौरव गैस एजेंसी के संचालक और भाजपा नेता बताए जा रहे हैं। तीसरे आरोपी मनीष चौधरी रायपुर निवासी हैं।
100 टन से अधिक गैस गायब करने का आरोप
मामले की शुरुआत उस समय हुई जब सिंघोड़ा थाना क्षेत्र में एलपीजी गैस से भरे छह कैप्सूल ट्रकों को जब्त किया गया था। इन ट्रकों में 100 टन से अधिक गैस भरी हुई थी। पुलिस और जांच एजेंसियों के अनुसार जब्त गैस को सुरक्षित रखने और न्यायालयीन सुपुर्दनामा प्रक्रिया के दौरान ही कथित साजिश रचकर गैस को गायब किया गया।
जांच में सामने आया कि गैस को ठिकाने लगाने के लिए फर्जी दस्तावेजों का सहारा लिया गया। कथित तौर पर पंचनामा, सुपुर्दनामा और रिकॉर्ड में हेरफेर कर पूरे मामले को वैध दिखाने की कोशिश की गई।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह केवल साधारण गबन नहीं बल्कि सुनियोजित आर्थिक अपराध है, जिसमें सरकारी जिम्मेदारी संभाल रहे अधिकारी तक शामिल पाए गए।
जिला खाद्य अधिकारी पर गंभीर आरोप
मामले में सबसे बड़ा नाम जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव का सामने आया है। जांच एजेंसियों के मुताबिक जब्त गैस की सुरक्षा और निगरानी की जिम्मेदारी उन्हीं पर थी, लेकिन आरोप है कि उन्होंने ही पूरे षड्यंत्र में अहम भूमिका निभाई।
पुलिस का दावा है कि अजय यादव ने अपने पद और अधिकारों का दुरुपयोग करते हुए गैस बेचने की योजना तैयार की। जांच में कई दस्तावेज और वित्तीय लेन-देन भी सामने आए हैं, जिनकी पड़ताल जारी है।
सूत्रों के अनुसार मामले में कुछ अन्य अधिकारियों और कारोबारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। पुलिस अब बैंक खातों, मोबाइल कॉल रिकॉर्ड और वित्तीय लेन-देन की भी जांच कर रही है।
गुप्त बैठक में बनी गैस बेचने की योजना
पुलिस जांच के अनुसार 23 मार्च को अजय यादव और भाजपा नेता पंकज चंद्राकर के बीच पहली गुप्त बैठक हुई थी। इसी बैठक में जब्त गैस को बेचने की कथित रणनीति तैयार की गई।
जांच में यह भी सामने आया कि रायपुर निवासी मनीष चौधरी को गैस खपाने के लिए अलग-अलग एजेंसियों और कारोबारियों से संपर्क साधने की जिम्मेदारी दी गई थी।
पुलिस के मुताबिक पूरा नेटवर्क बेहद योजनाबद्ध तरीके से काम कर रहा था ताकि सरकारी रिकॉर्ड में किसी प्रकार की शंका न उत्पन्न हो।
80 लाख में हुआ गैस बेचने का सौदा
जांच एजेंसियों के अनुसार 26 मार्च को रायपुर स्थित ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स के साथ गैस बेचने का सौदा करीब 80 लाख रुपये में तय हुआ था। पुलिस का दावा है कि रकम के बंटवारे की योजना भी पहले से तय कर ली गई थी।
जांच के मुताबिक तय राशि में:
- 50 लाख रुपये अजय यादव को,
- 20 लाख रुपये पंकज चंद्राकर को,
- और 10 लाख रुपये मनीष चौधरी को मिलने थे।
पुलिस का कहना है कि पैसों के लेन-देन को छिपाने के लिए अलग-अलग बैंक खातों में “सिक्योरिटी मनी” और अन्य नामों से राशि ट्रांसफर की गई।
अब आर्थिक लेन-देन से जुड़े दस्तावेजों और बैंक रिकॉर्ड की विस्तृत जांच की जा रही है।
पुलिस जांच में सामने आ सकता है बड़ा नेटवर्क
महासमुंद एलपीजी स्कैम में अब तक की जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। अधिकारियों का मानना है कि यह मामला केवल तीन लोगों तक सीमित नहीं हो सकता। संभावना जताई जा रही है कि गैस परिवहन, वितरण और दस्तावेजी प्रक्रिया से जुड़े अन्य लोग भी जांच के दायरे में आ सकते हैं।
सूत्रों के मुताबिक पुलिस जल्द ही कुछ और लोगों से पूछताछ कर सकती है। मामले की गंभीरता को देखते हुए आर्थिक अपराध शाखा और अन्य एजेंसियों की भी मदद ली जा सकती है।
प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में मचा हड़कंप
जिला खाद्य अधिकारी और भाजपा नेता की गिरफ्तारी के बाद महासमुंद से लेकर रायपुर तक प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ गई है। विपक्ष इस मामले को बड़ा भ्रष्टाचार और प्रशासनिक विफलता बता रहा है, जबकि जांच एजेंसियां इसे राज्य के बड़े गैस गबन मामलों में से एक मान रही हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले दिनों में यह मामला और बड़ा रूप ले सकता है क्योंकि इसमें सरकारी विभाग, कारोबारी नेटवर्क और राजनीतिक कनेक्शन तीनों जुड़े दिखाई दे रहे हैं।
पहले भी सामने आए थे LPG गड़बड़ी के मामले
छत्तीसगढ़ में एलपीजी परिवहन और वितरण से जुड़े विवाद पहले भी सामने आते रहे हैं, लेकिन इतनी बड़ी मात्रा में गैस गायब होने और सरकारी अधिकारी की गिरफ्तारी का मामला बेहद गंभीर माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जांच में आरोप प्रमाणित होते हैं तो यह राज्य के सबसे बड़े एलपीजी घोटालों में शामिल हो सकता है।
सोशल मीडिया पर ट्रेंड हुआ मामला
महासमुंद एलपीजी स्कैम की खबर सामने आने के बाद सोशल Media पर भी मामला तेजी से वायरल हो गया। “LPG Scam”, “Gas Ghotala”, “Mahasamund News” और “Food Officer Arrested” जैसे कीवर्ड लगातार ट्रेंड करते नजर आए।
लोग सोशल मीडिया पर सरकारी सिस्टम में भ्रष्टाचार और प्रशासनिक निगरानी को लेकर सवाल उठा रहे हैं। कई यूजर्स ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग भी की है। छत्तीसगढ़ की हर अपडेट के लिए हमारे WhatsApp चैनल को फॉलो करें- https://whatsapp.com/channel/0029VbBj50DATRSgaSxCmo2v





