रायपुर | शिक्षा
CG News: छत्तीसगढ़ में स्कूल शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, एकरूप और गुणवत्तापूर्ण बनाने की दिशा में बड़ा फैसला लिया गया है। कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी के निर्देश पर जिले में कक्षा 5वीं और 8वीं की केंद्रीकृत वार्षिक परीक्षा (Centralised Annual Exam) में सभी सरकारी और निजी स्कूलों की सहभागिता अनिवार्य कर दी गई है। इसे लेकर जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) डॉ. के.वी. राव ने स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि किसी भी स्कूल को इस परीक्षा प्रणाली से बाहर रहने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
इस संबंध में सेंट जेवियर्स स्कूल, बोईरादादर में गैर-सरकारी स्कूलों के प्राचार्यों के साथ एक अहम समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग, रायपुर द्वारा शैक्षणिक सत्र 2025–26 के लिए जारी दिशा-निर्देशों पर विस्तार से चर्चा की गई।
कक्षा 5वीं और 8वीं की केंद्रीकृत परीक्षा क्यों अहम
बैठक में बताया गया कि राज्य सरकार द्वारा कक्षा 5वीं और 8वीं के लिए केंद्रीकृत परीक्षा प्रणाली लागू करने का उद्देश्य प्राथमिक और माध्यमिक स्तर पर शिक्षा की गुणवत्ता का समान आकलन करना है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि शहरी और ग्रामीण, सरकारी और निजी सभी स्कूलों में पढ़ाई का स्तर एक समान रहे और छात्रों का मूल्यांकन निष्पक्ष तरीके से हो सके।
डॉ. के.वी. राव ने स्पष्ट किया कि इस परीक्षा में सेकेंडरी एजुकेशन बोर्ड से संबद्ध सभी स्कूलों—सरकारी, गैर-सरकारी, सहायता प्राप्त (एडेड), हिंदी और अंग्रेजी माध्यम—के छात्रों की भागीदारी अनिवार्य होगी। किसी भी स्कूल द्वारा परीक्षा से दूरी बनाए जाने पर नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी।
परीक्षा तिथि और जिम्मेदारी तय
डायरेक्टोरेट ऑफ पब्लिक इंस्ट्रक्शन (DPI) द्वारा जारी टाइम-टेबल के अनुसार—
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कक्षा 5वीं की केंद्रीकृत परीक्षा: 16 मार्च से 25 मार्च 2026
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कक्षा 8वीं की केंद्रीकृत परीक्षा: 17 मार्च से 6 अप्रैल 2026
इन परीक्षाओं के सफल संचालन, प्रश्नपत्र वितरण, परीक्षा केंद्र निर्धारण, उत्तरपुस्तिका मूल्यांकन और परिणाम तैयार करने की पूरी जिम्मेदारी जिला शिक्षा अधिकारी को सौंपी गई है। DEO ने कहा कि परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
पाठ्यपुस्तकों को लेकर सख्त निर्देश
रिव्यू मीटिंग में पाठ्यपुस्तकों को लेकर भी सख्त निर्देश दिए गए। DEO ने स्पष्ट किया कि—
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सेकेंडरी एजुकेशन बोर्ड से जुड़े स्कूलों में केवल छत्तीसगढ़ टेक्स्टबुक कॉर्पोरेशन और स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा निर्धारित पुस्तकों से ही पढ़ाई कराई जाएगी।
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CBSE और अन्य बोर्ड से संबद्ध स्कूलों में सिर्फ NCERT की पाठ्यपुस्तकों का उपयोग अनिवार्य होगा।
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किसी भी अन्य निजी पब्लिशर की किताबें पढ़ाने पर संबंधित स्कूल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इस फैसले का उद्देश्य अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ कम करना और शिक्षा को एक समान पाठ्यक्रम के तहत संचालित करना है।
अभिभावकों के हित में बड़ा फैसला
बैठक में यह भी साफ किया गया कि कोई भी स्कूल अभिभावकों को किसी एक दुकान से किताबें, कॉपी, यूनिफॉर्म या अन्य शैक्षणिक सामग्री खरीदने के लिए मजबूर नहीं करेगा। स्कूल परिसर में इन सामग्रियों की बिक्री पर भी पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।
DEO ने चेतावनी दी कि यदि इस संबंध में कोई शिकायत प्राप्त होती है और जांच में शिकायत सही पाई जाती है, तो संबंधित स्कूल के खिलाफ कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। शिक्षा विभाग का मानना है कि इस तरह के नियमों से अभिभावकों को अनावश्यक खर्च से राहत मिलेगी।
10वीं–12वीं के परिणाम सुधार पर फोकस
मीटिंग में जिले के कक्षा 10वीं और 12वीं के परीक्षा परिणामों की भी समीक्षा की गई। इस दौरान वर्ष 2026 के लिए महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किए गए—
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कक्षा 10वीं का लक्ष्य: 85 प्रतिशत परिणाम
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कक्षा 12वीं का लक्ष्य: 90 प्रतिशत परिणाम
इसके लिए रणनीति तय करते हुए निर्देश दिए गए कि प्री-बोर्ड परीक्षा में 85 प्रतिशत से अधिक अंक लाने वाले विद्यार्थियों के लिए विशेष मेंटर नियुक्त किए जाएं। उद्देश्य यह है कि अधिक से अधिक छात्र मेरिट सूची में स्थान बना सकें और जिले का शैक्षणिक प्रदर्शन बेहतर हो।
अधिकारियों और प्राचार्यों की मौजूदगी
इस महत्वपूर्ण बैठक में परीक्षा नोडल अधिकारी भुवनेश्वर पटेल, ब्रांच इंचार्ज लोकेश गुप्ता, सेंट जेवियर्स स्कूल के प्राचार्य सहित जिले के सभी गैर-सरकारी स्कूलों के प्राचार्य और प्रबंधक उपस्थित रहे। सभी ने विभाग के निर्देशों का पालन करने और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने में सहयोग का भरोसा दिलाया।
शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की दिशा में कदम
केंद्रीकृत परीक्षा, एकरूप पाठ्यक्रम और सख्त निगरानी व्यवस्था को शिक्षा विशेषज्ञ छत्तीसगढ़ में स्कूली शिक्षा सुधार की दिशा में बड़ा कदम मान रहे हैं। इससे न केवल छात्रों के शैक्षणिक स्तर का वास्तविक आकलन हो सकेगा, बल्कि स्कूलों की जवाबदेही भी बढ़ेगी।
शिक्षा विभाग का स्पष्ट संदेश है—नियमों का पालन सभी स्कूलों को करना होगा, ताकि छात्रों का भविष्य सुरक्षित और मजबूत बनाया जा सके।
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