गढ़चिरौली/बीजापुर | नक्सल विरोधी अभियान | 6 फरवरी 2026
Naxal Encounter: देश और छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाकों में नक्सलवाद के खिलाफ चलाए जा रहे निर्णायक अभियान ने अब अंतिम चरण में प्रवेश कर लिया है। सरकार द्वारा तय की गई समयसीमा में महज करीब दो महीने शेष हैं। ऐसे में सुरक्षाबलों ने नक्सलियों के खिलाफ आक्रामक और बहुस्तरीय कार्रवाई तेज कर दी है। बीते 24 घंटों के भीतर सुरक्षाबलों को एक ओर जहां बड़ी सफलता मिली है, वहीं दूसरी ओर एक जवान की शहादत से पूरे सुरक्षा तंत्र में शोक का माहौल भी है।
गढ़चिरौली में भीषण मुठभेड़, तीन नक्सली ढेर
छत्तीसगढ़ की सीमा से सटे महाराष्ट्र के नक्सल प्रभावित गढ़चिरौली जिले में गुरुवार शाम सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच भीषण मुठभेड़ हुई। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह मुठभेड़ उस वक्त हुई जब सुरक्षाबलों की संयुक्त टीम को जंगल क्षेत्र में नक्सलियों की मौजूदगी की पुख्ता सूचना मिली थी।
सूचना के आधार पर विशेष अभियान चलाया गया। तलाशी के दौरान नक्सलियों ने सुरक्षाबलों पर अचानक फायरिंग शुरू कर दी, जिसके बाद दोनों ओर से लंबे समय तक गोलीबारी हुई। इस मुठभेड़ में तीन नक्सली मारे गए, जबकि एक पुलिस जवान देश की सुरक्षा करते हुए शहीद हो गया।
हथियार और गोला-बारूद बरामद
मुठभेड़ के बाद घटनास्थल से सुरक्षाबलों ने —
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स्वचालित हथियार
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देसी हथियार
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भारी मात्रा में गोला-बारूद
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नक्सली साहित्य
बरामद किया है। पुलिस के अनुसार, मारे गए नक्सलियों की पहचान की प्रक्रिया जारी है। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि मारे गए नक्सली सक्रिय दस्ता का हिस्सा थे और कई बड़ी वारदातों में शामिल रहे होंगे।
शहीद जवान को श्रद्धांजलि, पूरे क्षेत्र में शोक
Naxal Encounter: मुठभेड़ में शहीद हुए जवान की शहादत से पूरे सुरक्षा बल और प्रशासनिक महकमे में गमगीन माहौल है। वरिष्ठ अधिकारियों ने शहीद जवान को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि —
“नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई निर्णायक मोड़ पर है। हमारे जवानों का बलिदान इस अभियान को और मजबूती देगा।”
डेडलाइन से पहले अंतिम प्रहार की रणनीति
सरकारी सूत्रों के अनुसार, नक्सलवाद के पूर्ण उन्मूलन को लेकर केंद्र और राज्य सरकार ने स्पष्ट समयसीमा तय की है। इसी के तहत —
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सीमावर्ती राज्यों में संयुक्त अभियान
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इंटेलिजेंस नेटवर्क को मजबूत करना
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नक्सलियों के मूवमेंट पर लगातार निगरानी
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सप्लाई लाइन और शरणस्थलों को तोड़ना
जैसी रणनीतियों पर काम किया जा रहा है। गढ़चिरौली में हुई मुठभेड़ को इसी अंतिम प्रहार की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
बीजापुर में 12 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण
Naxal Encounter: एक ओर जहां सुरक्षाबल मुठभेड़ में नक्सलियों को करारा जवाब दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले से नक्सलवाद के खिलाफ एक सकारात्मक तस्वीर भी सामने आई है।
गुरुवार को बीजापुर में 12 नक्सलियों ने सुरक्षाबलों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली ‘पूना मारगेम’ अभियान से प्रभावित होकर हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लेकर सामने आए हैं।
‘पूना मारगेम’ अभियान का असर
‘पूना मारगेम’ अभियान के तहत —
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नक्सलियों को मुख्यधारा में लाने के प्रयास
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पुनर्वास योजनाएं
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रोजगार और सुरक्षा की गारंटी
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सामाजिक स्वीकार्यता
जैसे पहलुओं पर जोर दिया जा रहा है। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों ने बताया कि जंगलों में लगातार दबाव, विकास कार्यों की पहुंच और सरकार की पुनर्वास नीति ने उन्हें आत्मसमर्पण के लिए प्रेरित किया।
सुरक्षा और विकास की दोहरी रणनीति
Naxal Encounter: विशेषज्ञों का मानना है कि नक्सलवाद के खिलाफ मौजूदा रणनीति केवल सुरक्षा बलों की कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके साथ —
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सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार
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आदिवासी क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं की पहुंच
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युवाओं को रोजगार से जोड़ने की पहल
भी की जा रही है। इसी दोहरी रणनीति का परिणाम है कि एक ओर नक्सली संगठन कमजोर हो रहे हैं और दूसरी ओर आत्मसमर्पण की घटनाएं बढ़ रही हैं।
निष्कर्ष
गढ़चिरौली की मुठभेड़ और बीजापुर में आत्मसमर्पण की घटनाएं यह साफ संकेत देती हैं कि नक्सलवाद अब अंतिम दौर में है। हालांकि इस संघर्ष में जवानों का बलिदान देश के लिए गहरी पीड़ा भी छोड़ जाता है। आने वाले दो महीनों में सुरक्षाबलों की कार्रवाई नक्सलवाद के भविष्य को निर्णायक रूप से तय करने वाली मानी जा रही है।
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