Monday, March 23, 2026
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Naxal News: बस्तर के जंगल में बड़ा ऑपरेशन, दंतेवाड़ा-बीजापुर सीमा पर मुठभेड़, ₹5 लाख का इनामी माओवादी राजेश पुनेम ढेर

दंतेवाड़ा–बीजापुर, छत्तीसगढ़ | Naxal / Security Operation

Naxal News: छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग से एक बड़ी खबर सामने आई है। दंतेवाड़ा और बीजापुर की सीमा से लगे घने जंगलों में सुरक्षा बलों और माओवादियों के बीच हुई मुठभेड़ में ₹5 लाख का इनामी माओवादी मार गिराया गया है।

मुठभेड़ के बाद सुरक्षा बलों ने मौके से हथियारों और माओवादी गतिविधियों से जुड़ी बड़ी मात्रा में सामग्री भी बरामद की है। घटना के बाद पूरे इलाके में सघन सर्चिंग ऑपरेशन तेज कर दिया गया है, क्योंकि आशंका है कि माओवादी दल के अन्य सदस्य आसपास के जंगलों में छिपे हो सकते हैं।

यह मुठभेड़ बस्तर में चल रहे एंटी-नक्सल ऑपरेशन के बीच सुरक्षा बलों के लिए एक अहम सफलता मानी जा रही है।


गुप्त सूचना के आधार पर शुरू हुआ ऑपरेशन

पुलिस अधिकारियों के अनुसार दंतेवाड़ा जिले के गीदम थाना क्षेत्र में गुमलनार, गिरसापारा और नेलगोड़ा के बीच स्थित जंगल-पहाड़ी इलाके में माओवादियों द्वारा हथियार और अन्य सामग्री छिपाकर रखने की सूचना मिली थी।

सूचना को गंभीरता से लेते हुए सुरक्षा एजेंसियों ने तुरंत कार्रवाई की योजना बनाई। इसके तहत डीआरजी (District Reserve Guard) और बस्तर फाइटर्स की संयुक्त टीम को सर्चिंग ऑपरेशन के लिए रवाना किया गया।

जवानों की टीम इलाके में घने जंगलों और पहाड़ी क्षेत्रों में तलाशी अभियान चला रही थी। इसी दौरान उनका सामना पहले से घात लगाए बैठे माओवादियों से हो गया।


घात लगाकर माओवादियों ने शुरू की फायरिंग

जानकारी के मुताबिक यह मुठभेड़ रात करीब 8:30 से 9 बजे के बीच शुरू हुई।

बताया जा रहा है कि भैरमगढ़ एरिया कमेटी से जुड़े लगभग 8 से 10 सशस्त्र माओवादी पहले से घात लगाकर बैठे थे। जैसे ही सुरक्षा बलों की टीम उस इलाके में पहुंची, माओवादियों ने अचानक फायरिंग शुरू कर दी।

अचानक हुई गोलीबारी के बावजूद जवानों ने तुरंत मोर्चा संभाला और जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी। कुछ देर तक दोनों तरफ से लगातार गोलीबारी होती रही


सुरक्षा बलों की जवाबी कार्रवाई के बाद माओवादी भागे

सुरक्षा बलों की सटीक जवाबी कार्रवाई के बाद माओवादी दल दबाव में आ गया।

हालांकि घने जंगल और पहाड़ी इलाके का फायदा उठाकर कई माओवादी मौके से भागने में सफल हो गए। लेकिन जवाबी कार्रवाई के दौरान एक माओवादी गंभीर रूप से घायल होकर मौके पर ही ढेर हो गया।

मुठभेड़ के शांत होने के बाद सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके को घेरकर तलाशी अभियान शुरू किया।


तलाशी में मिला माओवादी का शव और हथियार

मुठभेड़ के बाद जब जवानों ने घटनास्थल की तलाशी ली तो वहां से एक पुरुष माओवादी का शव बरामद किया गया

इसके अलावा मौके से हथियार और माओवादी गतिविधियों से जुड़ी कई महत्वपूर्ण सामग्री भी जब्त की गई। बरामद सामान में हथियार, कारतूस और अन्य दस्तावेज शामिल बताए जा रहे हैं।

पुलिस का कहना है कि इन सामग्रियों से माओवादी संगठन की गतिविधियों और नेटवर्क से जुड़े कई अहम सुराग मिलने की संभावना है।


राजेश पुनेम के रूप में हुई पहचान

पुलिस ने मृत माओवादी की पहचान राजेश पुनेम के रूप में की है।

राजेश पुनेम भैरमगढ़ एरिया कमेटी (ACM) का सक्रिय सदस्य बताया जा रहा है। वह बीजापुर जिले के गंगालूर थाना क्षेत्र के बुरजी गांव का निवासी था

राज्य सरकार ने उस पर ₹5 लाख का इनाम घोषित कर रखा था, क्योंकि वह लंबे समय से माओवादी गतिविधियों में सक्रिय था और सुरक्षा बलों की नजर में वांछित था।


माओवादी नेटवर्क पर बड़ा झटका

सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार इस मुठभेड़ में राजेश पुनेम के मारे जाने से भैरमगढ़ एरिया कमेटी को बड़ा झटका लगा है

बस्तर क्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों से सुरक्षा बल लगातार अभियान चलाकर माओवादी नेटवर्क को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं।

इस ऑपरेशन को उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत जंगलों में छिपे माओवादी ठिकानों और हथियार डम्प को नष्ट किया जा रहा है


जंगलों में अभी भी जारी है सर्चिंग ऑपरेशन

पुलिस अधिकारियों के अनुसार मुठभेड़ के बाद भी इलाके में अभियान खत्म नहीं हुआ है।

सुरक्षा बलों की अतिरिक्त टीमों को भी इलाके में तैनात किया गया है और आसपास के जंगलों में व्यापक सर्चिंग ऑपरेशन चलाया जा रहा है

अधिकारियों का कहना है कि बाकी माओवादियों की तलाश की जा रही है ताकि उन्हें पकड़ने या उनके ठिकानों को नष्ट करने की कार्रवाई की जा सके।


बस्तर में लगातार तेज हो रहे ऑपरेशन

पिछले कुछ महीनों में बस्तर संभाग के कई जिलों में सुरक्षा बलों ने माओवादियों के खिलाफ लगातार अभियान चलाए हैं।

इन अभियानों के दौरान कई माओवादी मारे गए हैं, जबकि कई ने आत्मसमर्पण भी किया है।

सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि लगातार दबाव और ऑपरेशन की वजह से माओवादी संगठन की गतिविधियां कमजोर हो रही हैं, हालांकि जंगलों के कठिन भूगोल के कारण यह अभियान अभी भी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।


इलाके में सुरक्षा बढ़ाई गई

मुठभेड़ के बाद पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी है।

जवानों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं और आसपास के गांवों में भी निगरानी बढ़ा दी गई है ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।

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Sarthak Bohidar
Sarthak Bohidarhttp://www.cginsights.in
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