नई दिल्ली | राष्ट्रीय राजनीति
National News: देशभर में ट्रेड यूनियनों की एकदिवसीय हड़ताल के बीच केंद्र सरकार की आर्थिक और श्रम नीतियों पर राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। कांग्रेस नेता Rahul Gandhi ने आरोप लगाया है कि सरकार ने मजदूरों और किसानों के भविष्य से जुड़े अहम फैसले लेते समय उनकी आवाज़ों को पूरी तरह नजरअंदाज किया। उन्होंने सीधे प्रधानमंत्री से सवाल किया कि क्या अब वे इन वर्गों की बात सुनेंगे या उन पर “बहुत मजबूत पकड़” है।
गुरुवार (12 फरवरी 2026) को केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच द्वारा बुलाए गए राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन में लाखों श्रमिकों के शामिल होने का दावा किया गया। इस हड़ताल को नए लेबर कोड, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते और मनरेगा से जुड़े मुद्दों के विरोध के रूप में पेश किया गया है। कांग्रेस ने खुलकर इस आंदोलन का समर्थन किया है, जिससे यह मुद्दा सड़क से लेकर संसद तक गरमा गया है।
30 करोड़ श्रमिकों की भागीदारी का दावा, सरकार की नीतियों पर सीधा वार
ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच ने दावा किया कि करीब 30 करोड़ श्रमिक इस “जनरल स्ट्राइक” में शामिल हो रहे हैं। उनका आरोप है कि चार नए श्रम संहिताओं से मजदूरों के अधिकार कमजोर होंगे और कॉरपोरेट हितों को प्राथमिकता दी जा रही है।
विरोध कर रहे संगठनों का कहना है कि श्रम सुधारों के नाम पर सुरक्षा, न्यूनतम वेतन और नौकरी की स्थिरता जैसे मुद्दों पर समझौता किया जा रहा है। इसके साथ ही भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर भी असंतोष जताया गया है, जिसे किसान संगठनों ने अपनी आजीविका के लिए खतरा बताया है।
राहुल गांधी का तीखा हमला, “क्या मोदीजी सुनेंगे अब?”
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पोस्ट और बयान के जरिए सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि लाखों मजदूर और किसान अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं।

उन्होंने लिखा,
“चार श्रम संहिताओं से श्रमिकों को डर है कि उनके अधिकार कमजोर होंगे। किसानों को आशंका है कि व्यापार समझौता उनकी आजीविका को प्रभावित करेगा। मनरेगा को कमजोर या खत्म करने से गांवों का आखिरी सहारा छिन सकता है। क्या मोदीजी अब सुनेंगे? या उन पर कोई पकड़ बहुत मजबूत है?”
यह बयान ऐसे समय में आया है जब संसद में बजट सत्र के दौरान भी विपक्ष लगातार सरकार को घेर रहा है। राहुल गांधी ने एक दिन पहले लोकसभा में बहस के दौरान भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को “समर्पण” करार दिया था।
खड़गे बोले – ‘ट्रैप डील’ से गिरवी रखा भविष्य
कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge ने भी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि देश के मजदूर, किसान और छोटे व्यापारी सड़कों पर हैं क्योंकि सरकार ने “जनविरोधी ट्रैप डील” के जरिए करोड़ों लोगों के भविष्य को दांव पर लगा दिया है।
खड़गे ने कहा कि विदेशी दबाव में लिए गए फैसलों से राष्ट्रीय हित प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जो लोग “अबकी बार ट्रंप सरकार” का नारा लगाते थे, उन्होंने देश के हितों को नुकसान पहुंचाया है। यहां उनका इशारा अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump की ओर था।
उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस का संघर्ष सड़क से संसद तक जारी रहेगा और मजदूरों-किसानों की आवाज़ बुलंद की जाएगी।
प्रियंका गांधी का समर्थन, ‘किसानों से विश्वासघात’ का आरोप
कांग्रेस महासचिव Priyanka Gandhi Vadra ने भी ट्रेड यूनियनों के आंदोलन को समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार का व्यापार समझौता किया गया है, उससे किसानों को नुकसान झेलना पड़ सकता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार किसानों और मजदूरों की चिंताओं को गंभीरता से नहीं ले रही है। उनके मुताबिक, अगर यही स्थिति रही तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर व्यापक असर पड़ सकता है।
संसद में गरमाई बहस, प्रधानमंत्री पर विपक्ष का दबाव
बजट सत्र के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि अगर विपक्षी गठबंधन की सरकार अमेरिका के साथ समझौता करती तो वह समान शर्तों पर बातचीत करती। उन्होंने प्रधानमंत्री Narendra Modi का नाम लेते हुए कहा कि देश के ऊर्जा, खाद्य और डेटा सुरक्षा जैसे अहम क्षेत्रों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए थी।
उन्होंने मार्शल आर्ट की उपमा देते हुए कहा कि पहले “ग्रिप” बनती है, फिर “चोकहोल्ड” और अंत में प्रतिद्वंदी हार मान लेता है। उनके अनुसार, सरकार ने भारत के रणनीतिक हितों की पर्याप्त सुरक्षा नहीं की।
विवाद के केंद्र में लेबर कोड और मनरेगा
चार नए लेबर कोड लंबे समय से राजनीतिक बहस का विषय रहे हैं। सरकार का तर्क है कि इन सुधारों से श्रम कानूनों को सरल और आधुनिक बनाया गया है, जिससे निवेश बढ़ेगा और रोजगार सृजन होगा।
वहीं, विरोध करने वाले संगठनों का कहना है कि इससे श्रमिक सुरक्षा कमजोर होगी और ठेका प्रथा को बढ़ावा मिलेगा।
इसी तरह, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को लेकर भी चिंता जताई जा रही है। विपक्ष का आरोप है कि बजट में पर्याप्त प्रावधान नहीं होने से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार पर असर पड़ सकता है। हालांकि सरकार ने पहले भी इन आरोपों को खारिज किया है।
आगे क्या होगा? राजनीतिक तापमान और बढ़ने के संकेत
देश के कई राज्यों में हड़ताल का असर देखने को मिला, हालांकि अलग-अलग जगहों से अलग तस्वीरें सामने आईं। कुछ क्षेत्रों में परिवहन और बैंकिंग सेवाओं पर असर पड़ा, जबकि कई जगह सामान्य गतिविधियां जारी रहीं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमाएगा, खासकर तब जब संसद में इस पर विस्तृत बहस होगी। विपक्ष इसे बड़े जनआंदोलन में बदलने की कोशिश कर सकता है, जबकि सरकार अपनी नीतियों को विकासोन्मुख और सुधारात्मक बताती रही है।
फिलहाल यह स्पष्ट है कि ट्रेड डील, लेबर कोड और मनरेगा जैसे मुद्दे 2026 की राजनीतिक बहस के केंद्र में आ चुके हैं। अब नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार इन आरोपों पर क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया देती है और क्या कोई संवाद की पहल होती है।
छत्तीसगढ़ की हर अपडेट के लिए हमारे WhatsApp चैनल को फॉलो करें – https://whatsapp.com/channel/0029VbBj50DATRSgaSxCmo2v
साथ ही हमारे Facebook पेज से जुड़े – https://www.facebook.com/profile.php?id=61579881036814




Recent Comments