Sushasan Tihar: “कब दिलाओगे पेंशन?” धमतरी में बुजुर्गों का फूटा गुस्सा, जनसमस्या शिविर में खुली व्यवस्थाओं की पोल

Sushasan Tihar: छत्तीसगढ़ सरकार के बहुचर्चित ‘सुशासन तिहार’ कार्यक्रम के तहत धमतरी में आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर उस समय सवालों के घेरे में आ गया, जब महीनों से पेंशन नहीं मिलने से परेशान बुजुर्गों ने अधिकारियों के सामने खुलकर नाराजगी जाहिर की। वार्डों में लगाए गए शिविर में लोगों ने न सिर्फ सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में लापरवाही का मुद्दा उठाया, बल्कि पेयजल, सड़क, बिजली, राशन और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं की बदहाल स्थिति भी सामने रखी।

बुधवार को सरदार वल्लभभाई पटेल वार्ड और बठेना वार्ड में आयोजित शिविर में बड़ी संख्या में लोग अपनी शिकायतें लेकर पहुंचे। इस दौरान सबसे ज्यादा गुस्सा उन बुजुर्गों में देखने को मिला, जिन्हें पिछले कई महीनों से पेंशन की राशि नहीं मिली है।


“तीन-चार महीने से नहीं मिली पेंशन”

शिविर में पहुंचे कई बुजुर्गों ने अधिकारियों को घेरते हुए पूछा कि आखिर उनकी पेंशन कब मिलेगी। बठेना वार्ड निवासी सीता बाई और लक्षण ध्रुव ने बताया कि पिछले चार महीनों से उनके खाते में पेंशन की राशि नहीं आई है। उन्होंने कहा कि कई बार दफ्तरों के चक्कर लगाने के बावजूद केवल आश्वासन मिलता है, समाधान नहीं।

बुजुर्गों का कहना था कि वृद्धावस्था में पेंशन ही उनके जीवनयापन का मुख्य सहारा है। ऐसे में लगातार कई महीनों तक राशि नहीं मिलने से उन्हें रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने में भारी परेशानी हो रही है।

शिविर में मौजूद कई अन्य पेंशनधारियों ने भी इसी तरह की शिकायतें दर्ज कराईं। लोगों ने आरोप लगाया कि संबंधित विभाग में शिकायत करने पर स्पष्ट जवाब नहीं दिया जाता और उन्हें एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय भेजा जाता है।


महतारी वंदन योजना को लेकर भी नाराजगी

केवल वृद्धा पेंशन ही नहीं, बल्कि महतारी वंदन योजना को लेकर भी महिलाओं में नाराजगी देखने को मिली। उत्तरा बाई ध्रुव नामक महिला ने अधिकारियों को बताया कि उन्होंने ई-केवायसी की प्रक्रिया पूरी कर ली है, लेकिन इसके बावजूद उनके खाते में योजना की राशि नहीं पहुंच रही है।

महिला ने आरोप लगाया कि महिला एवं बाल विकास विभाग कार्यालय में शिकायत करने पर अधिकारी गोलमोल जवाब देते हैं और समस्या का समाधान नहीं किया जा रहा।

यह मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि सरकार की कई प्रमुख योजनाएं सीधे लाभार्थियों तक आर्थिक सहायता पहुंचाने के उद्देश्य से चलाई जा रही हैं। इसके बावजूद लाभार्थियों का महीनों तक भुगतान से वंचित रहना प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल खड़े कर रहा है।


शिविर में खुलकर सामने आईं वार्ड की समस्याएं

सुशासन तिहार के तहत लगाए गए इस शिविर में कुल 28 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें अधिकांश शिकायतें बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी थीं।

लोगों ने बताया कि:

  • कई इलाकों में पेयजल आपूर्ति अनियमित है
  • बिजली के तार झूल रहे हैं, जिससे हादसे का खतरा बना हुआ है
  • सड़कों की हालत खराब है
  • नालियों की सफाई नहीं हो रही
  • कई जगह अधूरी नालियां बनी हुई हैं
  • सार्वजनिक शौचालयों का रखरखाव नहीं हो रहा
  • नए शौचालय निर्माण की जरूरत है
  • आंगनबाड़ी केंद्रों की हालत जर्जर है
  • स्ट्रीट लाइट बंद हैं और पोलों में बल्ब नहीं लगे
  • शराब भट्टी हटाने की मांग भी उठी

इसके अलावा राशन दुकानों में चावल और अन्य जरूरी सामग्री नहीं मिलने की शिकायतें भी सामने आईं।


अधिकारियों को सुननी पड़ी खरी-खरी

शिविर में मौजूद अधिकारियों को लोगों के तीखे सवालों का सामना करना पड़ा। कई बुजुर्गों ने साफ शब्दों में कहा कि योजनाओं का प्रचार तो खूब होता है, लेकिन जमीन पर उन्हें उसका लाभ नहीं मिल रहा।

कुछ लोगों ने कहा कि “सुशासन” का दावा तभी सफल माना जाएगा जब लोगों को समय पर पेंशन, राशन और मूलभूत सुविधाएं मिलें।

स्थानीय लोगों के गुस्से और नाराजगी ने यह साफ कर दिया कि सरकारी योजनाओं की मॉनिटरिंग और क्रियान्वयन में अभी भी कई स्तरों पर सुधार की जरूरत है।


आयुक्त ने लिया स्थिति का जायजा

नगर निगम आयुक्त प्रिया गोयल ने बठेना वार्ड में लगे शिविर का निरीक्षण किया। उन्होंने मौके पर मौजूद लोगों की शिकायतें सुनीं और अधिकारियों को कई मामलों में त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए।

आयुक्त ने विशेष रूप से पेंशन से जुड़ी शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जल्द निराकरण का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि लोगों की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा।

हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि वे अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि जमीन पर परिणाम देखना चाहते हैं।


सुशासन तिहार की वास्तविक परीक्षा

छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा चलाया जा रहा ‘सुशासन तिहार’ आम लोगों की समस्याओं को मौके पर सुनकर उनका समाधान करने की पहल के रूप में देखा जा रहा है। लेकिन धमतरी में सामने आई तस्वीर ने यह दिखा दिया कि कई योजनाओं का लाभ अब भी समय पर लोगों तक नहीं पहुंच पा रहा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रशासनिक स्तर पर मॉनिटरिंग मजबूत नहीं हुई तो ऐसी शिकायतें लगातार बढ़ती रहेंगी।


बुजुर्गों की नाराजगी बनी बड़ा संकेत

पेंशन जैसी योजनाएं समाज के कमजोर और बुजुर्ग वर्ग के लिए जीवनरेखा मानी जाती हैं। ऐसे में कई महीनों तक भुगतान नहीं होना केवल तकनीकी समस्या नहीं, बल्कि सामाजिक चिंता का विषय भी है।

धमतरी के इस शिविर में बुजुर्गों की नाराजगी ने सरकार और प्रशासन दोनों के सामने यह बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि योजनाओं की घोषणा और वास्तविक लाभ के बीच की दूरी आखिर कब खत्म होगी। छत्तीसगढ़ की हर अपडेट के लिए हमारे WhatsApp चैनल को फॉलो करें- https://whatsapp.com/channel/0029VbBj50DATRSgaSxCmo2v