CG Crime: छत्तीसगढ़ में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां पद्मश्री से सम्मानित प्रसिद्ध समाजसेवी फुलबासन यादव के अपहरण की कोशिश को पुलिस की सतर्कता ने नाकाम कर दिया। हैरानी की बात यह है कि एक साधारण सीट बेल्ट चालान ने इस पूरे मामले का खुलासा कर दिया और बड़ी साजिश विफल हो गई।
मामला मंगलवार सुबह का है, जब आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से फुलबासन यादव को अपने जाल में फंसाया। हालांकि, पुलिस की समय पर कार्रवाई के कारण न केवल उनकी जान बच गई, बल्कि पूरे गिरोह को भी पकड़ लिया गया।
सीट बेल्ट चालान बना बड़ा सुराग
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कीर्तन राठौर के अनुसार, सुबह करीब 10:30 बजे मुख्य आरोपी खुशबू साहू अपने तीन साथियों के साथ फुलबासन यादव के घर ग्राम सुकुलदैहान पहुंची। उसने दिव्यांग महिला के साथ फोटो खिंचवाने का झांसा देकर उन्हें अपनी स्कॉर्पियो गाड़ी में बैठाया।
गाड़ी में बैठते ही आरोपियों ने उनके हाथ-पैर बांध दिए और मुंह बंद कर दिया। इसके बाद वे खैरागढ़ की ओर भागने लगे।
इसी दौरान चिखली पुलिस चौकी के पास यातायात जांच कर रहे निरीक्षक नवरतन कश्यप ने वाहन को रोका और सीट बेल्ट न पहनने पर चालान किया।
जब चालक पैसे देने के लिए गाड़ी का पिछला दरवाजा खोल रहा था, तभी फुलबासन यादव ने मौका पाकर आरोपी को लात मारी और जोर-जोर से मदद के लिए चिल्लाने लगीं।
संदेह हुआ, और खुल गया पूरा राज
आरोपी खुशबू साहू ने पुलिस को गुमराह करने के लिए फुलबासन को मिर्गी का मरीज बताया, लेकिन पुलिस को शक हो गया। जैसे ही उन्हें गाड़ी से नीचे उतारा गया, पूरा मामला सामने आ गया।
इसके बाद तत्काल कार्रवाई करते हुए चारों आरोपियों को हिरासत में लेकर चिखली पुलिस चौकी के सुपुर्द कर दिया गया।
4 आरोपी गिरफ्तार, पूछताछ जारी
पुलिस ने मुख्य आरोपी खुशबू साहू सहित कुल चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। मामले में आगे की जांच जारी है और आरोपियों से पूछताछ की जा रही है।
प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि आरोपी फुलबासन यादव के नाम का इस्तेमाल कर अपनी पहचान और प्रभाव बढ़ाना चाहते थे।
‘ब्रांडिंग’ के लिए रची गई साजिश
पुलिस के अनुसार, मुख्य आरोपी खुशबू साहू स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के बीच अपनी पहचान बनाना चाहती थी। इसके लिए वह फुलबासन यादव का नाम और प्रभाव इस्तेमाल करना चाहती थी।
यह भी जानकारी सामने आई है कि फुलबासन के नाम पर पहले से ही कुछ महिलाओं से उगाही की जा चुकी थी। जब इस बात की भनक फुलबासन यादव को लगी, तो उन्होंने आरोपी को कोई महत्व नहीं दिया।
बताया जा रहा है कि आरोपी ने बेमेतरा क्षेत्र में एक कार्यक्रम आयोजित किया था, जिसमें वह फुलबासन यादव को जबरन शामिल कराकर अपनी छवि मजबूत करना चाहती थी।
घटना के बाद भावुक हुईं फुलबासन यादव
अपहरण की कोशिश से सुरक्षित बचने के बाद फुलबासन यादव से मिलने महापौर मधुसूदन यादव उनके गांव पहुंचे। इस दौरान वह भावुक हो गईं और पुलिस का आभार जताया।
उन्होंने कहा कि समाजसेवा से मिले आशीर्वाद और पुलिस की तत्परता के कारण ही आज वह सुरक्षित हैं।
संघर्ष से सम्मान तक का सफर
फुलबासन यादव का जीवन संघर्ष और प्रेरणा का उदाहरण है।
- जन्म: 1969, ग्राम सुकुलदैहान
- बाल विवाह: मात्र 10 वर्ष की उम्र में
- जीवन संघर्ष: मजदूरी, पशुपालन, गरीबी से जंग
उन्होंने वर्ष 2001 में स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को संगठित करना शुरू किया। “एक मुट्ठी चावल और दो रुपये बचत” के अभियान से उन्होंने हजारों महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया।
आज उनके नेतृत्व में करीब 2 लाख महिलाएं जुड़ी हुई हैं, जो सामाजिक और आर्थिक बदलाव की दिशा में काम कर रही हैं।
सम्मान और योगदान
फुलबासन यादव को उनके योगदान के लिए कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिल चुके हैं, जिनमें पद्मश्री प्रमुख है।
उनके नेतृत्व में:
- 1200 से अधिक गांवों में जल संरक्षण अभियान
- 20 हजार से ज्यादा सोख्ता गड्ढों का निर्माण
- महिलाओं को जैविक खेती और मिलेट मिशन से जोड़ना
निष्कर्ष: सतर्कता से टली बड़ी घटना
यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि छोटी सी सतर्कता भी बड़ी वारदात को रोक सकती है। यदि यातायात पुलिस सीट बेल्ट जांच नहीं कर रही होती, तो यह मामला गंभीर रूप ले सकता था।
साथ ही, यह मामला समाज में बढ़ते फर्जीवाड़े और प्रभाव हासिल करने के लिए गलत रास्ते अपनाने की प्रवृत्ति पर भी गंभीर सवाल खड़ा करता है। छत्तीसगढ़ की हर अपडेट के लिए हमारे WhatsApp चैनल को फॉलो करें- https://whatsapp.com/channel/0029VbBj50DATRSgaSxCmo2v
