CG ACB Action: छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार सख्ती के बीच एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। मनेन्द्रगढ़ नगर पालिका में पदस्थ दो अधिकारियों को 33 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया है।
इस कार्रवाई के बाद पूरे नगर पालिका कार्यालय में हड़कंप मच गया और कर्मचारियों के बीच खलबली का माहौल बन गया। एसीबी की यह ट्रैप कार्रवाई अंबिकापुर टीम द्वारा योजनाबद्ध तरीके से की गई, जिसमें दोनों आरोपी सीधे जाल में फंस गए।
कौन-कौन अधिकारी गिरफ्तार हुए?
एसीबी ने जिन अधिकारियों को गिरफ्तार किया है, उनमें शामिल हैं:
- प्रभारी सीएमओ (राजस्व उप निरीक्षक) मो. ईशहाक खान
- प्रभारी लेखापाल सुशील कुमार
दोनों पर आरोप है कि उन्होंने निर्माण कार्य के भुगतान के बदले रिश्वत की मांग की थी। फिलहाल दोनों को हिरासत में लेकर आगे की पूछताछ की जा रही है।
क्या था पूरा मामला?
एसीबी के अनुसार, शिकायतकर्ता चन्द्रमणी वर्मा, निवासी आमाखेरवा (मनेन्द्रगढ़), “साईं कंस्ट्रक्शन एंड सप्लायर” के नाम से फर्म संचालित करते हैं।
उन्होंने नगर पालिका के अंतर्गत:
- वार्ड क्रमांक-11 में रिटर्निंग वॉल निर्माण
- वार्ड क्रमांक-8 में सीसी सड़क निर्माण
जैसे कार्य किए थे, जिनकी कुल लागत करीब 5.90 लाख रुपए थी।
इन कार्यों का भुगतान लंबे समय से लंबित था। आरोप है कि भुगतान जारी करने के लिए अधिकारियों द्वारा रिश्वत की मांग की जा रही थी।
ट्रैप प्लान: ऐसे बिछाया गया जाल
शिकायत मिलने के बाद एसीबी ने पूरे मामले का सत्यापन किया। जांच में पाया गया कि आरोपी लेखापाल सुशील कुमार पहले ही 20 हजार रुपए रिश्वत के रूप में ले चुका था।
इसके बाद एसीबी ने 23 मार्च को ट्रैप प्लान किया।
- शिकायतकर्ता को 33 हजार रुपए लेकर भेजा गया
- जैसे ही रकम आरोपियों को सौंपी गई
- एसीबी टीम ने मौके पर दबिश देकर दोनों को पकड़ लिया
लेखापाल को कार्यालय से और सीएमओ को उसके निवास से गिरफ्तार किया गया।
किन धाराओं में मामला दर्ज?
दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7 और 12 के तहत मामला दर्ज किया गया है।
अब एसीबी आगे की जांच कर रही है, जिसमें यह भी पता लगाया जाएगा कि इस मामले में और कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं।
नगर पालिका में मचा हड़कंप
इस कार्रवाई के बाद नगर पालिका मनेन्द्रगढ़ में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
कर्मचारियों में डर और असमंजस की स्थिति देखने को मिली। कई कर्मचारी इस कार्रवाई के बाद अपने-अपने स्तर पर सतर्क हो गए हैं।
स्थानीय लोगों ने भी इस कार्रवाई का स्वागत किया है और इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम बताया है।
पहले भी हो चुकी हैं ऐसी कार्रवाई
छत्तीसगढ़ में एसीबी लगातार भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई कर रही है। हाल ही में सूरजपुर जिले में भी एक बाबू को 25 हजार रुपए रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया था।
वह आरोपी एसीबी टीम को देखकर भागने की कोशिश कर रहा था, लेकिन टीम ने उसे दौड़ाकर पकड़ लिया।
इस तरह की लगातार कार्रवाई से साफ संकेत मिल रहा है कि राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्ती बढ़ाई जा रही है।
क्यों बढ़ रहे हैं ऐसे मामले?
विशेषज्ञों का मानना है कि:
- निर्माण कार्यों में भुगतान प्रक्रिया जटिल होती है
- फाइल पास कराने के लिए अनावश्यक दबाव बनाया जाता है
- छोटे ठेकेदारों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है
इन्हीं कारणों से रिश्वतखोरी के मामले सामने आते हैं।
आम लोगों और ठेकेदारों पर असर
इस तरह की कार्रवाई का सीधा असर आम लोगों और छोटे ठेकेदारों पर पड़ता है।
सकारात्मक प्रभाव:
- भ्रष्टाचार पर अंकुश
- पारदर्शिता बढ़ेगी
- अधिकारियों में डर का माहौल
लेकिन यह भी जरूरी है कि सिस्टम को इतना सरल बनाया जाए कि लोगों को रिश्वत देने की नौबत ही न आए।
प्रशासन के लिए संदेश
एसीबी की इस कार्रवाई ने एक स्पष्ट संदेश दिया है कि:
भ्रष्टाचार करने वाले अधिकारियों को बख्शा नहीं जाएगा
शिकायत मिलने पर तुरंत कार्रवाई होगी
पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा दिया जाएगा
असर और मायने
मनेन्द्रगढ़ में हुई यह कार्रवाई सिर्फ एक गिरफ्तारी नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम के लिए चेतावनी है।
यदि इसी तरह सख्ती जारी रही, तो आने वाले समय में सरकारी दफ्तरों में पारदर्शिता बढ़ेगी और आम जनता को राहत मिलेगी।
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