Ambikapur News: सरगुजा जिले के अंबिकापुर में एक बार फिर वन भूमि पर अतिक्रमण के खिलाफ बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई देखने को मिली। शहर से लगे ग्राम पंचायत खैरबार के डबरीपानी इलाके में शुक्रवार को प्रशासन, वन विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने बुलडोजर कार्रवाई करते हुए करीब 20 मकानों को ध्वस्त कर दिया। कार्रवाई के दौरान पूरे इलाके को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया था। बड़ी संख्या में पुलिस बल, राजस्व विभाग और वन विभाग के अधिकारी मौके पर मौजूद रहे।
बताया जा रहा है कि डबरीपानी क्षेत्र में लंबे समय से संरक्षित वन भूमि पर अवैध कब्जा कर मकान बनाए गए थे। इस मामले को लेकर भाजपा पार्षद एवं नेता आलोक दुबे लगातार प्रशासन और वन विभाग पर कार्रवाई का दबाव बना रहे थे। शिकायत के बाद वन विभाग ने जांच कराई और जांच में वन भूमि पर अतिक्रमण की पुष्टि हुई। इसके बाद प्रशासन ने नोटिस जारी कर कब्जा हटाने के निर्देश दिए थे, लेकिन समय सीमा समाप्त होने के बाद भी अतिक्रमण नहीं हटाया गया। अंततः शुक्रवार को बुलडोजर कार्रवाई की गई।
2 महीने पहले हुई थी शिकायत, जांच में सही निकला मामला
जानकारी के मुताबिक भाजपा नेता आलोक दुबे ने करीब दो महीने पहले डीएफओ कार्यालय में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि डबरीपानी क्षेत्र में संरक्षित वन भूमि पर अवैध कब्जा कर बड़ी संख्या में मकान बनाए गए हैं। शिकायत में यह भी कहा गया था कि कुछ लोगों ने पेड़ों की कटाई कर वन भूमि को कब्जे में लिया है।
शिकायत मिलने के बाद वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की। जांच में पाया गया कि क्षेत्र में वन भूमि पर अतिक्रमण कर स्थायी निर्माण किए गए हैं। इसके बाद विभाग ने अतिक्रमणकारियों को 12 मार्च और 17 मार्च को बेदखली नोटिस जारी किए।
हालांकि नोटिस मिलने के बावजूद कब्जाधारियों ने जमीन खाली नहीं की। इसके बाद मामला राजनीतिक रूप से भी गरमा गया। भाजपा पार्षद आलोक दुबे ने 29 अप्रैल को मुख्यमंत्री को पत्र लिखते हुए आरोप लगाया कि वन विभाग कार्रवाई में देरी कर रहा है। उन्होंने डीएफओ की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए थे।
सुबह से शुरू हुई कार्रवाई, पूरे इलाके में पुलिस बंदोबस्त
शुक्रवार सुबह प्रशासनिक टीम भारी पुलिस बल के साथ डबरीपानी पहुंची। कार्रवाई के दौरान किसी भी प्रकार का विरोध या तनाव न हो, इसके लिए पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी। बुलडोजर की मदद से एक-एक कर करीब 20 मकानों को तोड़ा गया।
स्थानीय लोगों के अनुसार कार्रवाई शुरू होने से पहले प्रशासन ने माइक से घोषणा कर लोगों को घर खाली करने के निर्देश दिए। इसके बाद जेसीबी मशीनों की मदद से निर्माण हटाए गए।
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई न्यायालयीन और विभागीय प्रक्रिया पूरी करने के बाद की गई है। जिन लोगों को नोटिस दिया गया था, उन्हें पर्याप्त समय भी दिया गया था।
महामाया पहाड़ से जुड़े इलाकों में फैला है अतिक्रमण
अंबिकापुर शहर से लगे महामाया पहाड़ क्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों में तेजी से अतिक्रमण बढ़ा है। प्रशासनिक रिकॉर्ड के अनुसार डबरीपानी, घुटरापारा और नवागढ़ इलाके में कुल 157 लोगों द्वारा संरक्षित वन भूमि पर कब्जा कर मकान बनाए गए हैं।
इससे पहले भी महामाया पहाड़ क्षेत्र में करीब 40 मकानों पर बुलडोजर कार्रवाई की जा चुकी है। अब प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि आगे भी अभियान जारी रहेगा और अन्य अवैध कब्जों को भी हटाया जाएगा।
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि संरक्षित वन भूमि पर किसी भी प्रकार का निर्माण अवैध है और ऐसे मामलों में लगातार निगरानी की जा रही है। विभाग अब पूरे क्षेत्र का सर्वे कराने की तैयारी में भी जुटा है ताकि अन्य अतिक्रमणों की पहचान की जा सके।
वन विभाग के कर्मचारियों पर मिलीभगत के आरोप
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा आरोप वन विभाग के कुछ कर्मचारियों पर लगा है। शिकायत में कहा गया था कि विभागीय कर्मचारियों की मिलीभगत से पेड़ों की कटाई कर कब्जा कराया गया। जांच के दौरान भी कई ऐसे तथ्य सामने आए, जिनके बाद विभागीय भूमिका पर सवाल उठने लगे।
हालांकि अधिकारियों का कहना है कि यदि किसी कर्मचारी की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल प्रशासन का पूरा फोकस वन भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने पर है।
राजनीतिक रूप से भी गरमाया मामला
डबरीपानी अतिक्रमण मामला अब राजनीतिक मुद्दा भी बन गया है। भाजपा इसे वन भूमि बचाने और प्रशासनिक सख्ती की कार्रवाई बता रही है, जबकि स्थानीय स्तर पर इस कार्रवाई को लेकर कई तरह की चर्चाएं भी चल रही हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अंबिकापुर और सरगुजा क्षेत्र में वन भूमि अतिक्रमण का मुद्दा आने वाले समय में बड़ा चुनावी विषय बन सकता है। भाजपा इस मुद्दे को कानून व्यवस्था और सरकारी जमीन बचाने के अभियान के रूप में प्रस्तुत कर रही है।
प्रशासन ने दिया स्पष्ट संदेश
शुक्रवार की कार्रवाई के बाद प्रशासन ने स्पष्ट संकेत दिया है कि सरकारी और संरक्षित जमीनों पर कब्जा किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में भी ऐसे अभियान जारी रहेंगे और जहां भी अवैध कब्जे पाए जाएंगे, वहां नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
स्थानीय प्रशासन अब अतिक्रमण वाले अन्य क्षेत्रों की सूची भी तैयार कर रहा है। संभावना जताई जा रही है कि आने वाले हफ्तों में और भी बड़ी कार्रवाई देखने को मिल सकती है।
इलाके में बनी रही चर्चा
बुलडोजर कार्रवाई के बाद पूरे इलाके में दिनभर इस घटना की चर्चा होती रही। बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंचे और कार्रवाई को देखते रहे। सोशल मीडिया पर भी Bulldozer Action, Forest Encroachment और Ambikapur News जैसे कीवर्ड तेजी से ट्रेंड करते नजर आए।
अंबिकापुर में वन भूमि पर अतिक्रमण का यह मामला अब केवल प्रशासनिक कार्रवाई तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय भी बन चुका है। आने वाले दिनों में इस पर और सियासत तेज होने की संभावना जताई जा रही है। छत्तीसगढ़ की हर अपडेट के लिए हमारे WhatsApp चैनल को फॉलो करें- https://whatsapp.com/channel/0029VbBj50DATRSgaSxCmo2v





