Raipur Fraud Case: राजधानी रायपुर में पैतृक संपत्ति हड़पने के लिए कथित तौर पर फर्जी वसीयतनामा तैयार कर करोड़ों रुपए की जमीन अपने नाम कराने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। मामले में न्यायालय के आदेश के बाद सिविल लाइन थाना पुलिस ने तीन लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचना और षड्यंत्र समेत विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज की है। यह मामला रायपुर के राजातालाब क्षेत्र स्थित एक पैतृक जमीन से जुड़ा हुआ है, जिसकी कीमत करोड़ों में बताई जा रही है।
पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर में बलजीत कौर कुछत्री, सुरेश यदु और बलवंत सिंह को आरोपी बनाया गया है। शिकायतकर्ता राकेश कुछत्री ने अदालत में परिवाद प्रस्तुत कर पूरे मामले का खुलासा किया।
पैतृक जमीन को लेकर शुरू हुआ विवाद
मिली जानकारी के अनुसार यह पूरा मामला ग्राम पंडरीतराई स्थित उस जमीन से जुड़ा है, जो शिकायतकर्ता के पिता स्वर्गीय स्वर्णलाल कुछत्री के नाम पर दर्ज बताई गई थी। शिकायतकर्ता का आरोप है कि उनके भाई स्वर्गीय राजकुमार कुछत्री ने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर फर्जी वसीयतनामा तैयार कराया और उसी के आधार पर जमीन पर कब्जा करने की साजिश रची।
परिवाद में दावा किया गया है कि वसीयतनामे में स्वर्णलाल कुछत्री के कथित रूप से फर्जी हस्ताक्षर किए गए थे। आरोप है कि दस्तावेज को असली दिखाने के लिए पूरी योजना के तहत कूटरचना की गई।
फर्जी दस्तावेजों के जरिए कराया गया नामांतरण
एफआईआर के अनुसार जिस संपत्ति का उल्लेख कथित वसीयतनामे में किया गया, वह जमीन मूल रूप से स्वर्णलाल कुछत्री के नाम पर दर्ज ही नहीं थी। इसके बावजूद आरोपियों ने कथित फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर राजस्व रिकॉर्ड में नामांतरण करा लिया।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया के दौरान वास्तविक वारिसों को जानकारी तक नहीं दी गई और न ही उन्हें पक्षकार बनाया गया। आरोप यह भी है कि राजस्व विभाग के कुछ अधिकारियों को प्रभाव में लेकर रिकॉर्ड में बदलाव कराया गया।
इस खुलासे के बाद पूरे मामले ने गंभीर कानूनी और प्रशासनिक सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह केवल पारिवारिक संपत्ति विवाद नहीं बल्कि सुनियोजित भूमि घोटाले का मामला बन सकता है।
बैंक में मॉर्टगेज कर लिया आर्थिक फायदा
मामले में एक और बड़ा खुलासा यह हुआ है कि विवादित संपत्ति को बाद में आरोपी बलजीत कौर कुछत्री के नाम स्थानांतरित कर बैंक में मॉर्टगेज भी किया गया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि जमीन गिरवी रखकर आर्थिक लाभ लिया गया और बैंक से वित्तीय सुविधा हासिल की गई।
शिकायत में कहा गया है कि आरोपी सुरेश यदु और बलवंत सिंह ने कथित वसीयतनामे में गवाह के रूप में हस्ताक्षर किए और पूरे षड्यंत्र में सहयोग किया।
अब पुलिस यह जांच कर रही है कि दस्तावेज तैयार करने से लेकर नामांतरण और बैंक मॉर्टगेज तक की प्रक्रिया में किन-किन लोगों की भूमिका रही।
कोर्ट के आदेश के बाद दर्ज हुई FIR
बताया जा रहा है कि शिकायतकर्ता लंबे समय से मामले की शिकायत कर रहे थे, लेकिन कार्रवाई नहीं होने पर उन्होंने न्यायालय की शरण ली। अदालत में प्रस्तुत दस्तावेजों और तथ्यों के आधार पर कोर्ट ने पुलिस को एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए।
कोर्ट के आदेश के बाद सिविल लाइन थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब संबंधित दस्तावेजों की सत्यता, राजस्व रिकॉर्ड, बैंक मॉर्टगेज और हस्ताक्षरों की जांच कर रही है।
संभावना जताई जा रही है कि जांच आगे बढ़ने पर कुछ और लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है।
रायपुर में बढ़ रहे Property Fraud के मामले
राजधानी रायपुर में पिछले कुछ वर्षों में जमीन और संपत्ति से जुड़े फर्जीवाड़े के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी गई है। खासकर फर्जी दस्तावेज, नकली रजिस्ट्री, कूटरचित वसीयतनामा और अवैध नामांतरण के जरिए जमीन कब्जाने के कई मामले सामने आ चुके हैं।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार पारिवारिक संपत्ति विवादों में फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। कई मामलों में मृत व्यक्तियों के नाम से नकली दस्तावेज तैयार कर जमीन का ट्रांसफर तक कर दिया जाता है।
इस मामले में भी कथित तौर पर मृतक के हस्ताक्षर का उपयोग किए जाने का आरोप बेहद गंभीर माना जा रहा है।
पुलिस जुटी जांच में
सिविल लाइन थाना पुलिस का कहना है कि मामले की विस्तृत जांच की जा रही है। दस्तावेजों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा जा सकता है। साथ ही बैंक रिकॉर्ड और राजस्व विभाग के दस्तावेज भी खंगाले जा रहे हैं।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक यदि जांच में आरोप प्रमाणित होते हैं तो आरोपियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। मामले में आर्थिक अपराध शाखा और राजस्व विभाग से भी जानकारी जुटाई जा सकती है।
शहर में बना चर्चा का विषय
करोड़ों की जमीन, फर्जी वसीयत और बैंक मॉर्टगेज से जुड़े इस मामले ने रायपुर में काफी चर्चा पैदा कर दी है। सोशल मीडिया पर भी Raipur Property Fraud, Fake Will Case और Land Scam जैसे कीवर्ड तेजी से ट्रेंड कर रहे हैं।
राजधानी में सामने आया यह मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर रहा है कि जमीन और संपत्ति से जुड़े मामलों में दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया कितनी मजबूत है और फर्जीवाड़े को रोकने के लिए प्रशासनिक निगरानी कितनी प्रभावी है। छत्तीसगढ़ की हर अपडेट के लिए हमारे WhatsApp चैनल को फॉलो करें- https://whatsapp.com/channel/0029VbBj50DATRSgaSxCmo2v




